योना 2:5 बाइबल पद की व्याख्या
योना 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं जल से यहाँ तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे; गहरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था।
योना 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 69:1 (HINIRV) »
प्रधान बजानेवाले के लिये शोशन्नीम राग में दाऊद का गीत हे परमेश्वर, मेरा उद्धार कर, मैं जल में डूबा जाता हूँ।

भजन संहिता 40:2 (HINIRV) »
उसने मुझे सत्यानाश के गड्ढे और दलदल की कीच में से उबारा*, और मुझ को चट्टान पर खड़ा करके मेरे पैरों को दृढ़ किया है।

योना 2:5 का तात्पर्य और पाठ का तात्कालिक संदर्भ
पवित्र ग्रंथ का यह पाठ योना के भयावह अण्डरकवर, डूबने के क्षणों में डूबे होने का दृश्यमान चित्र प्रस्तुत करता है। समुद्र की गहराई उनके चारों ओर उफनती है; जल से घिरा हुआ, प्राण निकट हैं; और सिर पर सिवार लिपटा हुआ है। यह दृश्य एक व्यक्ति की अत्यंत व्याकुलता और रक्षा के लिये ईश्वर के प्रति आवश्यकता का प्रतीक है। यह हिस्सा यह बताता है कि परमेश्वर की उपस्थिति बड़े और छोटे हर परिस्थिति में रहती है, यहाँ तक कि गहरे समुद्र में भी वही सीधा हाथ थामे रहता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ का संकेत
यह श्लोक स्पष्ट रूप से बताता है कि परमेश्वर दयालु न्यायी और उद्धारकर्ता है—जो एक बार डूबते हुए व्यक्ति के लिए गहराईयों में भी पहुँच सकता है। योना अपने अभिष्ट के विपरीत, परमेश्वर के सामर्थ्य और करूणा के सामने असहाय महसूस करता है; परन्तु अंदर ही अंदर यह विश्वास जगा रहता है कि परमेश्वर की युक्तियाँ और कृपा उसे बचाने के लिये तैयार हैं। यह उद्धार की गुंजाइश को संकेत करता है कि ईश्वर दयालुता से विपरीत परिस्थितियों में भी लोगों को आवाज देता है और उन्हें दया और उद्धार की दिशा में ले जाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की व्याख्या
Related passages (संकेत अर्थ के साथ)
क) जहाँ घोर संकट में भी परमेश्वर की जयकार होती है (जाब 2:8-9) — यह दिखाता है कि समुद्र-समर्थ प्रतिकूलताओं के बीच भी ईश्वर के गुण शांति और उद्धार में परिवर्तित होते हैं।
ख) दया और उद्धार की उम्मीद— अन्यत्र भी संकट में भगवान की करुणा प्रत्यक्ष होती है (जोहन 6:37; भजन 34:18)।
ग) आत्म-उद्धार का विश्वास— कठिन परिस्थिति के बीच भी विनीत प्रार्थना और ईश्वर की सहायता से जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
आज के समय में व्यवहारिक उपयोग
जब हम गहरे आघात, विनाश या असफलताओं का सामना करते हैं, तब यह पाठ याद दिलाता है कि परमेश्वर के पास से ही शरण मिलती है। कठिन समय में एक ईमानदार प्रार्थना और परमेश्वर की कृपा पर विश्वास हमारे जीवन के लिए सुरक्षा-स्तंभ बन सकता है। अपने डर को ईश्वर के सामने उद्घाटित करना, और उनकी ओर से मिलने वाले साहस को पकड़ना, 현재 की विपत्तियों में भी स्थिर रहने का मार्ग है।
संक्षिप्त सार
योना 2:5 में दिखाया गया है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर के साथ रहने की आशा है; जल-घिराव और गहरे समुद्र के बीच योना का अनुभव भय से मुक्त होकर उद्धार की दिशा की ओर संकेत करता है। यह पाठ हमारे विश्वास को गहराते हुए यह याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को डूबते समय भी नहीं छोड़ते और उनकी salvation की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
यहाँ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विचारों से मिलते-जुलते स्वर का एक संयुक्त प्रभाव यह है कि परमेश्वर की कृपा संकट के बीच भी साकार होती है, और डर के बावजूद आस्था की आवाज़ ईश्वर तक पहुँचे—जो उद्धार की प्रमुख कुंजी है।
Cross references: