योना 2:7 बाइबल पद की व्याख्या
योना 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैंने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन् तेरे पवित्र मन्दिर में पहुँच गई।
योना 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योना 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 18:6 (HINIRV) »
अपने संकट में मैंने यहोवा परमेश्वर को पुकारा; मैंने अपने परमेश्वर की दुहाई दी। और उसने अपने मन्दिर* में से मेरी वाणी सुनी। और मेरी दुहाई उसके पास पहुँचकर उसके कानों में पड़ी।

2 इतिहास 30:27 (HINIRV) »
अन्त में लेवीय याजकों ने खड़े होकर प्रजा को आशीर्वाद दिया, और उनकी सुनी गई, और उनकी प्रार्थना उसके पवित्र धाम तक अर्थात् स्वर्ग तक पहुँची।

भजन संहिता 143:5 (HINIRV) »
मुझे प्राचीनकाल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूँ, और तेरे हाथों के कामों को सोचता हूँ।
योना 2:7 का संदर्भ और संदर्भगत अर्थ
योनाह ने समुद्री गहरे पानी में पैदा हुए संकट के समय अपनी मौत के खतरे से बाहर निकलने के लिए ईश्वरीय सहायता पुकारा। यह verse उसी क्रम का भाग है जब वह समुद्र की गहराईयों में समर्पण और विनय के साथ परमेश्वर की स्मरण में आता है और अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों से भी नहीं, बल्कि दया के लिए प्रार्थना करता है। यह अनुभव बताता है कि भक्त की क्षीणताओं में परमेश्वर की कृपा कैसे सामने आती है और वह उसी के नाम पर बचाव पाता है।
मुख्य अर्थ (Central Meaning)
योना कहता है कि जब वह अवसादन और मौत से घिर गया था, तब उसने Jehovah को स्मरण किया और उसकी प्रार्थना प्रार्थना के सही शृंगार में परमेश्वर के पवित्र मंदिर तक पहुँच गई। यह बात दो बातें स्पष्ट करती है: कोई भी परिस्थिति हो, प्रार्थना एक विश्वासपूर्ण निर्बंध है, और परमेश्वर के समक्ष मन की ईमानदारी उसे स्वीकार्य बनाती है।
तीन प्रमुख थीम
संबद्ध अंश (Related Passages)
• दानियेल 9:3-4 — संकटों के समय प्रार्थना और पवित्रता की खोज। यह दर्शाता है कि संकट में प्रार्थना और आत्म-समर्पण कैसे ईश्वरीय कृपा के मार्ग खोलते हैं।
• पापुस 4:6 — प्रभु के साथ नम्रता और प्रार्थना का प्रभाव; प्रभु दया से भरते हैं।
• भजन 50:15 — विपत्ति के समय ईश्वर को पुकारना और उद्धार पाना।
व्यावहारिक विचार (Practical Reflection)
संक्षिप्त समापन
योना 2:7 में यह बात स्पष्ट है कि विपत्ति के समय भी प्रार्थना और ईश्वर की स्मृति जीवन को नया उद्धार दे सकती है। प्रभु की करुणा उस भक्त के पक्ष में है जो सच्चे दिल से पुकारे। यह विशेष पाठ हमें याद दिलाता है कि कठिन समय में भी प्रार्थना की दीपक जली रहना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ही उद्धारकर्ता है।
पूर्वदर्शन उद्धरणs (Quotes from public-domain comentarors)
Matthew Henry से: "In distress the sinner remembers God; in distress the saint learns to call upon the name of the Lord." (संदर्भ- सम्वादी टिप्पणी के स्वरूप में सार) [कूटनीति-Exact quotes के लिए संकलन]
Albert Barnes से: "The prayer ascends to God as from the depths, and finds its way to his holy temple; showing that sincere supplication rises above danger." (संक्षेपित सार)
Adam Clarke से: "Distress drives to prayer; longing for relief leads to the temple of God."
नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल सारगर्भित संदर्भ हैं और विशिष्ट पंक्तियों के रूप में नहीं दिए गए हैं ताकि दर्शनात्मक संदर्भ स्पष्ट रहें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-references)
• दानियेल 3:18 — दृढ़ विश्वास के साथ कठिन परीक्षाओं में भी ईश्वर के प्रति समर्पण।
• भजन 34:18 — दुखी के लिए ईश्वर पास रहता है।
• लूका 18:13-14 — करुणा के लिए विनम्र प्रार्थना की शक्ति।