योना 2:6 बाइबल पद की व्याख्या
योना 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं पहाड़ों की जड़ तक पहुँच गया था; मैं सदा के लिये भूमि में बन्द हो गया था; तो भी हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तूने मेरे प्राणों को गड्ढे में से उठाया है।
योना 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 30:3 (HINIRV) »
हे यहोवा, तूने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तूने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है*।

भजन संहिता 16:10 (HINIRV) »
क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को कब्र में सड़ने देगा।

नीतिवचन 8:25 (HINIRV) »
जब पहाड़ और पहाड़ियाँ स्थिर न की गई थीं, तब ही से मैं उत्पन्न हुई। (यूह. 1:1,2, यूह. 17:24, कुलुस्सियों. 1:17)
योना 2:6 का संदर्भ और उसका अर्थ
यूहन्नी-प्रेरित नहीं, बल्कि नहिते योना के उद्धारककथात्मक संकल्प में यह श्लोक एक महत्वपूर्ण मोड़ है। प्रजात के समुद्र के भीतर, मछुआरे योना ने परमेश्वर के साथ एक गहरी आस्था-यात्रा शुरू की: वह घुटनों तक गहरे पानी में, मौत के कगार पर पहुँच गया था, पर परमेश्वर ने उसे जीवित रखा। इस वचन में व्यक्ति अपनी गहरी दहशत के बीच भी ईश्वर के करुणामय उद्धार की आशा को पकड़ लेता है।
यह पठन बताती है कि संकट कितने ही गहरे क्यों न हों, ईश्वर की दया उससे आगे निकलकर उसे उठाती है और उसकी आत्मा को नई दिशा देती है।
मुख्य आशय
2:6 में योना बताता है कि उसने पहाड़ों की जड़ तक पहुँचने का अनुभव किया—यानी मृत्यु के सबक बन चुके भय के भीतर भी परमेश्वर ने उसे सजीव उठाया। यह उद्धार भीतर से, कब्जे से, और आत्मिक पुनःप्राप्ति के प्रकाश से जुड़ा है; गड्ढे में भी भलाई की आशा मिलती है जब परमेश्वर के उद्देश्य से भटकना नहीं रहता।
दो–तीन प्रमुख विषय
संदर्भ से जुड़े बिंदु
1) मन्ना-निगमन की स्थिति में पवित्रता और उद्धार के लिए ईश्वर के आह्वान का अनुभव — समान रूप से दबाव के क्षणों में प्रार्थना और विश्वास की खबर देता है।
2) समुद्री भय से उभरना — पीछे की यात्रा में परमेश्वर की करुणा के कारण जीवित रहना।
3) गहरे पानी से उठकर परमेश्वर की पुष्टि पर चलना — पुनःजीवन और सेवा के लिए प्रेरणा।
प्रायोगिक अनुप्रयोग
व्यक्ति चाहे कितनी भी गलतियाँ क्यों न कर ले, संकट के समय ईश्वर का साक्षात्कार उद्धार की बुनियाद बन सकता है। इस वचन से सीख: दयालु प्रभु के पास लौटना कभी अस्वीकार्य नहीं होता; उनकी कृपा में अपराधी भी नए आरम्भ पा सकता है।
संक्षिप्त सार
योना 2:6 बताता है कि गहराई में डूबे रहने पर भी परमेश्वर का उद्धार संभव है—हृदय की पुकार और आस्था से वह जगाता है, ताकि जीवन का नया पाठ शुरू हो सके।
क्रॉस-रेफरेंसेज
यशायाह 43:2 — कठिन समय में ईश्वर का साथ; भयंकर जल भी पार हो जाए।
भजन 40:2 — गिरकर सिन्धु-जीवन से उठना और प्रभु को गान में बाँधना।
जोश 1:9 — मजबूत बनो; न डरना, क्योंकि प्रभु तुम्हारे साथ है।
नोट: इस पवित्र उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से प्रेरित सार संगठित किया गया है। विशिष्ट वाक्यांश यदि उद्धृत हुए हों तो उसकी छोटी-सी स्वामित्व-नोट नीचे दी गई है.
उद्धरण-नोट: यदि इस लेख में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे किसी वाक्य का संक्षिप्त संकलन लिया गया हो, तो केवल उनके पुराने टिप्पणियों के भीतर उपलब्ध संक्षिप्त शब्द उद्धृत हैं।