योना 3:3 बाइबल पद की व्याख्या
योना 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब योना यहोवा के वचन के* अनुसार नीनवे को गया। नीनवे एक बहुत बड़ा नगर था, वह तीन दिन की यात्रा का था।
योना 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 22:3 (HINIRV) »
अतः अब्राहम सवेरे तड़के उठा और अपने गदहे पर काठी कसकर अपने दो सेवक, और अपने पुत्र इसहाक को संग लिया, और होमबलि के लिये लकड़ी चीर ली; तब निकलकर उस स्थान की ओर चला, जिसकी चर्चा परमेश्वर ने उससे की थी।

मत्ती 21:28 (HINIRV) »
“तुम क्या समझते हो? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे; उसने पहले के पास जाकर कहा, ‘हे पुत्र, आज दाख की बारी में काम कर।’

तुरन्त संदर्भ — स्थिति का चित्र
यहाँ पाठ योना की कहानी के बीच में आता है। पहले अध्याय में योना परमेश्वर के आदेश से भागने की कोशिश करता—समुद्र में और मछली के पेट में—और अब अध्याय 3 की शुरुआत में हम देखते हैं कि परमेश्वर का दूसरा आदेश आता है और योना अब नीनवे के लिए प्रस्थान करता है। वचन में स्पष्ट है: योना ने परमेश्वर के वचन के अनुसार नीनवे की ओर बढ़ा।
क्या पाठ हमें परमेश्वर या विश्वास के बारे में बताता है?
यह पद दो महत्वपूर्ण सत्य व्यक्त करता है। पहला, परमेश्वर की आज्ञा पर अंतिम उत्तरदेहिता मनुष्य भी प्रभु के आदेश से मुकर नहीं सकता; बदले में वह लौटकर आज्ञाकारिता दिखा सकता है। दूसरा, नीनवे जैसे बड़े नगर के प्रति दयालु परमेश्वर की योजना दिखती है—वह न केवल इज़राएल के लिए बोलता है, बल्कि अन्य समृद्ध और शक्तिशाली समुदायों के लिए भी दया का मार्ग रखता है।
मुख्य शब्द और चित्रों की व्याख्या
“यहोवा के वचन के अनुसार”—यह वाक्यांश योना की आज्ञाकारिता की स्रोत-सूचना देता है: उसकी यात्राएँ और भाषण परमेश्वर के निर्देश पर आधारित हैं, न कि उसकी अपनी इच्छा पर।
“नीनवे एक बहुत बड़ा नगर था, वह तीन दिन की यात्रा का था”—यहाँ "तीन दिन" दूरी की माप है जो नगर की विस्तृतता और उसकी जनसंख्या की संख्या का संकेत देती है। तत्कालीन परिवेश में यह बताता है कि नीनवे न केवल भू-क्षेत्र में बड़ा था बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण नगर था। तीन दिन की यात्रा का उल्लेख यह भी सूचित करता है कि संदेश पहुंचाने के लिए व्यापक प्रयत्न चाहिए होंगे।
संबंधित पद और लिंक का संक्षिप्त संकेत
प्रमुख टिप्पणीकारों से संक्षेपिकृत संकेत
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे पुराने टिप्पणीकार योना के आज्ञाकारी लौटने को न केवल ऐतिहासिक घटना समझते हैं बल्कि इसे आत्मिक सुधार और प्रभु की सार्वभौमिक दया के प्रमाण के रूप में देखते हैं। मैथ्यू हेनरी का संक्षिप्त उद्धरण: "He was brought to a submission and obedience which before he refused." (यह उद्धरण अंग्रेज़ी में संक्षेपित है और मूल स्रोत में पाया जा सकता है।)
आधुनिक जीवन के लिए अनुप्रयोग
यह पद आज के पाठक को दो तरह से चुनौती देता है। पहले, परमेश्वर से किसी भी प्रकार के संघर्ष या पलायन के बाद भी लौटने और आज्ञा मानने की क्षमता मौजूद रहती है—ईश्वर के निर्देश पर चलना किसी भी समय संभव है। दूसरे, परमेश्वर का संदेश केवल किसी एक जाति या नगर तक सीमित नहीं; उसकी सहानुभूति और दया सार्वभौमिक है। हमें अपने जीवन में भी कल्याण, न्याय और दया के संदेश को दूर-दूर तक पहुँचाने का साहस दिखाना चाहिए—भले ही लक्ष्य बड़ा और चुनौतीपूर्ण हो।
अंत में, योना की नीनवे यात्रा यह सिखाती है कि ईश्वर की पुकार पर चलना व्यक्तिगत अनुशासन की माँग करता है और उसी में समाज के लिए उद्धार का मार्ग खुलता है।