योना 3:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सम्भव है, परमेश्‍वर दया करे और अपनी इच्छा बदल दे, और उसका भड़का हुआ कोप शान्त हो जाए और हम नाश होने से बच जाएँ।”

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योना 3:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

योना 3:9 परिप्रेक्ष्य में एक स्पष्ट व्याख्या

योना ने निज़ी उत्तरदायित्व और नाबदान नगर के प्रति परमेश्वर की दया की गहराई पर विचार किया। जब नीनवे के लोग डर से थर-thर कांपे, उनके नेताओं ने योना से यह पूछा कि क्या वे सचमुच परमेश्वर से कुछ उम्मीद कर सकते हैं। इस वाक्य में वे अनुमान लगाते हैं कि यदि परमेश्वर दया दिखाएं और उनकी इच्छा बदल दें, तो शान्ति और उद्धार संभव हो सकता है। सही मायने में यह मानवीय हृदय के परिवर्तन और परमेश्वर की दया के बीच एक संवाद है—जहाँ मन बदलना संभव है यदि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप परिवर्तन संभव हो।

मुख्य अर्थ

यह पद इस बात को रेखांकित करता है कि परमेश्वर के दयालु प्रेम के कारण ही संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं—भले ही लोग नाश के कगार पर क्यों न हों। यहाँ लोग मानते हैं कि यदि परमेश्वर अपनी इच्छा बदल दें, तो वह उनके लिए दया दिखा सकता है और उनका भड़का हुआ कोप शांत हो सकता है। यह एक आश्वासन है कि परमेश्वर की दया उनकी परस्पर क्रियाओं से ऊपर है, और यह भी कि मनुष्य का परिवर्तन परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप ही संभव है।

मुख्य विषय

  • परमेश्वर की दया और करुणा: दया केवल न्याय के विपरीत नहीं, बल्कि परिवर्तन की संभाव्यता भी निर्मित करती है।
  • जन के नर-त्याग से बचना: यदि दया बनती है, तो नाश के कारणों को समाप्त किया जा सकता है।
  • दिल की परिवर्तनशीलता: सही दिशा में मन परिवर्तन परमेश्वर के शासन के अनुरूप है।

संदर्भित वाक्यों के विचार (cross-references)

1) यशायाह 55:7 — परमेश्वर की कृपा और ज्ञान के साथ प्रतिउत्तर बनना संभव है; जो बदला चाहता है, उसे परमेश्वर मिलते हैं। मर्म यह है कि ईश्वर की दया सभी विवशताओं को पीछे छोड़ सकती है।

2) रोम 2:4 — परमेश्वर की कृपा ऊँचे उद्देश्य के साथ प्रयोजन रखती है; धीरज के स्थान पर भी मन परिवर्तन संभव है।

3) यह प्रकृति जहाँ-जहाँ बाइबल में परिवर्तन की आवश्यकता बताई गई है, वहाँ परमेश्वर की दया और राज्य की परिवर्तनशीलता एक साथ दिखाई देती है।

praktical reflection

जीवन में संकट या निर्णय के समय यह विचार करें: क्या मैं परमेश्वर की दया के लिए खुला हूँ? क्या मेरा हृदय उसे बदलने के लिए तैयार है, ताकि मेरी दिशा उसके उद्देश्य के अनुसार हो? यदि परमेश्वर ने अपने दिल में परिवर्तन की अर्जी दी है, तो उसे स्वीकार करें और सुधरने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

संक्षिप्त समापन

योना 3:9 हमें यह याद दिलाता है कि दया और परिवर्तन परमेश्वर के दिल में गहराई से एक साथ चलते हैं। यदि परमेश्वर अपनी इच्छा बदल दें, तो शान्ति और उद्धार संभव है—यह एक आश्वस्त भविष्य का संकेत है कि दया न्याय के साथ संतुलित है और मानव हृदय की बदलाव में उसकी भूमिका अवश्य है।

नोट: इस पाठ के लिए मैसीडोनियाई टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त, परंपरागत विचारों से मिलते-जुलते निष्कर्ष एकसूत्री रूप से संकलित हैं—पर मौलिक रूप से यह पाठ एक समग्र, हिंदी पाठक-केन्द्रित व्याख्या है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

योना 3:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने उत्तर दिया, “जब तक बच्चा जीवित रहा तब तक तो मैं यह सोचकर उपवास करता और रोता रहा, कि क्या जाने यहोवा मुझ पर ऐसा अनुग्रह करे कि बच्चा जीवित रहे।

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अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़कर” अपने परमेश्‍वर यहोवा की ओर फिरो; क्योंकि वह अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करनेवाला, करुणानिधान और दुःख देकर पछतानेवाला है।

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और उनके हित अपनी वाचा को स्मरण करके अपनी अपार करुणा के अनुसार तरस खाया,

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