भजन संहिता 106:45 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उनके हित अपनी वाचा को स्मरण करके अपनी अपार करुणा के अनुसार तरस खाया,

भजन संहिता 106:45 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 106:45 पर भाष्य—याद करने पर करुणा का बरसना

यह वचन बताता है कि परमेश्वर का प्रेम और अपनी वाचा के प्रति उनकी निष्ठा कैसे दुखी और गिरते समय भी न टूटती है। भजन 106 में बाइबल कहती है कि परमेश्वर अपने निवासियों के प्रति वचन-संरक्षित है और जब वे उसकी तरफ पलटते हैं, तो वह उनकी स्थिति देखकर दयामय बनता है। यह पद विशेष रूप से उनके हित की स्मृति और करुणा के अनुसार तरस खाने की बात प्रस्तुत करता है—यानी ईश्वर अपने लोगों के नाज़ुक हालात को देखकर अपने प्रतिज्ञात्मक प्रेम के अनुसार कार्य करते हैं।

प्रथम संदर्भ और मूल संदर्भ

यह भजन उस सामूहिक इतिहास का हिस्सा है जिसमें यहूदी जनता अपने पुरखे के चरणों में पुनः-पुनः गिरावट और परमेश्वर की दया के समन्वय को याद करती है। 106वां अध्याय नीचे की पंक्तियों में बारम्बार उथल-पुथल, पाप और उद्धार की पुनरावृत्ति का चित्रण है, फिर अंततः यह आता है कि परमेश्वर अपने दयालु संकल्प के अनुसार लौटने वालों पर करुणा बरसाते हैं। इस पद से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की करुणा पाप के कारण दृश्य कमजोर पड़ने पर भी निरंतर बनी रहती है और वह अपने वचन के अनुसार उद्धार करने में सक्षम है।

मुख्य संदेश

- परमेश्वर अपने निवासियों के हित के बारे में याद रखता है, भले ही वे अस्थिरता में क्यों न हों।

- उसकी करुणा, उसकी आशायों और वचन के प्रति उसकी पवित्र निष्ठा से प्रेरित है—यह उसकी महिमा के अनुरूप है।

- सतह पर दिखने वाले अपराध और निराशाजनक परिस्थितियाँ भी ईश्वर की करुणा के लिए अवसर बन जाती हैं, क्योंकि वह फिर से पलटने पर अत्यंत कृपा प्रदान करता है।

धारणीय थीम्स और सार

- स्मरण और प्रतिक्रिया: परमेश्वर अपने पुराने उद्धारक कर्मों और वादों को स्मरण कर करुणा दिखाते हैं।

- करुणा के अनुग्रह: लोगों की उलटफेर के बावजूद ईश्वर उनकी हत्या-उद्धार की दिशा में कृपा से आगे बढ़ते हैं।

- वाचा की विश्वसनीयता: परमेश्वर के वचनों की पवित्रता और उनकी प्रतिज्ञाओं की पवित्रता इस संदर्भ में उजागर होती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत-रूप में)

1) भजन 89:2—ईश्वर की करूणा और वचन की स्थिरता का मेल; यह दिखाता है कि वाचा की स्थिरता उनके करुणा-प्राप्ति का आधार है।

2) निर्गमन 34:7—ईश्वर को दया दिखाने वाला और सच्चे न्यायपूर्ण द्वार का संरक्षक; यह दर्शाता है कि करुणा और न्याय साथ चलते हैं।

3) भजन 106 के संदर्भ में 2 पंक्ति—अतीत के उद्धार के स्मरण से भविष्य की उम्मीद बढ़ती है; यह पाठकलन यह दिखाता है कि स्मरण और पवित्रता के साथ, परमेश्वर अपने लोगों का उद्धार करते हैं।

व्यावहारिक दैनंदिन मोड़—व्यक्ति-आध्यात्मिक प्रभाव

- जब जीवन कठिन हो, तब याद रखें कि परमेश्वर का हित हमारे लाभ के लिए स्मरण रहता है और वह अपनी करुणा के अनुसार हमारी ओर देख कर प्रीति दिखाते हैं।

- दिल से लौटना और प्रार्थना के बीच, हम उनके वचनों की सत्यता पर टिके रहते हैं और उनकी करुणा से नई ऊर्जा पाते हैं।

संक्षिप्त devotional reflection

मान लीजिए आप भीड़-भाड़ में उलझे हों, परंतु परमेश्वर की करुणा की आवाज आपके पीछे-पीछे है। जब आप लौटकर उनकी वचन के अनुरूप जीवन जिएँगे, तब उनका करुणामय हृदय तुरंत प्रतिक्रिया देगा—यानी तरस, उद्धार, और नया आरम्भ। आपकी स्मृति और उनकी स्मृति साथ मिलकर एक नई राह बना देंगी।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 106:45 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 105:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है, यह वही वचन है जो उसने हजार पीढ़ियों के लिये ठहराया है;

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भजन संहिता 69:16 (HINIRV) »
हे यहोवा, मेरी सुन ले, क्योंकि तेरी करुणा उत्तम है; अपनी दया की बहुतायत के अनुसार मेरी ओर ध्यान दे।

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न्यायियों 2:18 (HINIRV) »
जब-जब यहोवा उनके लिये न्यायी को ठहराता तब-तब वह उस न्यायी के संग रहकर उसके जीवन भर उन्हें शत्रुओं के हाथ से छुड़ाता था; क्योंकि यहोवा उनका कराहना जो अंधेर और उपद्रव करनेवालों के कारण होता था सुनकर दुःखी था*।

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