भजन संहिता 106:40 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का, और उसको अपने निज भाग से घृणा आई;

भजन संहिता 106:40 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 106:40 पर दुष्प्रभाव और परमेश्वर की क्रोध की प्रकृति

मुख्य interpretive point: लोगों के प्रति परमेश्वर का स्वभाव सिर्फ करुणा नहीं, बल्कि उसकी पवित्रता के कारण कभी-कभी कठोर चित्त बन जाता है; जब इक्के-दुक्के लोग अवज्ञा और पाप के रास्ते पर अड़ जाते हैं, तब उसकी क्रोध प्रकट होता है ताकि पाप पर दण्ड और पथ पर पुनर्स्थापना हो सके। भजन 106:40 इसी संतुलन को रेखांकित करता है: यहूदियों के पाप के कारण यहोवा का क्रोध उनकी प्रजा पर भड़का और उसे अपने निज भाग से घृणा आई।

साहित्यिक संदर्भ एवं पृष्ठभूमि

यह पंक्ति भजन 106 में बार-बार नसीहत के साथ पाप-परिणामों का उल्लेख करती है। गाथा-शैली के इस भाग में लेखक अतीत के अनुभवों के स्मरण के माध्यम से यहूदी-जनों के चित्त-परिवर्तन की आवश्यकता बताता है—क्योंकि परमेश्वर के साथ भटकना और उपासना में छल्ले बदलना न तो Him को स्वीकार है और न हमारे जीवन के लिए सुरक्षित।

तीर्थकीय और साक्ष्य-निष्ठ theological संकेत

1) पवित्रता बनाम कृपा: परमेश्वर की पवित्रता जहाँ पाप को अस्वीकारती है, वहीं उसकी कृपा वọद्धार और दया के अवसर भी देता है। यह अंश दर्शाता है कि पाप के कारण क्रोध उठता है, पर यह क्रोध न्याय और उद्धार के क्रम में काम करता है।

2) समुदाय पर प्रभाव: “अपनी निज भाग से घृणा आई” का अर्थ है समुदाय के भीतर टकराव, दया से भरी जैसी आशा घटती है, जब लोग पाप के रास्ते पर चलते जाते हैं। इसका उद्देश्य पाप के परिणामों से सावधान करना है ताकि लोग पश्चाताप करें और परमेश्वर की योजनाओं में लौटें।

पवित्रशास्त्रीय सम्बन्ध

• 출 verses: भजन संहिता 78:38; रोमियों 2:4—जहाँ परमेश्वर की धैर्य और संयम पाप के कारण खतरे में पड़ते हैं, परन्तु उसके दया-चिन्ह अंततः उद्धार की ओर ले जाते हैं।

• क्रोध और दया के संतुलन: यह प्रेरित विपरीतधर्म से राहत नहीं, बल्कि धर्म के लिये आवश्यक है कि हम समझें कि परमेश्वर सिर्फ कठोर नहीं है; वह उन्नत नैतिक डिजाइन के अनुरूप न्याय और उद्धार दोनों प्रदान करता है।

आत्मिक विचार के लिये प्रश्न

  • आप किन हालात में परमेश्वर के क्रोध को अपने जीवन के लिए आवश्यक बतौर स्पष्ट संकेत मानते हैं?
  • क्यों पाप का परिणाम समुदाय पर इस तरह असर डालता है, और हम किस प्रकार से पूरक आशीष को चुने?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 106:40 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की पवित्रता और हमारी अवज्ञा के बीच संतुलन आवश्यक है। उनके क्रोध की स्थिति यह दिखाती है कि पाप सिर्फ दण्ड नहीं है, बल्कि वह सुधार की दिशा में संकेत भी है—एक ऐसा अवसर जिसमें प्रजा लौटे, पश्चाताप करे, और परमेश्वर की दया को पुनः अनुभव करे।

प्लेटफॉर्म-योग्यता पर दृष्टिकोण (मूल उद्धरण का संदर्भ)

यदि आप पारम्परिक टिप्पणीकारों के शब्दों से कुछ संकेत पाते हैं, तो इनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान विचार उपलब्ध होते हैं। इस बिंदु पर शब्द-उद्धरण के रूप में नीचे दिए गए संक्षेपों को बिना पूर्ण वाक्यों के लिया गया है: हेनरी, बार्न्स और क्लार्क ने स्पष्ट किया है कि “क्रोध” और “घृणा” परमेश्वर की पवित्र न्याय और उद्धार-योजना के बीच का संतुलन हैं; ये पंक्तियाँ उसी प्रकृति के अनुरोध को दर्शाती हैं।

Cross-references (संक्षेप में)

• भजन संहिता 78:38 — परमेश्वर की दया और उसकी अग्नि-निरपेक्षता का संतुलन।

• रोमियों 2:4 — दया की धैर्यपूर्वक स्वीकार्यता और उद्धार की दिशा में स्पष्ट संकेत।

• किंग्स 8:39 — यदि वे काम फिर से करें, तो परमेश्वर की कृपा से पश्चाताप का अवसर।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 106:40 समानांतर पद और संबंधित वचन

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न्यायियों 2:14 (HINIRV) »
इसलिए यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उनको लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उनको चारों ओर के शत्रुओं के अधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के सामने ठहर न सके।

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व्यवस्थाविवरण 9:29 (HINIRV) »
ये लोग तेरी प्रजा और निज भाग हैं, जिनको तूने अपने बड़े सामर्थ्य और बलवन्त भुजा के द्वारा निकाल ले आया है।'

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व्यवस्थाविवरण 32:19 (HINIRV) »
“इन बातों को देखकर यहोवा ने उन्हें तुच्छ जाना, क्योंकि उसके बेटे-बेटियों ने उसे रिस दिलाई थी।

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