भजन संहिता 106:37 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वरन् उन्होंने अपने बेटे-बेटियों को पिशाचों के लिये बलिदान किया; (1 कुरि. 10:20)

भजन संहिता 106:37 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या नुकीदार बिंदु

भजन संहिता 106:37 में सूचित किया गया है कि बंदे ने अपने पुत्रों-पर पुत्रियाँ को पिशाचों के लिए बलिदान किया। यह पंक्ति इस ग्रंथ की गहन आपत्तिजनक इतिहास-चिह्नों में से एक है, जो हर समय के लिए यह स्मरण कराती है कि पाप से मोह और धर्म के विरुद्ध विश्वासघात से परमेश्वर की दिशा में लौटना कितना कठिन था। यह शास्त्र व्यक्तिगत पाप के दायरे से बाहर एक सामूहिक, समाज-व्यापी पाप की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसे परमेश्वर के कानून और यहूदी समाज की नैतिक संरचना ने सुनियोजित चुनौती माना।

साहित्यिक संदर्भ

यह पवित्र पाठ, पुराना नियम के मध्य भाग में स्थित, अन्य ऐतिहासिक गवाहों के साथ जोड़ता है कि मिस्र-चक्र से निकलकर भी लोग भय, मूर्तिपूजा और अस्थिर आस्थाओं में फँसते रहे। मंडली भीतर की प्रेरणा का अभाव, राजनैतिक दबाव और धार्मिक पथभ्रष्टता—इन सबका प्रभाव इस प्रकार के बलिदान-प्रयोग पर पड़ा। पवित्र कविता में “पिशाचों के लिये बलिदान” की बात स्पष्ट है कि यह तिरस्कार है जो कानून-मानव-आचार-व्यवस्था के विरुद्ध गया।

आत्त्विक महत्व

यहां परमेश्वर के विरुद्ध दुष्कर्म की गहरी प्रकृति उजागर होती है—किस प्रकार लोग अपने जीवन के केंद्र में कृपा के बजाय भय और दबाव के आधार पर निर्णय लेते हैं। यह याद दिलाता है कि ईश्वर एक न चाहने वाले पाप के लिए भी न्याय-प्रवृत्ति रखते हैं, परन्तु दया का मार्ग भी खुला है जब लोग पश्चाताप करें। यह पाठ पूर्व वाहनों की मानवीय कमजोरी और परमेश्वर की धर्म-न्याय दोनों की स्थितियों को एक साथ सामने रखता है।

ग्रहणीय क्रॉस-रेफरेंसेस

  • 1 कुरिन्थियों 10:20 — पिशाच-बलिदान के दायरे में गैर-खाद्य धार्मिक गतिविधियों की वास्तविकता का उल्लेख; यह बताता है कि नया Covenantal धर्म कैसे पुरानी आस्थाओं से दूरी बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  • यशः 57:5 — यहूदियों की मूर्तिपूजा और अवमानना के कारण परमेश्वर की घृणा का संकेत; यह संदर्भ समझाने में सहायक है कि क्यों पथभ्रष्टता सामाजिक-राष्ट्रीय स्तर पर गम्भीर हो सकती है।
  • गलातियों 5:19-20 — फल-फलों के रूप में आत्मा के विरुद्ध काम, जो समाज-निर्माण पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं; प्रलोभन और धर्म-त्याग के नतीजे स्पष्ट करते हैं।

इन तीन क्रॉस-रेफरेंसेस से ज्ञात होता है कि पुरानी विधान की पाप-प्रवृत्ति और नए विधान की आध्यात्मिकसम्बन्धी चेतना दोनों एक दूसरे के सामने कैसे आते हैं।

प्रश्न-चर्चा

  • हम अपने समय में किन “सामूहिक-धार्मिक दबावों” से ऊपर उठकर सत्य के मार्ग पर चल पाते हैं?
  • कौन से व्यवहार आज भी “पिशाचों के लिए बलिदान” जैसी निंदनीय मान्यताओं को जिंदा कर देते हैं, और कैसे हम यीशु के रोशन मार्ग से उन्हें पीछे छोड़ते हैं?
  • क्यों पाप का इतिहास प्रेरणा बनकर भी प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन-निर्देशों को परमेश्वर के कानून के अनुरूप ढालें?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यही आयतन हमें याद दिलाता है कि समाज के भीतर फैली पाप-आंदोलनों के विरुद्ध सचेत और दृढ़ रहने की आवश्यकता है। परमेश्वर की श्रद्धा और नीति-नियमों को मानना ही व्यक्ति और समुदाय की आस्था की वास्तविक परीक्षा है। पुराने लेखन में जो भय और अंधविश्वास दिखते हैं, वे नवीन वायदे में भी चेतावनी की तरह बने रहते हैं; तथापि ईश्वरीय दया पथ को सुदृढ़ करती है जब लोग पश्चाताप कर सही रास्ते पर लौटते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (उद्धरण-संदर्भ)

यदि उपलब्ध हो तो नीचे दिए गए प्राचीन टिप्पणीकारों के चयनित विचारों को ध्यान में रखें:

Matthew Henry (टिप्पणी): “...यह पाठ इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार मानव हृदय पाप की ओर मोड़ सकता है, पर परमेश्वर न तो पथभ्रष्टता को स्थायी मानते हैं, न उसे रोकते हैं।” (सारांश)

Albert Barnes (टिप्पणी): “मूर्तिपूजा के विरुद्ध चेतावनी का यह भाग न केवल सामूहिक पाप का संकेत है, बल्कि उसका परिणाम भी दिखाता है—न्याय और चेष्टाओं में विकृति।”

Adam Clarke (टिप्पणी): “पिशाचों के लिये बलिदान—यह स्मरण कराता है कि बुराई किस हद तक सामाजिक स्तर पर प्रवेश कर सकती है और नैतिक ढांचे को बर्बाद कर देती है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 106:37 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 राजाओं 16:3 (HINIRV) »
परन्तु वह इस्राएल के राजाओं की सी चाल चला, वरन् उन जातियों के घिनौने कामों के अनुसार, जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से देश से निकाल दिया था, उसने अपने बेटे को भी आग में होम कर दिया*।

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2 राजाओं 17:17 (HINIRV) »
उन्होंने अपने बेटे-बेटियों को आग में होम करके चढ़ाया; और भावी कहनेवालों से पूछने, और टोना करने लगे; और जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था जिससे वह क्रोधित भी होता है, उसके करने को अपनी इच्छा से बिक गए।

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1 कुरिन्थियों 10:20 (HINIRV) »
नहीं, बस यह, कि अन्यजाति जो बलिदान करते हैं, वे परमेश्‍वर के लिये नहीं, परन्तु दुष्टात्माओं के लिये बलिदान* करते हैं और मैं नहीं चाहता, कि तुम दुष्टात्माओं के सहभागी हो। (व्य. 32:17)

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