भजन संहिता 106:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मिस्र में हमारे पुरखाओं ने तेरे आश्चर्यकर्मों पर मन नहीं लगाया, न तेरी अपार करुणा को स्मरण रखा; उन्होंने समुद्र के किनारे, अर्थात् लाल समुद्र के किनारे पर बलवा किया।

भजन संहिता 106:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 106:7 का संदर्भ और उद्देश्य

यह पाठ मिस्र की दासत से Israel के उद्धार के इतिहास का स्मरण कराता है। संदर्भ में देशभक्ति नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रेरणा और मानव हृदय की निष्ठा की कमी उजागर होती है। पवित्र दस्‍तावेज़ बताता है कि पुरखे ईश्वर के आश्चर्यकर्मों को बार-बार स्मरण नहीं रख पाए और उनके मानस ने निष्ठा से नहीं जोड़ा; परिणामस्वरूप उन्होंने लाल समुद्र के किनारे पर भागती पीड़ा के बीच भी शिकायत की।

मुख्य विचार

इस पद का केंद्रबिंदु है: इतिहास के अद्भुत कार्यों को याद रखना और उन अनुभवों से आध्यात्मिक स्थिति बना लेना। यदि स्मरण तक सीमित रह जाए, परंपरागत आचार-विचार में शांति नहीं मिलती; ईश्वर की करुणा का अनुभव तब गहराता है जब मन उसकी महिमा की निरंतरता को स्वीकार कर ले।

दो प्रमुख विषय

  • उद्धार के करुणामय चिह्न: मिस्र से मुक्ती के चिह्न से प्रेरणा मिलने का अभाव, फिर भी परमेश्वर की कृपा निरंतर काम करती है।
  • फितरत में अस्थिरता बनाम विश्वास: मानव स्वभाव अक्सर चमत्कार देख कर भी विश्वास से भागता है; यह पूजा-उद्धार के लिए एक चेतावनी है कि स्मरण और आस्था साथ-साथ चलते हैं।

संबद्ध पाठ—संक्षिप्त सन्देश

• भजन 105–106 में इतिहास के चमत्कार दोहराते हैं और स्मरणीय घटनाओं से शिक्षा लेते हैं।

• निर्गमन 14–15 अध्याय, लाल समुद्र के पार होने के चमत्कार का वर्णन करते हैं, जो विश्वास और दोहराव के लिए मापदंड बनते हैं।

• इब्रानी 3–4 अध्याय, परमेश्वर کے विराम और विश्वास की परीक्षा का परिप्रेक्ष्य बताते हैं।

सूक्षम निष्कर्ष—व्यावहारिक दृष्टिकोण

1) स्मरण का अभ्यास: प्रतिदिन सुखद और प्रतिकूल घटनाओं को भी ईश्वर के स्वरूप और करुणा से जोड़ना।

2) आस्थागत गतिविधि: चमत्कार के बजाय व्यक्तिगत भरोसे को स्थिर रखना—यही आस्था की आवाज है।

3) सामुदायिक स्मृति: दोहराते इतिहास से सीख लेकर समुदाय में परमेश्वर की महिमा को उजागर करना।

क्रॉस-रेफरेंस और उनसे जुड़ी स्पष्टता

- निर्गमन 14:21–22: लाल समुद्र पार होने का दृश्य—आशीर्वाद और पथप्रदर्शन की स्मृति।

- भजन 105:5: “उनके चमत्कारों को याद करो”—इतिहास को याद रखना क्यों आवश्यक है।

- इब्रानी 4:11: विश्राम के लिए विश्वास की आवश्यकता, स्मरण के साथ संयम।

शुद्ध टिप्पणी (संक्षिप्त संकलन)

यह वाक्य बताता है कि ऐतिहासिक उद्धार के चमत्कारों की स्मृति के बावजूद human tendency to distrust और शिकायत है; पर सही मार्ग वही है जिसमें स्मरण और विश्वास साथ चलते हैं। प्रसिद्ध दार्शनिक टिप्पणीकारों से प्राप्त संदेश यह संकेत देते हैं कि इतिहास की याद से निष्ठा उन्नत होती है, न कि केवल विवरण याद रखने से।

संक्षेप: परमेश्वर की करुणा और चमत्कारी उद्धार की स्मृति को जीवित रखना, ताकि विश्वास आधारित जीवन आगे बढ़ सके और समुदाय में उसकी महिमा स्पष्ट हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 106:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और वे मूसा से कहने लगे, “क्या मिस्र में कब्रें न थीं जो तू हमको वहाँ से मरने के लिये जंगल में ले आया है? तूने हम से यह क्या किया कि हमको मिस्र से निकाल लाया?

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उन्होंने न तो उसका भुजबल स्मरण किया, न वह दिन जब उसने उनको द्रोही के वश से छुड़ाया था;

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और नाश होनेवालों के लिये अधर्म के सब प्रकार के धोखे के साथ होगा; क्योंकि उन्होंने सत्य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया जिससे उनका उद्धार होता।

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