भजन संहिता 106:47 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे हमारे परमेश्‍वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय में बड़ाई करें।

भजन संहिता 106:47 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 106:47 का अर्थ

यह वरदानात्मक प्रार्थना कहती है कि परमेश्वर हमारा उद्धारकर्ता हो और वह हमें विश्व के हर भाग से एकत्र करे, ताकि हम उसके नाम का धन्यवाद करें और उसकी महिमा के गान में उसका सम्मान बढ़ाएं। यह पद रक्षा, नवसंहार और दया के चक्र में हमारा विश्वास लौटाने की एक अभिलाषा है: उद्धारक की कृपा से हम सब अलग-अलग जातियों में बंटे हों तो भी एक बार फिर उसके पवित्र नाम के सामने एक साथ आएं।

प्रसंगपरक पृष्ठभूमि

यह भजन 105–106 की लयबद्ध दैवीय स्मृति-गीत-परंपरा का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्र-चेतना की जगह दयालु उद्धार और ईश्वर के अद्वितीय आशीर्वाद का सम्मान केंद्र में है। गिनती में वर्णन है कि ईश्वर ने अपने लोगों को मिस्र से निकालकर कष्टों के बीच भी उनकी रक्षा की, और अंत में सभी जातियों के लिए एक उद्धार की संभावना खोली। यहां “निराकार इकट्ठा करना” उन लोगों के लिए आशा है जो विदेशी भूमियों में अपने धर्म और संस्कृति के बारे में संघर्ष कर रहे थे।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आवाहन का लक्ष्य: यह प्रार्थना केवल व्यक्तिगत उद्धार की नहीं, वरन् संपूर्ण समुदाय के लिए आह्वान है—ताकि सभी लोग एक होकर परमेश्वर की स्तुति करें।
  • पवित्र नाम की महिमा: “तेरे विषय में बड़ाई करें” का अर्थ है ईश्वर के नाम के सम्मानित होने से उसका सामर्थ्य और करुणा अधिक प्रकट होगी।
  • जातियों में से इकट्ठा करना: यह उद्धरण उस समय की उम्मीद को इंगित करता है जब प्रत्यक्ष समूह के बाहर के लोग भी ईश्वर के आशीर्वाद से जुड़ते हैं, और परमेश्वर की plan व्यवस्था विश्व स्तर पर फैलती है।

छोटे थीमैटिक बिंदु

  1. उद्धार की एकता — व्यक्तिगत आशीष से सामूहिक विजय तक का मार्ग
  2. ईश्वर के नाम की महिमा — जीवन के हर क्षेत्र में उसकी स्तुति
  3. जातीय सीमा से ऊपर की संझा— विश्वस्तरीय उद्धार की आशा

अन्य सम्बन्धित पद

1) Psalm 67:4—जातियों के लिए आशीर्वाद और जयकार का उद्देश्य स्पष्ट करता है कि सभी राष्ट्र परमेश्वर की स्तुति करें; इससे राष्ट्रों के बीच उद्धार का फैलना संकेतित है।

2) Acts 15:14-18 — धीरे-धीरे पुरानी भिन्नताओं के बावजूद चूँकि ईश्वर ने जातियों को भी अपने घर में जगह दी, यह एक नई प्रार्थना का भाग बनती है।

3) Isaiah 52:10 — परमेश्वर के उद्धार का नमूना और सभी देशों के लिए उसकी महिमा का उद्घोष।

कथनात्मक अनुपात

पद हमें बताता है कि उद्धार केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक जीवन के लिए है। यदि हम अपने सामने से किसी भी बाधा को हटाकर ईश्वर के पवित्र नाम के लिए एकजुट हों, तो उद्धार और आशीर्वाद का दायरा फैलता है। यह हाम्रो दायित्व है कि हम अपने जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वर की महिमा दिखाएं—जीवन के नाटकीय और नॉन-नाटक दोनों पहलुओं में।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

कथा-उद्धरण (संदर्भनिष्ठ)

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के संक्षेपक उद्धरण देखना चाहते हों, तो वे अक्सर इस प्रकार के भावों को उद्धृत करते हैं: उद्धार केवल व्यक्तिगत नहीं, यह सामूहिक आराधना का नया आयाम है; जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर ईश्वर की स्तुति। (नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ पूर्ण उद्धरण नहीं हैं; केवल संक्षेप में विचार दिए जाते हैं।)

Cross-reference notes: नीचे दिये गए संदर्भों से इस भजन के अनुरूप विचार मिलते हैं—

— सतह पर: भजन 67:4; प्रेरितियों में यह सिद्धांत कि सभी राष्ट्र परमेश्वर की आराधना में एक साथ आ सकते हैं।

— प्रेरणा का विस्तार: इसाई समुदाय के लिए Acts 15:14-18, जहाँ जातियों के शामिल होने की योजना स्पष्ट होती है।

निष्कर्षतः, यह भजन 106:47 हमें बताता है कि उद्धार और आराधना का सार एकता में है—ईश्वर के नाम पर धन्यवाद और महिमा का जीवन, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

याद रखें: “हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले”—यह प्रार्थना हमसब के लिए आज भी एक प्रेरणा है, कि हम अपने समुदाय को एक साथ संघरित करें और परमेश्वर की महिमा के लिए एक स्वर में गाएं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 106:47 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 इतिहास 16:35 (HINIRV) »
और यह कहो, “हे हमारे उद्धार करनेवाले परमेश्‍वर हमारा उद्धार कर, और हमको इकट्ठा करके अन्यजातियों से छुड़ा, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय बड़ाई करें। (भज. 106:47)

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भजन संहिता 14:7 (HINIRV) »
भला हो कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से* प्रगट होता! जब यहोवा अपनी प्रजा को दासत्व से लौटा ले आएगा, तब याकूब मगन और इस्राएल आनन्दित होगा। (भज. 53:6, लूका 1:69)

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भजन संहिता 107:1 (HINIRV) »
यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!

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