1 इतिहास 16:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यह कहो, “हे हमारे उद्धार करनेवाले परमेश्‍वर हमारा उद्धार कर, और हमको इकट्ठा करके अन्यजातियों से छुड़ा, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय बड़ाई करें। (भज. 106:47)

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1 इतिहास 16:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 16:35 का अर्थ और संदर्भ

इस पद का सरल अर्थ है: परमेश्वर से उद्धार और एकत्र करने की विनती करना, ताकि हम उसके नाम का धन्यवाद करें और उसकी महिमा का गान करें। यह पंक्ति ईश्वर के उद्धार से प्रेरित सामूहिक प्रोत्साहन और उपासना का स्वर है।

पद का पृष्ठभूमि

यह इतिहास की पुस्तक में रहने वाले यहूदी समुदाय के स्रोत-विकास का हिस्सा है, जहाँ उनकी आराधना और सामुदायिक उद्धार की सफलता परमेश्वर के कृपापूर्ण हस्तक्षेप पर निर्भर है। भजन-ग्रंथ से निकट लगी यह अभिव्यक्ति एक चिह्न है कि प्रभु के सन्तान अपने उद्धार के स्मृति-पर्वों में मिलकर धन्यवाद और स्तुति करती है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

  • प्रार्थना का स्वरूप: यह पाठ एक आत्म-समर्पण और निष्ठा से भरी प्रार्थना है जिसमें देश-जाति से परे एक सार्वभौमिक उद्धार की आकांक्षा है।
  • युद्ध नहीं, आराधना: यहाँ विजय केवल शारीरिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक-उद्धार की घोषणा है—परमेश्वर के नाम का उच्चारण और उसकी स्तुति।
  • गायन और सम्मान: “तेरे विषय बड़ाई करें” से स्पष्ट होता है कि धर्मसमुदाय अपनी स्मृतियों को ध्वनि और संगीत से जोड़कर परमेश्वर की महिमा बढ़ाते हैं।

शीर्षक-धारणा (थीमैटिक बिंदु)

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत मात्र, पूर्ण पाठ नहीं)

भजनों 106:47 में उद्धार के लिए धन्यवाद और स्तुति का एक समरूप भाव मिलता है; भजनों में भी मनुष्य के उद्धारदाता के लिए कृतज्ञता और वरदहस्त की गूंज रहती है।

निर्दिष्ट उद्धरण के संदर्भ से यह स्पष्ट होता है कि स्मृतियाँ और सार्वजनिक आचार-प्रथाएं परमेश्वर के नाम पर केंद्रित होती हैं। साथ ही, बाइबल में समान भावनाओं के अन्य उदाहरणों में भी एकत्र होकर उपासना करना एक सामान्य व्यवहार रहा है।

रिश्तेदार अंश (संक्षिप्त संबंध)

1) एकत्व की मांग और उद्धार की आह्वान: सामूहिक प्रार्थना में देश-परिवार की एकता प्रकट होती है।

2) प्रभु के नाम की महिमा: उसकी पवित्रता और सच्चाई के कारण धन्यवाद-गायन प्रेरित होता है।

3) भक्ति में स्मरणीय उदाहरण: पूर्व आस्था-पथों के स्मरण से भविष्य की स्तुति दृढ़ होती है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब हमारे जीवन में संकट दूर होते हैं, तो इसे केवल जीत के रूप में नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्धार के अवसर के रूप में मानें। एक संगठित प्रार्थना-समुदाय के बीच, धन्यवाद की ध्वनि उठाकर परमेश्वर के नाम की महिमा करें; इससे आत्मिक एकता और विश्वास बढ़ता है।

एतिहासिक-टीका से संबद्ध संक्षेप विचार

यह संदेश, समय के आगे भी, एक प्रेरणादायक आदर्श प्रस्तुत करता है—कि उद्धारकर्ता के प्रति आभार और उसकी स्तुति सामूहिक आराधना का मूल तत्व हों।

नोट: नीचे स्पष्ट उद्धरण-पंक्तियाँ नहीं दी जा रही हैं। यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो मैं उपयुक्त हिस्सों को सीधे उद्धृत कर दूं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 16:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 106:47 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 106:47 (HINIRV) »
हे हमारे परमेश्‍वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय में बड़ाई करें।

1 पतरस 2:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्‍वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)

भजन संहिता 14:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 14:7 (HINIRV) »
भला हो कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से* प्रगट होता! जब यहोवा अपनी प्रजा को दासत्व से लौटा ले आएगा, तब याकूब मगन और इस्राएल आनन्दित होगा। (भज. 53:6, लूका 1:69)

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