1 इतिहास 16:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे देश-देश के कुलों, यहोवा का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ्य को मानो।

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1 इतिहास 16:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 16:28 का अभिधान - देश-देश के कुलों का यहोवा का गुणानुवाद

इस पवित्र पद में दाऊद ने यहूदा-येटकों को तथा अन्य देशों के समूहों को यहोवा के महिमामय गुणों की स्मृति दिलाने के लिए आमंत्रित किया। संदर्भ में, हालाँकि यह समय वशिष्ठ के पर्व और इस्राइल के आराधना-स्थल की स्थापना के साथ जुड़ा है, पर मूल संदेश सार्वभौमिक है: परमेश्वर की महिमा, सामर्थ्य और कल्याणी पवित्रता सभी राष्ट्रों को प्रेरित करती है कि वे उसका गुणानुवाद करें।

मुख्य अर्थ

यहोवा की महानता, शक्ति और महिमा को मानना और उसका गुणगान करना हर देश-देश के कुलों का कर्तव्य है। यहोवा केवल एक क्षेत्रीय देवता नहीं है, बल्कि सारी सृष्टि का राजा है; इसलिए हर जाति, हर जनसमूह को उसकी महिमा के बारे में जागरूक होना चाहिए और उसका गुणगान करना चाहिए।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की महिमा स्वीकारना: सब देश स्वीकार करें कि यहोवा कौन है और उसकी महिमा अपरिमार्ज है।
  • यौनिकता-शक्ति बनाम आचरण: परमेश्वर के सामर्थ्य को मानना केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू में उसकी महिमा को प्रदर्शित करना है।
  • आह्वान के सार्वभौमिकत्व: यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का गुण-गान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहा; सभी राष्ट्रों के लिए है।

संदर्भ-आकाश से एक दृष्टि

- 2 इतिहास 6–7: दाऊद का परमेश्वर के नाम पर आभार और राज्य के धार्मिक सुधार की दिशा; इससे रचना बताती है कि परमेश्वर की महिमा किस प्रकार सामुदायिक जीवन की केंद्रस्थली बनती है।

- भजन 96:1–3: सम्पूर्ण राष्ट्रों को यहोवा के गुणगान के लिए बुलावा देता है; भक्ति और प्रचार का संयोजन दर्शाता है।

- रोम 15:12: यहूदी-जन औरजातीय समूहों के बीच एकता और प्रेरणा कि यीशु में सभी जातियाँ प्रभु के गुण-गान में शामिल हों।

व्यावहारिक चिंतन

हर समुदाय अपनाए: अपने परिवेश में यहोवा की महिमा कैसे प्रस्तुत हो सकती है? बच्चे, युवा और बुजुर्ग मिलकर समवेत पूजा-गायन करें; सामाजिक जीवन में सत्य-निष्ठा, करुणा और न्याय की प्रतिष्ठा बढ़ाएं। यहोवामुखी आस्था से प्रेरित सामाजिक सेवा और नैतिक मुद्दों पर स्पष्टता अपनाएं।

संक्षिप्त समेकन

यह verse यह बताता है कि परमेश्वर की महिमा, सामर्थ्य और पवित्रता को हर देश-देश के कुलों द्वारा मानना चाहिए और उसका गुणानुवाद करना चाहिए। यह एक सार्वभौमिक आह्वान है कि सभी जातियों के लोग एक ही देवता की महानता को स्वीकार करें और उसकी महिमा के अनुरूप जीवन बिताएं।

संक्षिप्त उद्धरण (प्रमुख टिप्पणीकारों से)

यदि आवश्यक हो, तो 18वीं-शताब्दी के प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचार संक्षेप में समाहित होते हैं:

  • Matthew Henry: “...the people are hereby called to ascribe to the Lord the glory due unto his name.”
  • Albert Barnes: “God’s greatness and power are not confined to a local sanctuary; hence all nations are urged to recognize and proclaim his majesty.”
  • Adam Clarke: “The command is universal; let all tribes and tongues acknowledge the Lord’s goodness and glorious perfections.”

नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल सार्थक संकेत के रूप में उद्धृत हैं और पाठ के पूर्ण पाठ नहीं हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 16:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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