Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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धार्मिक-पाठ का मुख्य बिंदु
1 इतिहास 16:24 का यह पद हमें परमेश्वर के महान नाम और कूटनीतिक कार्यों की व्यापक महिमा के बारे में बताता है: से सब nations के बीच उसकी महिमा का वर्णन हो और देशों के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन किया जाए। यह संदेश ईश्वर के सार्वभौमिक राज्य और उसकी करुणा-प्रभुता की सार्वभौमिक पहचान पर केंद्रित है—कि यह महिमा केवल एक जाति या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी विश्व के लिए खुली है।
पाठ का साहित्यिक संदर्भ
ऐतिहासिक पुस्तकों में यह गीत-रचना परमेश्वर के समस्त कृत्यों, चमत्कारों और उद्धार-कार्य की महिमा का उद्घोष करता है। 1 इतिहास में भी यह भाग राजा दाऊद के समय के स्मरणीय आह्वान का हिस्सा है, जब ईश्वर के चमत्कार और राज्य-कार्य समूचे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाते हैं। यहाँ “अन्यजातियों में उसकी महिमा” का उल्लेख विश्व-व्यापार के पटल पर यश्वर-प्रतिष्ठा को दिखाता है—यहूदियों के बाहर के लोग भी अब ईश्वर के दायरे में आते हैं और उसकी महानता स्वीकारते हैं।
सार्वभौम theological significance
यह उद्धृत पंक्ति theology में दो प्रमुख धारणाओं को पुष्ट करती है: (1) ईश्वर का राज्य विश्व-सम्पूर्ण है; उसकी महिमा सभी देशों में उभर कर सामने आती है। (2) चमत्कार—“आश्चर्यकर्म”—ताकि लोग उसकी महानता को स्मरण करें, और उनके सामने उसकी शक्ति, करुणा और न्याय-स्वरूपता सुनिश्चित हो। न केवल इस्राइल, बल्कि हर जाति उस आत्म-प्रकाश के मार्ग को देखे और अपने-अपने संदर्भ में उसकी महिमा का स्वीकृति-गान करें।
पवित्र शास्त्र के साथ संबंध (cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि विश्व-स्तर पर ईश्वर की महिमा और चमत्कार का प्रचार एक नयी विश्व-दृष्टि बनाता है, जिसमें हर जाति तथा देश सहभागी होते हैं।
जीवन-विचार (reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद-प्रकाश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का राज्य वैश्विक है। उसकी महिमा और चमत्कार सभी देशों में प्रकट होते हैं, और मानव जाति के हर भाग के लिए उद्धार-प्रकाश का संदेश वही रहता है। इस वैश्विक दृष्टिकोण को हम अपनी प्रार्थना, आचरण और समाज-निर्माण में देख सकते हैं—एक ऐसा समुदाय, जो सब जातियों के बीच उसकी महिमा का गान करता है।
पूर्व-आलोचनात्मक टिप्पणी (authors’ quotes)
महत्वपूर्ण दार्शनिक अवलोकन: यह commentary Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के अनुरूप है। अगर आप उनके निकटतम शब्द-स्रोत चाहते हैं, तो उनके स्तर-वार observations नीचे सरल शब्दों में संहित किये गये हैं; विशेष उद्धरण नीचे उपलब्ध हैं:
मैथ्यू Henry से संक्षेप प्रेरणा: “The Lord’s praise is due among all nations.”
अलबर्ट Barnes से संक्षेप प्रेरणा: “God’s works extend beyond Israel; they are signs to all peoples.”
एडम क्लार्क से संक्षेप प्रेरणा: “The wonders of God invite nations to fear and trust Him.”