Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 1:10 का संदर्भ: निर्दोष नर का होमबलि
स्थिति का संदर्भ:LEGE 1 के अग्नि-बलि के लिए नया सरलीकरण—यदि कोई भेड़ या बकरा होमबलि चढ़ाए, तो उसे निर्दोष नर ही चढ़ाना चाहिए। यह नियम व्यक्त करता है कि परमेश्वर बलिपURATION के नियमों के भीतर भी पूर्णता और पवित्रता की मांग करते हैं।
यह पाठ क्या दिखाता है: ईश्वर और विश्वास के बारे में
इस आयत में स्पष्ट सिद्ध होता है कि होमबलि के कर्तव्य में बाहरी विधि के साथ आंतरिक पवित्रता का संयोजन अनिवार्य है। निर्दोष नर की बलि देने से यह दर्शाया गया है कि अपराध मुक्त, अनुपम पवित्रता और नैतिकता बलि की प्रेरणा है, न कि केवल औपचारिकता। यह परमेश्वर के समक्ष सच्चे आचार-व्यवहार का प्रतीक है—किंचित भी अंगीकारित दोष को उसके सम्मुख स्वायत्तता से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
डायरेक्टेड आस्था का संकेत यही है कि व्यक्ति अपनी सीमा और पाप के साथ परमेश्वर के सामने आता है; बलि एक प्रतीक है कि उद्धार और शुद्धता के लिए एक निर्दोष की आवश्यकता है, जो अंततः मसीही आशय से पूर्णता पाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्ट करनेवाली बात
संबंधित आयतें (Cross-references) और छोटे व्याख्या
इन दावों से दिखता है कि पुरानी व्यवस्था में निर्दोषता की मांग एक आस्थाग्रह का हिस्सा है, जो नए करार के मसीही पूर्णता के साथ मेल खाती है।
आज के लिए अनुप्रयोग
एक संक्षिप्त समेकन
लैव्यव्यवस्था 1:10 में निर्दोष नर की होमबलि यह स्पष्ट करती है कि ईश्वर केवल बाहरी धर्म से संतुष्ट नहीं होते, बल्कि वह आंतरिक पवित्रता और पूर्ण समर्पण की मांग करते हैं। यह पुराने नियम की मांगों को मसीह के द्वारा पूर्ण होने की दिशा में संकेत देता है—जब निर्दोषता की अंतिम पूर्णता में उद्धार आता है।
ध्यान देने योग्य उद्धरण (पूर्व-ईसाई टिप्पणीकारों से):
मैथ्यू हेनरी, अंस्तर Barnes, ऐडम क्लार्क के समान सार्वजनिक-उद्धृत विचारों के अनुसार, धर्म के कर्म और सत्य के बीच संतुलन आवश्यक है; बाहरी पूजा तभी स्वीकार्य है जब यह भी आंतरिक परिवर्तन का संकेत दे। यदि आप चाहें, मैं उनके संक्षिप्त सार को हिंदी में संकलित करके भी दे सकता हूँ।