Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 1:4 — आरम्भिक सेटिंग और अभिप्राय
इस वचन में प्रायश्चित्त की विधि का एक हिस्सा प्रस्तुत है: व्यक्ति अब अपने सामान्य पनरुद्ध दोष से मुक्त होने के लिए प्रायश्चित्त के प्रतीक के रूप में होमबलि पशु के सिर पर हाथ रखता है। यह कृत्य अपराध को पहचानना, दायित्व स्वीकार करना और परमेश्वर के सामने पश्चात्ताप व्यक्त करना है। यह एक प्रायश्चित्त-केन्द्रित प्रक्रिया है जिसमें बलि से नहीं, बल्कि विश्वास और श्रद्धा से परमेश्वर की कृपा की ओर दृष्टि बनती है।
क्या को दर्शाता है ईश्वर या विश्वास के बारे में
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के सामने प्रायश्चित्त का मार्ग विश्वास और समर्पण से जाता है। हाथ रखना एक स्वीकार्यता-संकेतन है: मैं अपने दोषों का भार स्वेच्छा से स्वीकार कर रहा हूँ। बलि उस दोषाधिकार के परिणाम को संकेत करती है, ताकि अपराध की वास्तविकता और उसकी हीनता प्रकट हो सके। साथ ही यह स्पष्ट करता है कि धार्मिक अदावत के बजाय व्यक्तिगत जवाबदेही और आस्थापूर्ण क्रिया ही व्यवस्था के अनुयायों के लिए वास्तविक सुरक्षा बनाती है।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित क्रॉस-रेफरेंसेज
• रोम 12:1-2 की तरह भक्तिकाल में भी जीवन को बलिदान के रूप में प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिलती है—परमेश्वर की इच्छा है कि हमारा सम्पूर्ण जीवन त्याग और आस्थासंही हो।
• हैबर 9:22 में स्पष्ट है कि बिना रक्त के प्रायश्चित्त संभव नहीं, और यह व्यवस्था यीशु के लिए भी एक प्रकार है जो अंततः पूर्ण की गई शास्त्री विधि की कसौटी दिखती है।
• 1 योहन्ना 1:9— यदि हम अपने दोष स्वीकार करें, तो वह विश्वासयोग्य और धर्मी है, हमारा दोष क्षमा करेगा और हमें शुद्ध करेगा।
इन क्रॉस-रेफरेंसेज से स्पष्ट होता है कि प्रायश्चित्त एक व्यक्तिगत विश्वास-व्यवहार है जो पाप की वास्तविकता को स्वीकारना, ईश्वर की पवित्रता के सामने नम्रता से आना और उसके निकट रहने की इच्छा को मजबूत करना है।
आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग
लेखक-समेकन
यह पाठ एक साथ दर्शाता है कि पुरानी व्यवस्था में भी प्रायश्चित्त के प्रतीक परमेश्वर के साथ सही बंधन के लिए आवश्यक थे। सार्वजनिक कर्म और निजी श्रद्धा का संगम यहाँ प्रस्तुत है, जो बाद के समय में यीशु मसीह के बलिदान के प्रकाश में और स्पष्ट हुआ।
उद्धरण संकेत: इस पंक्ति के पाठ-आधार पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-उद्धरण उपलब्ध हो सकने पर उनके संक्षिप्त विचार एकीकृत रूप से प्रस्तुत हैं।