Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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हिंदी टिप्पणी: लैव्यव्यवस्था 16:13
पाठ-संदेश: इसVerse में यहोवा के सम्मुख धूप डालने की बात है, ताकि धुएँ के माध्यम से प्रायश्चित का ढका भाग पवित्रता के ढांचे पर छा जाए और इसके बिना दया-साक्षी नहीं मिल सके। इसे यह दिखाने के लिए कहा गया है कि परमेश्वर के सामने पवित्र आहुति और प्रायश्चित करने की क्रिया कितनी गंभीर और आवश्यक है।
पाठ के संदर्भ में verse का स्थान
यह प्रायश्वेर का पर्व-सम्बंधित भाग है, जहां याजक को एक विशेष दिन के ṭreatment के लिए निर्दिष्ट किया गया है। धूप (अग्नि से धुँआ) का प्रयोग करके यह दर्शाया गया है कि प्रायश्चर्य का ढंका हुआ भाग केवल यहोवा के सामने खुलकर आ सकता है, अन्यथा वह व्यक्ति मर सकता है। यह किसी भी शाकाहारी या राजनैतिक समारोह से नहीं बल्कि परमेश्वर की पवित्रता और व्यवस्था के अनुरूप है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse का मुख्य संदेश यह है कि कृपाप्राप्ति और पवित्रता की अनुभूति केवल तब संभव है जब प्रायश्चित मार्ग स्पष्ट और स्वीकृत हो। यह दर्शाता है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी holiness के सामने स्वतन्त्र अनुकरण संभव नहीं; उनकी अनुमति और पवित्र आदर्श के अनुरूप आचरण अनिवार्य है। धूप का धुआँ दिखाता है कि प्रायश्चित का संकेत और उसकी सुरक्षा एक पवित्र प्रक्रिया से जुड़ी है, जिसे मानना ढाल बनकर सामने आता है।
अन्य बाइबिल पाठों के साथ भूमिका-तुलना
व्यावहारिकapplication
हम आज भी परमेश्वर के सामने सीधे और निर्भीक रहने से पहले, अपने आचरण की पवित्रता के जाँच-परख आवश्यक मानते हैं। प्रायश्चित का आधुनिक अर्थ भी यही है कि हम अपनी खोट और पाप को स्वीकार करें, और परमेश्वर की कृपा से पुनः नई दिशा में कदम बढ़ाएँ। यहVerse हमें चेतावनी देता है कि गौरवान्वित स्व-निर्भरता नहीं, बल्कि ईश्वर के मार्ग और नियमों में ही जीवन का सुरक्षा-मंत्र है।
त्वरित क्रॉस-रेफरेंस
1) राज 8:50 — क्षमा माँगने पर परमेश्वर की दया और प्रायश्चित्त की दूरी घटती है; यह verse दिखाता है कि एक सच्चा हृदय परमेश्वर के दर्शन पाता है।
2) यिर्मयाह 3:12 — यहोवा की करुणा पुरानी और नई परिस्थितियों में भी बनी रहती है; पक्का हृदय वही है जो उसकी सहायता पाए।
3) इब्रानियों 9:22 — बिना रक्त के प्रायश्चर नहीं; पवित्रता के लिए बलिदान आवश्यक है, जो पुराने विधान के संकेतों से पुष्ट होता है।
व्याख्या नोट: ऊपर के संदर्भ उस प्रधान विचार को मजबूत करते हैं कि पवित्रता, दया और प्रायश्चरित की प्रक्रिया मनुष्यों के साथ ईश्वर के साथ एक सही, स्पष्ट संबंध बनाती है।
संक्षेपण
यह verse यह बताता है कि परमेश्वर के सामने प्रायश्चित एक पवित्र व्यवस्था के भीतर ही संभव है। धूप का धुआँ संकेत है कि पवित्रता और अनुग्रह एक दूसरे से जुड़े हैं। हमारी दया-परक प्रतिक्रिया यही हो कि हम अपने पापों को पहचानें, बीमारी-जैसी आत्मा से मुक्त हों, और परमेश्वर की पवित्रত্ব के मुताबिक जीवन जीएं।
नोट
यदि आप चाहें, मैं Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलित शब्दों से कोई संक्षिप्त उद्धरण भी शामिल कर सकता/सकती हूँ, परन्तु आवश्यकतानुसार ही ताकि मूल विचार स्पष्ट रहे। यदि उद्धरण चाहें, बताएं।