Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
लैव्यव्यवस्था 18:1 लैव्यव्यवस्था 18:2 लैव्यव्यवस्था 18:3 लैव्यव्यवस्था 18:4 लैव्यव्यवस्था 18:5 लैव्यव्यवस्था 18:6 लैव्यव्यवस्था 18:7 लैव्यव्यवस्था 18:8 लैव्यव्यवस्था 18:9 लैव्यव्यवस्था 18:10 लैव्यव्यवस्था 18:11 लैव्यव्यवस्था 18:12 लैव्यव्यवस्था 18:13 लैव्यव्यवस्था 18:14 लैव्यव्यवस्था 18:15 लैव्यव्यवस्था 18:16 लैव्यव्यवस्था 18:17 लैव्यव्यवस्था 18:18 लैव्यव्यवस्था 18:19 लैव्यव्यवस्था 18:20 लैव्यव्यवस्था 18:21 लैव्यव्यवस्था 18:22 लैव्यव्यवस्था 18:23 लैव्यव्यवस्था 18:24 लैव्यव्यवस्था 18:25 लैव्यव्यवस्था 18:26 लैव्यव्यवस्था 18:27 लैव्यव्यवस्था 18:28 लैव्यव्यवस्था 18:29 लैव्यव्यवस्था 18:30
सीधी अभिधारणा
लाववै/लैव्यव्यवस्थायें 18:10 में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि विवाह-निष्ठ संबंधों के भीतर भी किन मानदंडों का पालन करना चाहिए। यह वचन ऐहिक ऐश्वर्य के साथ नहीं, बल्कि विवाह-नैतिकता और सामाजिक सुरक्षा के सिद्धांत को केन्द्रित करता है: अपने परिवार के भीतर अनुचित संपर्क और बदनीयती से बचना चाहिए, ताकि दुष्कर्म-आचार के मार्ग पर नहीं जाना जाए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय मिस्र-युग के बाद के नियमों में यौवन-सम्बन्धों के बारे में स्पष्ट निषेध देता है। परमेश्वर के कानून में परिवार के भीतर के संबंध विशेष पवित्र माने जाते हैं, और परावर्तित सामाजिक प्रथाओं से रोकने के लिए यह प्रावधान दिया गया है कि पोते-पोतियों के साथ भी शील-रक्षा बनी रहे। इस पाठ में पुत्र-परिवार के अन्य सदस्यगणों के साथ भी नैतिक मर्यादा की मांग है।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
यह वचन स्पष्ट करता है कि देह संबंधों में पवित्र सीमा का उल्लंघन समाज-निषेध के साथ जुड़ा है। “अपनी पोती या अपनी नातिन का तन न उघाड़ना” से तात्पर्य है कि रिश्तों के भीतर भी सम्मान-संहार नहीं और न ही व्यक्तिगत देह को किसी दूसरे के लिए वस्तु बनना चाहिए। यह क्रमिक स्मृति देता है कि पिता/दादा के परिवार में भी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
ध्यान देने योग्य बिंदु
संबंधित आयतें और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
किसी भी आयत के संपूर्ण पाठ को यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है, परन्तु यह संदर्भ निम्न विषयों में मदद करता है:
प्रमुख टिप्पणी-धारणा (संक्षेप)
पारिवारिक-नैतिकता में स्पष्ट सीमाओं का पालन करना, देह-सम्बंधों के प्रति सावधान रहना और सत्ता के दुरुपयोग से बचना इस वचन का सार है। यह केवल आचार-विचार की बात नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और समानता-स्वर पर आधारित एक संरक्षित समाज बनाने का आह्वान है।
सूक्ष्म संदर्भ और उद्धरण-उल्लेख (पूर्व-ग्रंथ-टिप्पणी)
इस अनुच्छेद के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे पुराने-पब्लिक-डोमेन टीका-लेखकों के विचारों से मिलते-जुलते संकेत उपलब्ध हैं। मौजूदा पाठ में उनके रचनात्मक संदोषों के छोटे-छोटे उद्धरण आवश्यक स्थान पर हो सकते हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण यहाँ नहीं हैं।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
अपने परिवार के सदस्यों के साथ स्पष्ट सीमा बनाकर रखें; किसी प्रकार के अवांछित देह-सम्बन्ध से सावधान रहें; बच्चों और युवाओं को सुरक्षित तथा शालीन वातावरण दें।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में स्पष्ट कारणों के साथ)
1) समान नैतिक संरक्षण के सिद्धांत के लिए दूसरा कानून/नीति-सोर्स—परिवार के भीतर पवित्रता और सुरक्षा आवश्यक है।
2) यौन-आचार के दायरे को स्पष्ट करने वाले अन्य संस्कार-नियम—ताकि इच्छाओं के दुरुपयोग से समाज बचे।
ध्यान दें: यह commentary मूल पाठ के साथ सीधे जुड़ा है और किसी विशेष दार्शनिक-या धार्मिक-मत के पक्ष में नहीं है।