Old Testament
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लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 4:31 का सरल अर्थ
यह पद स्पष्ट रूप से कहता है कि पशु की चर्बी को चर्बी-सहचरी (मेलबलि) के समान अलग किया जाए, फिर याजक उसे परमेश्वर के निमित्त वेदी पर सुखदायक सुगन्ध के लिए जलाए; इस प्रकार याजक उसके लिए प्रायश्चित करे, तब उसे क्षमा मिलेगी।
पश्चिमोत्तर संदर्भ और पृष्ठभूमि
यजमानों द्वारा किए जाने वाले चतुर्थ भाग के दायित्व में यह नियम बताता है कि अपराध के प्रकार के अनुसार बलिदान का भाग किस प्रकार वेदी पर चढ़ना चाहिए। यहाँ चर्बी का विशेष महत्व है—यह शरीर की उत्कृष्ट चर्बी है जिसे जलाकर सुगन्ध बनती है। यह यज्ञ-प्रायश्चित का प्रतिनिधित्व है कि दोष के कारण टूटी हुई सामंजस्यता को परमेश्वर के समक्ष शुद्ध किया जाए।
व्याख्यात्मक बिंदु
क्रिस्त-वचनाधारित संदर्भ-सम्बन्ध
1) पश्चाताप और प्रायश्चर्य की आवश्यकता; 2) जीवित आत्मा के लिए पवित्रता का मूल्य; 3) मध्यस्थता की भूमिका—यह सब प्रकाशन में हमारे दायिक अनुभव से समधुर है।
संक्षिप्त सिद्धान्तात्मक सूची
संदर्भ-विवेचन (Cross-references)
- Leviticus के अन्य बलिदान आदेश: बलिदान के अंशों के अनुपात में क्षमा और पवित्रता।
- Leviticus 4:26, 31 में प्रायश्चित की प्रक्रिया का दोहराव—याजक के द्वारा क्रिया और क्षमा की प्राप्ति
- Hebrews 9:22, 10:1–4 में बलिदान-प्रणालियों का पूर्णता का विचार
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे लिए यह पाठ यह स्मरण कराता है कि दोष जब भी सामने आए, ईश्वर की पवित्रता के अनुरूप प्रायश्चित की आवश्यकता रहती है। यद्यपि यह पुरानी व्यवस्था का हिस्सा है, परन्तु उसके पीछे की आत्मा—दोषी मन का निगमण, पवित्रता के प्रति स्मरण और मध्यस्थ की भूमिका—आज भी हमारे नैतिक जीवन में सच है।
उद्धृत संक्षेप कथन (उद्धरण केवल यदि उपलब्ध):
यहाँ मिलते-जुलते विचार, मत्ती हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायेट उद्धरणों से मिलते हैं—पर आपूर्ति अनुसार संक्षेप प्रसंग के उद्धरण मिलते हैं।