Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
लैव्यव्यवस्था 1 लैव्यव्यवस्था 2 लैव्यव्यवस्था 3 लैव्यव्यवस्था 4 लैव्यव्यवस्था 5 लैव्यव्यवस्था 6 लैव्यव्यवस्था 7 लैव्यव्यवस्था 8 लैव्यव्यवस्था 9 लैव्यव्यवस्था 10 लैव्यव्यवस्था 11 लैव्यव्यवस्था 12 लैव्यव्यवस्था 13 लैव्यव्यवस्था 14 लैव्यव्यवस्था 15 लैव्यव्यवस्था 16 लैव्यव्यवस्था 17 लैव्यव्यवस्था 18 लैव्यव्यवस्था 19 लैव्यव्यवस्था 20 लैव्यव्यवस्था 21 लैव्यव्यवस्था 22 लैव्यव्यवस्था 23 लैव्यव्यवस्था 24 लैव्यव्यवस्था 25 लैव्यव्यवस्था 26 लैव्यव्यवस्था 27Verse
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लैव्यव्यवस्था 9:4 का अर्थ—संक्षिप्त अस्पष्टताओं के भीतर दर्शन का संकेत
सीधे शब्दों में कहा जाए तो यहां यहूदा के पुरोहितों को एक ऐसी तैयारी का निर्देश है जिसमें बकरा-तथा-भेड़ और अन्नबलि के तीन अंश सम्मिलित हैं—एक जो मेलबलि के लिए, दूसरा मेढ़ा और तीसरा अन्नबलि, सब कुछ तेल से सने हुए। इन कर्मों के साथ यहोवा के दर्शन की अभिलाषा जुड़ी है। सरल शब्दों में: एक समर्पण-प्रकाष्ठ और पवित्र व्यवहार से यहोवा अपने निवासस्थान का आंशिक उद्घाटन कर देगा।
पार्श्वभूमी और संदर्भ
यह पाठ माउंट मॉरिया के निकट अवस्थित संस्थानिक प्रथाओं के संदर्भ में है, जब यहूदियों ने एक समापन भव्यता के साथ पवित्र-अंशो की विधिवत संस्था शुरू की। लैव्यव्यवस्था 8 में आराधना-योग्यता के लिए आचार-विधियाँ स्थापित हुईं और अब 9:4 में यह बताया गया है कि क्या-क्या चढ़ावे और उपाय होते हैं, ताकि यहोवा दर्शन दे सके। पहले todha में कहा गया है कि यह सब तैयारियाँ यह सुनिश्चित करें कि पुरोहित और People की एकता, पवित्रता और प्रार्थना का जलसा सफल रहे।
व्याख्या के मुख्य निष्कर्ष
क्रिया-निर्देश और आत्म-निरीक्षण
यहाँ क्या करें—और क्यों:
संबद्ध पद सुझाव (संक्षिप्त संदर्भ समझाने के लिए)
यद्यपि पूर्ण आयतन यहाँ नहीं दिया जा रहा है, निम्न संदर्भ कड़ियाँ इस दृश्य को व्यापक संदर्भ में समझाते हैं:
हिंदी पाठ के साथ परंपरागत टिप्पणी-झलक
इस पाठ पर पारंपरिक विद्वानों की एक संगत धारा है—जैसे मैथ्यू हेन्नरी, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क—जो बताते हैं कि बलिदान-उपचार में extérieure रूप से दिखने वाले रीति-रिवाज आंतरिक भक्ति के प्रतीक हैं। उनके विचारों के अनुसार, यह यहूदियों के लिए एक दृढ़ विश्वास-चैनल है कि ईश्वर की उपस्थिति तब ही खुलती है जब लोग पवित्र उपायों में ईमानदारी से भाग लेते हैं।
मुख्य विचार: परमेश्वर दर्शन तब मिलते हैं जब भक्त लोग सही माना गया मार्ग अपनाते हैं और हर आह्वान-समारोह में ईमानदार समर्पण दिखाते हैं।
संक्षिप्त उपयोगी निष्कर्ष
Cross-references (संकेत):
निष्कर्षतः, यह वाक्य यह बताता है कि उपस्थिति और आशीर्वाद के लिए हमें ईश्वर के सामने सही मनःस्थितिके साथ समर्पण-व्यवहार निभाना आवश्यक है—ताकि दर्शन संभव हो सके।