Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 29:1 निर्गमन 29:2 निर्गमन 29:3 निर्गमन 29:4 निर्गमन 29:5 निर्गमन 29:6 निर्गमन 29:7 निर्गमन 29:8 निर्गमन 29:9 निर्गमन 29:10 निर्गमन 29:11 निर्गमन 29:12 निर्गमन 29:13 निर्गमन 29:14 निर्गमन 29:15 निर्गमन 29:16 निर्गमन 29:17 निर्गमन 29:18 निर्गमन 29:19 निर्गमन 29:20 निर्गमन 29:21 निर्गमन 29:22 निर्गमन 29:23 निर्गमन 29:24 निर्गमन 29:25 निर्गमन 29:26 निर्गमन 29:27 निर्गमन 29:28 निर्गमन 29:29 निर्गमन 29:30 निर्गमन 29:31 निर्गमन 29:32 निर्गमन 29:33 निर्गमन 29:34 निर्गमन 29:35 निर्गमन 29:36 निर्गमन 29:37 निर्गमन 29:38 निर्गमन 29:39 निर्गमन 29:40 निर्गमन 29:41 निर्गमन 29:42 निर्गमन 29:43 निर्गमन 29:44 निर्गमन 29:45 निर्गमन 29:46



निर्गमन 29:43 का अर्थ
यह वचन कहता है कि वह तीर्थयात्रियों और सेवकों के हवाले से एक विशिष्ट पवित्र स्थिति बनाए रखेगा—तम्बू और उसके कर्मठ कार्य पवित्र माने जाएँगे, ताकि परमेश्वर के सम्मानित भवन में आदमी की अशुद्धि से बचाव हो सके। सीधे शब्दों में, परमेश्वर अपने लोगों के मिलनस्थल को पवित्र बनाकर अपनी उपस्थिति को स्थिर और दृढ़ रखना चाहता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह आया है उन निर्देशों के बीच, जो मोशे के समय से मूर्त-परम्परा से जुड़ी सेवा—यहोवा के सामने चढ़ावे, पथ प्रदर्शक और priests के लिए जल-प्रेरक व्यवस्था—की स्थापना करते हैं। यह वाक्य specifically बताता है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी आदर-पूजा के स्थान को कैसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि एलीवन-शासन में भी उसकी उपस्थिति प्रसिद्ध रहे।
टीकात्मक अवलोकन
छोटा थीमेटिक सूची
अन्य संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
उल्लेखनीय क्रॉस-रेफरेंसेज़ में से 3 है: एक प्रेरित परिशुद्धता के साथ यह दिखाता है कि परमेश्वर किस प्रकार स्थान-आवरण और हृदय की पवित्रता को समान रूप से महत्त्व देता है; दूसरा, पवित्रता वह सीमा है जो विश्वसनीय आराधना के लिए चाहिए; तीसरा, स्थिर परमेश्वर-उपस्थिति का आश्वासन है जो समुदाय को एक साथ बंधे रहने की प्रेरणा देता है।
हिंदी निष्कर्ष
इस वचन में यह सिखाया गया है कि परमेश्वर अपने लोगों के मिलनस्थल—तम्बू—को पवित्र बनाकर अपने निकटस्थ रहने की प्रतिज्ञा रखते हैं। यह पवित्रता के समावेश के साथ आराधना के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक वातावरण बनाता है, जहाँ परमेश्वर की महिमा दिखती रहे। यह याद दिलाता है कि हमारे जीवन के आदर-पूजा स्थल चाहे वह आत्मिक-आकृति हो या समूह-प्रार्थना—को भी पवित्र बनाए रखना परमेश्वर की इच्छा है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) यहोवा की पवित्रता और मिलन-स्थल के बारे में अन्य पहलू: पवित्रता एक सक्रिय सुरक्षा-व्यवस्था है; 2) आराधना-स्थल की पवित्रता, ताकि परमेश्वर की उपस्थिति स्थिर रहे; 3) समुदाय में पवित्र जीवन का महत्त्व, ताकि आशीर्वाद बना रहे।
व्यवहारिक निष्कर्ष
हम अपने जीवन के "तम्बू"—घर, कार्यस्थल, समुदाय—को पवित्र रखने का प्रयास करें। ईमानदारी से आराधना करें, दूसरों के प्रति शुद्ध और सम्मानपूर्ण रहें, ताकि परमेश्वर की उपस्थिति हमारे बीच बनी रहे।
उद्धरण-धारणा: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की पंक्तियाँ का सीधा पूर्ण उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है, पर उनके विचारों के सार के अनुरूप यह पाठ उपस्थिति और पवित्रता के महत्व पर जोर देता है।