Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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readership overview
निर्गमन 29:39 में देवदत्त कार्य के लिए दिन-रात्रि बलिदान की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। इस अध्याय में परमेश्वर के आह्वान के अनुसार पवित्र सेवकों के लिए विशेष घुलन-संयोजन और समर्पण का ढांचा प्रस्तुत है। verse 39 का सार यह है कि भोर और सांझ के समय दो भेड़ के बच्चे समर्पित चढ़ाने चाहिए, ताकि लगातार प्रभु के पवित्र स्थान-उन्मुखता और प्रतिदिन के सेवकत्व का स्मरण बना रहे। यह अपने आप में दोनो समयों का संतुलित समर्पण दर्शाता है—आरम्भ और समाप्ति दोनों को परमेश्वर के सामने ले जाना।
verse in its chapter context
निर्गमन 29 में पूर्ण כהनीय व्यवस्था की तैयारी दी गई है, विशेषकर आरोहण-यज्ञ और पवित्रता-प्रक्रिया के लिए। यह verse 39 द्वाराकार है कि कैसे हर दिन के समय प्रभु के देव-उत्पादन के लिए एक निर्धारित क्रम बना रहे। भोर और सांझ के बलिदान, एक नियमित साधना की याद दिलाते हैं कि जीवन के प्रत्येक दिन में परमेश्वर के साथ संबंध वास्तविक और दृढ़ होना चाहिए।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पाठ का मूल पाठ यह है कि प्रभु के सामने सतत समर्पण और व्यवस्था से विफल नहीं होना चाहिए। भोर और सांझ का प्रतीक है कि दिन के आरम्भ और अन्त में परमेश्वर का सम्मान होता रहे। यह केवल प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह सामर्थ्य के साथ सेवा का जीवन है—हर दिन की शुरुआत और अंत परमेश्वर के लिए नियुक्त है।
अन्य बाइबिल पाठ से तुलना
इन संदर्भों से सीख मिलती है कि हर दिन के आरम्भ और अंत में प्रभु के लिए समय रखना, हमारी भक्ति को स्थिर और प्रभावी बनाता है।
मुख्य सीख का व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षिप्त सार
निर्गमन 29:39 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के closer presence के लिए दिन-रात एक समान समर्पण आवश्यक है। भोर और सांझ के बलिदान एक जीवन-योजना की संरचना बनाते हैं जो हर दिन के आरम्भ और अंत को प्रभु के साथ जोड़ती है। यह धार्मिक जीवन की स्थिरता और विश्वास की निरंतरता की शिक्षा है।
क्रॉस-रेफरेन्स
संदर्भ-1: लूका 18:1—प्रार्थना में लगातार रहने की सीख देता है कि प्रतिदिन प्रभु के सामने स्थिरता कैसे बनी रहे।
संदर्भ-2: स्तोत्र 55:17—भोर, दोपहर, और रात्रि में परमेश्वर की आवाज़ सुनते रहने का सुझाव देता है।
संदर्भ-3: आयत 28:40-41—यज्ञों के क्रम और धार्मिक व्यवस्था के महत्व को दोहराता है।
उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षेप उद्धरण (यदि उपलब्ध):
Matthew Henry से: “God’s worship must be kept up, morning and evening, as long as the world stands.”
Albert Barnes से: “The constant offerings at break of day and at evening are signs of a life kept in continual communication with God.”
Adam Clarke से: “These daily sacrifices were not vain or ceremonial merely; they kept up a perpetual sense of dependence on God.”