Old Testament
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मलाकी 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए, क्योंकि यहोवा तेरे और तेरी उस जवानी की संगिनी और ब्याही हुई स्त्री के बीच साक्षी हुआ था जिसका तूने विश्वासघात किया है।
मलाकी 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मलाकी 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 54:6 (HINIRV) »
क्योंकि यहोवा ने तुझे ऐसा बुलाया है, मानो तू छोड़ी हुई और मन की दुःखिया और जवानी की त्यागी हुई स्त्री हो, तेरे परमेश्वर का यही वचन है।

उत्पत्ति 31:50 (HINIRV) »
यदि तू मेरी बेटियों को दुःख दे, या उनके सिवाय और स्त्रियाँ ब्याह ले, तो हमारे साथ कोई मनुष्य तो न रहेगा; पर देख मेरे तेरे बीच में परमेश्वर साक्षी रहेगा।”

मलाकी 3:5 (HINIRV) »
“तब मैं न्याय करने को तुम्हारे निकट आऊँगा; और टोन्हों, और व्यभिचारियों, और झूठी शपथ खानेवालों के विरुद्ध, और जो मजदूर की मजदूरी को दबाते, और विधवा और अनाथों पर अंधेर करते, और परदेशी का न्याय बिगाड़ते, और मेरा भय नहीं मानते, उन सभी के विरुद्ध मैं तुरन्त साक्षी दूँगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। (याकू. 5:4)
मलाकी 2:14 का अर्थ
इस पद का मुख्य अर्थ है कि यहोवा खुद সাক্ষि है कि तुम ने अपनी जवानी की वचनी-प्रतिज्ञा और विवाह-बंध को तोड़कर विश्वासघात किया है; इसलिए वह तुम्हारे व्यवहार पर निष्ठुर दृष्टि रखता है।
प्रसंगीय पृष्ठभूमि
मलाकी की किताब उस समय की संस्थागत धार्मिक व्यवस्था की मरम्मत के लिए उद्धृत है, जब यजीरियों के बीच आध्यात्मिक रुचि और नैतिकता ढीली पड़ रही थी। प्रायः गलतफहमियाँ, पंथ-धोखा, और कर्मों की उपेक्षा के कारण यहोवा के साथ उनके विश्वासघात की घटनाएँ उठतीं हैं। यह पद तपस्वी-प्रेम, सामाजिक विश्वासघात और पवित्र ठहराव के बीच टकराव को दर्शाता है, जिसमें यहोवा एक सचेतन गवाही देता है कि विवाह-बंध और प्रेम-प्रतिज्ञा में ईमानदारी चाहिए।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार‑सूत्र
अनुदेशात्मक CROSS-रेफरेंस (संक्षेप)
कई जगह बाइबल में विवाह-बंधन और ईमानदारी पर बल है; यह पद अन्य प्रेरित लेखन से परावर्तित होकर स्मरण कराता है कि पूर्ववर्ती संबंधों के प्रति शुद्धता बनाये रखना परमेश्वर के साथ हमारी आस्था का मापदंड है।
उदा: पूर्व-पवित्र प्रतिज्ञाओं के सम्मान की बात, और यहोवा के साथ ईमानदारी के परीक्षणों में स्थिर रहने की प्रेरणा।
संक्षेपित निष्कर्ष
मलाकी 2:14 हमें बताता है कि यहोवा हर आचरण-घटना में साक्षी है और उसकी दृष्टि में विवाह-बंधन के प्रति ईमानदारी ही वास्तविक भक्ति है। यह पाठ नैतिक-आचार की कसौटी को वर्तमान जीवन से जुड़कर समझाता है: विश्वासघात के स्थान पर प्रेम, निष्ठा और दायित्व की पूर्ति का मार्ग चुनना।
संक्षिप्त लागू निर्देश
संदर्भ-आधार: पैरग्राफिक सारांशों में मानक पुरानी टिप्पणीकारों की सामान्य सूचनाओं का समन्वय किया गया है, ताकि पाठक को मूल संदेश स्पष्ट रहे।
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