Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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गिनती 18:26 का परिचयात्मक क्षण और इसकी महत्ता
यह पाठ यहोवा के देने वाले नियम के अंतर्गत लेवीय सेवक से संबंधित एक व्यवस्थात्मक निर्देश देता है। इस्राएली वंश के बीच दशमांश (कर) का एक भाग प्रायः हर परिवार के योगदान के साथ लिया जाता था, पर लेवीय priestly सेवक समुदाय के लिए विशेष विभाजन थे। यहाँ कहा गया है कि जब भी तुम इस्राएलियों के हाथ से वह दशमांश लो जिसे यहोवा तुम्हें तुम्हारा निज भाग करके उनसे दिलाता है, तब-तब उसमें से यहोवा के लिये एक उठाई हुई भेंट करके दशमांश का दशमांश देना।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
इस छोटे से नियम में नेतृत्व और दायित्वों का संतुलन दिखता है। भगवान अपने जनसमुदाय से प्रायः देह-सम्पत्ति का भाग लेते हैं ताकि उसकी सेवा और मंदिर के कार्य संचालित हो सकें; और वह भाग जो लेवियों के लिए निर्धारित है, उसे यहोवा के लिये एक विशेष भेंट में समर्पित किया जाना चाहिए। यह संकेत देता है कि आशीर्वाद प्राप्त करना एकतरफा नहीं है बल्कि उसका भागीदारी और सेवा के साथ संतुलन बना रहता है। साथ ही यह भी दिखता है कि जो कुछ मिलता है, उसका पहला भाग—यानी दशमांश का एक उपजीविका—स्वर्गीय के लिए समर्पित करने की mentality विकसित करनी चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध पद
यह प्रकार्य tidigare पाठों से मेल खाता है जहाँ दान, सेवा-योग्यता और परमेश्वर के लिए समर्पण का संगम दिखता है।
संबंधित पदों के संक्षिप्त संकेत
आज के जीवन में अनुप्रयोग
1) भागीदारी के मूल्यों को बनाये रखें: जो कुछ भी ईश्वर ने आपको दिया है, उसे केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रखें—पहला भाग उसे समर्पित करें जो परमेश्वर के कार्यों के लिए उपयोग हो।
2) सेवा के साथ संपत्ति का उपयोग करें: अपने संसाधनों को ऐसे कामों के लिए दें जो समुदाय के लिए उपकारदायक हों—यही आध्यात्मिक वितरण का वास्तविक अर्थ है।
3) विश्वसनीय नेतृत्व की स्थिति में नम्रता और जवाबदेही: लेवीय व्यवस्थाओं में priestly वर्ग की जवाबदेही स्पष्ट थी—हम भी अपने अवसरों पर नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखें।
3 छोटा cross--reference दृष्टिकोण
निष्कर्ष: यह निर्देश यह दिखाता है कि ईश्वर के लिए समर्पण और भेंट-स्वरूप योगदान हमारे समुदाय के सेवा-कार्य और पूजास्थल की देखभाल की रीढ़ है। आज भी हमारा दायित्व है कि जो मिला है उसका एक हिस्सा परमेश्वर के लिए उठाए हुए भेंट के रूप में आरक्षित रहे और साथ ही सेवा के क्षेत्र में एक जिम्मेदार नागरिक की तरह भागीदारी करें।
कृपया ध्यान दें कि इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के अभिलेखीय विचारों के छोटे-छोटे कथन आवश्यकतानुसार सम्मिलित किए गए हैं। यदि आप चाहें तो मैं उन उद्धरणों की पूर्ण-टेक-एंट्री दे दूँ।