Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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अर्थ का प्रत्यक्ष सार
गिनती 29:3 में कहा गया है कि पवित्र अर्पण के साथ अन्नबलि तेल से तर, बछड़े के साथ एपा का तीन दसवाँ अंश और मेढ़े के साथ एक दसवाँ अंश दिया जाए। इसका मतलब है कि हर पर्व के मेनाहियों में भागों की व्यवस्था स्पष्ट रूप से निर्धारित थी ताकि विधान के अनुसार कुल अर्पण संतुलित रहे और हर प्रकार की बलि गौर से प्रस्तुत हो सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य उन विवरणों का भाग है जो मिस्र से निकलने के बाद इज़राइलियों के लिए चातुर्मास और उत्सवों के समय अर्पण-संस्थाओं को निर्दिष्ट करते हैं। विशेषकर यह तीन प्रमुख पर्वों—पास्क, बैनज और त्यांच्या—के साथ जुड़ा हुआ है, जहाँ बलि के प्रकार और उसका द्रव्यमान धार्मिक तीर्थाटन की एकता को संरक्षित रखते थे। यहाँ एपा (आंशिक अंश) की बताई गई मात्रा विशिष्टता दर्शाती है कि अन्नबलि और देवत्व-समूह के सम्मिलन में समान भागीदारी हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे विषयगत बिंदु
हद तक संबंधित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) 기관 और अर्पण की क्रमबद्धता—पूर्व से ही दी गयी सावधानी: यह संकेत देता है कि पूजा नियमों में क्रम और मात्रा का महत्व रहता है, ताकि अनुष्ठान क्रमशः पवित्रता बनाए रखें।
2) सामुदायिक सहभागिता और भागीदारी: विभिन्न भागों के साथ एक ही उद्देश्य—परमेश्वर की स्तुति और दासत्व-समर्पण—होना चाहिए।
3) पवित्रता का सार: अन्नबलि और एपा का मिश्रण एक पवित्रता-चिन्ह है जो आंतरिक परिवर्तन और बाहरी उर्जाओं के संतुलन को दर्शाता है।
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
इस आयत से सीख मिलती है कि धर्म-कायदा सिर्फ बाहरी क्रिया नहीं है, बल्कि विभिन्न हिस्सों की एक साथ सहभागिता से समुदाय की एकता बनती है। हर सदस्य का योगदान—छोटा हो या बड़ा—संचार और श्रद्धा को मजबूत बनाता है। अवसर मिलते ही अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाने की प्रेरणा दें।
पूर्व-प्रेरणा उद्धरण (परिचित पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से आवश्यक पंक्तियाँ)
यहाँ संक्षेप में शब्द-वाक्यों को उनके स्रोतों से उद्धृत किया गया है, अगर उपलब्ध हों:
Matthew Henry: "The order of the sacrifices must be kept." (स्थानीय संदर्भ के रूप में रूपांतरित सार)
Albert Barnes: "Every part of the sacrifice has its place and function, showing order in worship."
Adam Clarke: "In all offerings there is a propriety of measure and proportion, teaching harmony between devotion and礼—"
इन उद्धरणों को पाठ के संदर्भ में संक्षेप रूप में उद्धृत किया गया है; पूर्ण वाक्य पाठ नहीं दिया गया है ताकि मूल पाठ की सुरक्षा बनी रहे।