Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 3:4 — संदर्भ में संक्षिप्त स्पष्टिकरण
इस पद में यह दर्शाया गया है कि नादाब और अबीहू ने परमेश्वर के सम्मुख अनुचित आग चढ़ाई, और उसी समय वे मर गए। यह घटना मूसा के समय के गिनती-यज्ञिक व्यवस्था के भीतर, सीनै पर्वत के सामने यहोवा के पवित्रता और भेंट-स्वीकृति के नियमों के प्रत्यक्ष उल्लंघन की गवाही देती है। इस घटना के पीछे यह संदेश है कि परमेश्वर के मंदिर और उसकी सेवा के मानदंड कितने अत्यंत और अड़ियल होते हैं; यह याजकों और दशकों से अनुशासन की आवश्यकता को भी उजागर करता है कि कौन परमपूज्य सेवा के योग्य है।
मुख्य अर्थ
पर्वत पर संगठित दीक्षा—युद्ध-प्रयोग नहीं—इस बात को दिखाता है कि परमेश्वर अपनी पवित्रता के लिए मानक तय करता है। नादाब और अबीहू ने प्रथा के अनुसार उचित अभिवादन नहीं किया, और उनकी आग परमेश्वर के आदेश के विरुद्ध उठी थी। परिणामस्वरूप वे तुरंत मृत्यु को प्राप्त हुए। यहयाजक हारून के पुत्र होने के बावजूद उन्हें दायित्वों में सतर्कता और पवित्रता दिखानी जरूरी थी।
कुंजी विषय
संबद्ध संदर्भ
1) बहुवचन में पवित्रता और व्यवस्था का महत्व दर्शाने वाले अन्य केंद्रित अध्यायों से संलग्नता: लोग 1-2; यह दर्शाता है कि परमेश्वर के पवित्र स्थान की सुरक्षा कैसे आवश्यक है।
2) यशायाह के समय के पवित्रता के सिद्धांत: परमेश्वर अपने पवित्र स्थान के मानदंडों की अवहेलना नहीं कराते; यह दृश्य यह दिखाता है कि धार्मिक कर्म में भेदभाव नहीं चलने देना चाहिए।
3) यहूदियों की भूमिका और याजक-आचार के नियम: याजक-परिवार की जिम्मेदारी और सतर्कता का महत्त्व।
व्यावहारिक विचार
आइए हम यह समझें कि परमेश्वर के सामने हर धार्मिक क्रिया शब्दशः और आत्म-उत्सर्ग के साथ होनी चाहिए। नेतृत्व और उपासना में स्पष्ट निर्देशों का पालन, व्यक्तिगत-समय के साथ समुदाय के लिए एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। हमारी पूजा-चयन और सेवाभाव में भी पवित्रता का पालन सर्वोपरि है।
μal-चरण और समापन
नादाब और अबीहू की घटना से यह सिख मिलती है कि परमेश्वर की महिमा के सामने हमारी पूजा में सावधानी और सम्मान आवश्यक है, ताकि यहयात्रा और समुदाय की प्रतिष्ठा बनी रहे। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि पवित्रता और कर्तव्य के बिना सेवा अधूरी है, और परमेश्वर के आदेशों के अनुरूप ही आचरण चाहिए।
कथन-संदर्भ
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-टिप्पणियों से मिलने वाले संकेत: यहूदियों के धार्मिक कर्तव्य में पवित्रता की अनिवार्यता, भूमिका-मानकों का पालन और ईश्वर के नेम-आवहपूर्णता का सामान्य सिद्धांत स्पष्ट होते हैं।
संकेतित उद्धरण (छोटे-पटाक्षण)
यदि उपयोग किया गया हो, तो मात्र वही छोटा-उद्धरण जिनमें स्पष्ट और एकदम संकुचित शब्द-आवृत्ति है, उदाहरणार्थ: “यहोवा के सामने मर गए थे” (यादृच्छिक उद्धरण नहीं, सटीक संदर्भ के साथ). नीचे उद्धृत पूर्ण-पाठ के बजाय संक्षेप का उपयोग किया गया है ताकि मूल पाठ की भावना बनी रहे.