Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
गिनती 35:1 गिनती 35:2 गिनती 35:3 गिनती 35:4 गिनती 35:5 गिनती 35:6 गिनती 35:7 गिनती 35:8 गिनती 35:9 गिनती 35:10 गिनती 35:11 गिनती 35:12 गिनती 35:13 गिनती 35:14 गिनती 35:15 गिनती 35:16 गिनती 35:17 गिनती 35:18 गिनती 35:19 गिनती 35:20 गिनती 35:21 गिनती 35:22 गिनती 35:23 गिनती 35:24 गिनती 35:25 गिनती 35:26 गिनती 35:27 गिनती 35:28 गिनती 35:29 गिनती 35:30 गिनती 35:31 गिनती 35:32 गिनती 35:33 गिनती 35:34

गिनती 35:17 का संदर्भ और उसका अर्थ
यह पद उन कानूनों के क्रम में है जो शहीदों के स्थान-निर्धारण और दोष-आरोपियों के दंड से जुड़े हैं। यहाँ एक ऐसे पत्थर की बात है जिसे हाथ में पकड़कर मार डालने की क्षमता हो, और अगर वह पत्थर किसी को मार दे, तो वह “खूनी” ठहरेगा और उसे मार डाला जाएगा। यह व्यवस्था इस बात पर जोर देती है कि हत्या की गंभीरता और नीयत किसी भी हाल में न्याय के मानदंड से ऊपर नहीं रहती।
कथन से निकलने वाला ईश्वर-विश्वास का संदेश
यह वाक्य तत्कालीन समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए कठोर दंड की आवश्यकता को दर्शाता है—एक ऐसी सभ्यता जिसमें जीवन की श्रा-रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। परमेश्वर के छाँव तले यह नियम इस बात को स्पष्ट करता है कि जानबुझकर या असावधानी से भी किसी के प्राण लेना एक अपराध है और इसे उचित न्याय के बिना नहीं रहने दिया जाएगा। साथ ही यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर न्याय पर अडिग है और समाज के हर सदस्य के लिए मानवीय जीवन का महत्व बना रहता है।
महत्वपूर्ण शब्दों एवं imagery की स्पष्टता
संबंधित भाग और उनके संदर्भ
1) नीयम और दंड के सिद्धान्त पर निर्भर अन्य कानून— यह दिखाता है कि हत्या किसी भी कारण से माफ नहीं होती, चाहे दुर्घटना हो या आत्मरक्षा, विशिष्ट परिस्थितियों में भी पलायन नहीं मिलता।
2) निर्भय न्याय की भावना— यह कानून समाज को एक संरक्षित ढांचा देता है जिसमें जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि रहती है; यह विश्वास देता है कि ईश्वर हर प्राणी की रक्षा में है।
3) शांति-स्थापना की दिशा— ऐसे नियम समाज में सैन्य और नागरिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखते हैं ताकि भीषण घटनाओं को रोकने के उपाय स्पष्ट रहे।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (उचित संदर्भ के साथ)
यह भाग निष्क्रिय उद्धरण नहीं देता, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि हत्या के दोष पर कड़ा दंड क्यों आवश्यक है। यदि आपMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार को चाहें, तो वे इस प्रकार के कठोर दंड को समाज-व्यवस्था बनाए रखने वाले नियमों के रूप में देखते हैं—परन्तु उनके शब्द यहाँ सीधे उद्धृत नहीं किये जा सकते; आप चाहें तो उनके टिप्पणी-टिप्पणियों में इसी विषय के विस्तृत विवेचन देख सकते हैं।
आज के समय में अनुप्रयोग
यह verse हमें sudhar-आधारित सुरक्षा और समुदाय के जीवन पर विचार कराती है। आज के संदर्भ में इसका संदेश है कि कानून और सामाजिक संस्थान मिलकर जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करें, ताकि किसी का जीवन जोखिम में न पड़े। हर व्यक्ति जिम्मेदार है कि वह उग्र क्रियाओं से बचे और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सहयोग दे।
संक्षेप सार
गिनती 35:17 एक कठोर पर न्यायपूर्ण नियम है जो हत्या के हर प्रकार के कारणों को एक समान नज़र से देखता है। यह परमेश्वर के न्याय-व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है और समाज में जीवन के मूल्य की संरक्षा की दिशा में कार्य करता है।