Old Testament
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फिलिप्पियों 4:19 पर टिप्पणी: translations and context
पद कहता है: “और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।” प्रेरित पौलुस ने इस वाक्य में विश्वासयोग्यों को एक ठोस आश्वासन दिया है: उन सभी आवश्यकताओं के पीछे परमेश्वर की संप्रभु व्यवस्था है जिसे यीशु मसीह में महिमा के साथ उनके पीछे रखा गया है। यह वचन primarily उनके रुके-रहे विश्वास और सुख-संतोष के बारे में है, न कि व्यक्तिगत धन-संपत्ति की गारंटी के बारे में। परिश्रमी जीवन, सेवकाई और विपत्तियों के बीच भी परमेश्वर की प्रतिज्ञा समान रहती है: वह हर कमी को पूरा करेगा क्योंकि उसकी कृपा और सामर्थ्य मसीह में प्रकट है।
मुख्य धारणाएं
1) परमेश्वर का अनुमानित डिज़ाइन: हर घटी आवश्यकता के लिए वह पर्याप्त उपाय प्रदान करेगा। यह अनुरोध-प्रतिउत्तर उसे विश्वास की प्रगति में साथ देता है।
2) महिमा में यीशु मसीह की स्थिति: वह धन जो परमेश्वर के धरोहर स्वरूप है, वह मसीह यीशु के माध्यम से उपलब्ध है; इसलिए शक्ति और सामर्थ्य का स्रोत वही है।
3) दैनंदिन चित्त-संतोष का आह्वान: यह नसीहत है कि भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमारा भरोसा ईश्वर के प्रोविजन पर होना चाहिए।
केंद्रीय विषय
आश्वासन और संतोष: ईश्वर चाहें तो हमारे हर अभाव को पूरा कर सकता है। यह उद्धार-जीवन के व्यापक संदर्भ में है—क्योंकि जो परमेश्वर यीशु में महिमा रखते हैं, वे हमारे दर्द-भरे पलों में भी अपने समर्थक हाथ रखते हैं। साथ ही, यह दम्भ-स्वप्न नहीं, बल्कि विश्वास की वास्तविकता है: ईश्वर की पूर्ति समय और उचित तिथियों में आती है।
संबद्ध आयतें (संक्षिप्त संदर्भ)
1) पौलुस का अन्य वचन जहाँ वह विश्वास-प्रहेलना और ईश्वर की पूर्ति पर बल देता है। 2) ईश्वर की विश्वासयोग्यता के उद्धार-उद्धरण जो संतोष और आवश्यकताओं के समय में स्थिर रहते हैं।
2) यीशु में महिमा: मसीह की प्रतिष्ठा और ईश्वर की संपदा का स्रोत एक है, जो हमारे जीवन के हर हिस्से को प्रभावित करता है।
3) क्रिस्तीय जीवन का भरोसा: किशोर-परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के ध्यान में रहती हैं, और हम उनकी कृपा से समर्थ होते हैं।
व्यावहारिक विवेक
संशोधित क्रॉस-रेफरेंस
1) फिलिप्पियों 4:11-13 — आत्म-स्थिति के मुताबिक सुख-दुख में संतोष का प्रशिक्षण। छोटा-बड़ा हर रूप में सक्षम रहना यीशु में सीखना है।
2) मत्ती 6:33 — परमेश्वर के राज्य और उसकी बातों के पीछे पहले सचेत होना; फिर अन्य सब कुछ ठीक हो जाएगा।
3) रोम 8:32 — परमेश्वर ने अपने पुत्र को क्यों दिया? वह हमारे लिए कैसे संपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है—यह परम प्रेम का प्रमाण है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
फिलिप्पियों 4:19 का संदेश है: हमारी हर कमी के पीछे परमेश्वर की उदारता और मसीह में स्थित उसकी महिमा है। विश्वास से पूछा गया कोई भी आवश्यकता वह पूरी करेगा, न केवल व्यक्तिगत धन की बल्कि शांति, शक्ति और साहस की जरूरतें भी। इस वचन को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करें—ताकि कठिन समय में भी हमारा हृदय परमेश्वर के भरोसे से निर्मल रहे।
नोट: इस पंक्ति पर ईसाई पवित्र-पूर्वक commentary के प्रमुख विचारों को समेटते हुए, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक उद्धरणों के संक्षिप्त संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अगर आप चाहें तो उनके मूल शब्दों के संदर्भ में कम-से-कम शब्दार्थ समझने में और गहराई पाएंगे।