Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22



प्रकाशितवाक्य 10:4 पर टिप्पणी (HINIRV)
प्रकाशितवाक्य का यह अंश दृष्टी को उन रहस्यों की ओर ले जाता है जिन्हें स्वर्गीय दृश्यावली में प्रभु के अद्भुत कार्यों के बारे में आवृत रखा गया है। जब सातों गर्जन के शब्द उच्चारित हो चुके और विश्वासयोग्य यात्री जॉन ने उन शब्दों को लिखने को पहले से चिह्नित किया था, तब स्वर्ग से यह आदेश मिला कि जो बातें गर्जन के उन सात शब्दों से सुनी गई हैं, उन्हें गुप्त रखा जाए और लिखना न किया जाए। यह संदर्भ एक ऐसी अवधि की ओर इशारा करता है जिसमें ईश्वर के योजनाओं की गहराई मनुष्यों के लिए खुलकर नहीं बताई जा रही थीं, ताकि मानव दीनता और परम पवित्रता को बनाये रखा जा सके।
मुख्य अर्थ
इस वाक्य में दो धाराएँ स्पष्ट रूप से उभरती हैं। पहली—स्वर्गीय प्रकृति की चेतावनियाँ और रहस्य जो अभी प्रकाशित नहीं होते; दूसरी—यही हालत मानव के लिए एक उचित आत्म-समर्पण और नम्रता का अवसर है। जो बाते गर्जन के शब्दों से सुनी गईं, उन्हें पूरी तरह समझ पाना संभव नहीं था, इसीलिए उच्चस्वर से कहा गया कि उन्हें गुप्त रखा जाए। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के मन्त्रमंडल की गहराई सभी को नहीं बतायी जाती; परन्तु विश्वास और प्रेरणा के परम मार्ग में, हमें दीनता और धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
तीन प्रमुख थीम
संबंधित आयतें
प्रकाशितवाक्य 10:4 के विचार दानिएयोल (दानि.) की प्रतिध्वनियों से मेल खाते हैं, जहाँ समय-समय परभू के वे नमूने और रहस्य मंत्र की बातों को केवल दिव्य निर्देश के अनुसार किया गया है। साथ ही, दानि. 8:26 और 12:4 में भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्यवाणी के कुछ अंश समय के अनुसार खुलते हैं और कुछ अंश गुप्त रहते हैं।
व्यावहारिक विचार
हम जब भी किसी रहस्य या भविष्यवाणी के बारे में जानते हैं, तो हमें पहले अपनी आत्मा की स्थिति पर विचार करना चाहिए—क्या हमने नम्रता और श्रद्धा से प्रभु के सामने अपनी जिंदगी प्रस्तुत की है? जो बातें अभी पूर्ण रूप से समझ में नहीं आतीं, उनके प्रति विश्वास बनाए रखना हमारेFaith journey का हिस्सा है। भरोसा रखें कि परमेश्वर अपने समय पर प्रकाश डालते हैं और जो बातें गुप्त रखी जाती हैं, वे एक दिन स्वर्गीय उद्देश्य के अनुसार उद्घाटित होंगी।
छोटीCross-References के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
कथन-सार
यह वाक्य हमें सिखाता है कि परमेश्वर की योजनाओं के कुछ भाग अभी मानव समझ से बाहर हैं, और यह उचित है कि हम उन रहस्यों के विषय में विनम्र रहें, विश्वास और धैर्य से उनका इंतजार करें। ईश्वर के समय पर ही प्रकाश डाला जाएगा; तब तक हम अपने जीवन को पवित्रता, नम्रता और वफादारी के साथ जीते रहें।