Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 2:1 प्रकाशितवाक्य 2:2 प्रकाशितवाक्य 2:3 प्रकाशितवाक्य 2:4 प्रकाशितवाक्य 2:5 प्रकाशितवाक्य 2:6 प्रकाशितवाक्य 2:7 प्रकाशितवाक्य 2:8 प्रकाशितवाक्य 2:9 प्रकाशितवाक्य 2:10 प्रकाशितवाक्य 2:11 प्रकाशितवाक्य 2:12 प्रकाशितवाक्य 2:13 प्रकाशितवाक्य 2:14 प्रकाशितवाक्य 2:15 प्रकाशितवाक्य 2:16 प्रकाशितवाक्य 2:17 प्रकाशितवाक्य 2:18 प्रकाशितवाक्य 2:19 प्रकाशितवाक्य 2:20 प्रकाशितवाक्य 2:21 प्रकाशितवाक्य 2:22 प्रकाशितवाक्य 2:23 प्रकाशितवाक्य 2:24 प्रकाशितवाक्य 2:25 प्रकाशितवाक्य 2:26 प्रकाशितवाक्य 2:27 प्रकाशितवाक्य 2:28 प्रकाशितवाक्य 2:29



प्रकाशितवाक्य 2:13 पर टिप्पणी (हिंदी अनुवाद, HINIRV)
यह वचन टाइटेरिया की კრchurch के एक भाग के भीतर बैरियाती परिस्थितियों का उल्लेख करता है। विशिष्ट संदर्भ में ईसा मसीह अपने पत्र में तीर्थयात्रियों और पवित्रशास्त्र के साक्षियों के साहस की प्रशंसा करते हैं। यहाँ प्रभु स्पष्ट करते हैं कि वह उन स्थानों को पहचानते हैं जहां शैतान का सिंहासन है—यानी उन समुदायों की राजनीतिक और धार्मिक अस्थिरता के बीच भी वे अपने लोगों के साथ हैं, और उनके नाम पर स्थिर रहते हैं। विशिष्ट संदर्भ में मार्गदर्शक संदेश यह है कि विश्वास के समय भी ईमानदारगण नहीं डगमगाते, भले ही स्थान और स्थिति प्रतिकूल क्यों न हो।
केन्द्र बिंदु
प्रमुख विचार यह है कि मसीह अपने विश्वासयोग्यों के साथ रहता है—भले ही वे अत्याचार के दौर से गुजरें और मौत के धोखे से जुझें। “जहाँ शैतान का सिंहासन है” यह संकेत देता है कि महत्त्वपूर्ण धार्मिक और नैतिक दबावों के बीच भी ईमानदार संबंध बना रह सकता है।
मुख्य विषय
संबद्ध आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेस)
— यूहन्ना 16:33: संघर्ष के बीच शांति की आश्वासन दें; यद्यपि तुम संसार में दुख पाओगे, परन्तु मैं तुमसे प्रेम रखूँगा। यह दर्शाता है कि दुख के बीच भी परमेश्वर की उपस्थिति है।
— मत्ती 10:28: शरीर नहीं बल्कि आत्मा को नष्ट करने वाले से डरो; परमेश्वर के राज्य के लिए स्थिर और निर्भय रहें।
— 2 तीमुथियुस 4:7-8: भरोसे के साथ समाप्ति तक टिके रहने की तस्वीर, जो अंततः चिरस्थायी पुरस्कार का संकेत है।
व्यावहारिक चिंतन
हमारी आज की पहचान और आस्था अनेक दबावों के बीच परिक्षण में है—परिचित मानदंडों के पीछे भागना या विश्वसनीयता छोड़ना तात्कालिक आसान लगता है। परन्तु इस वचन से सीख मिलती है कि प्रभु अपने भक्तों के साथ रहते हैं, उनके विश्वास को मजबूत बनाते हैं, और उन कठिन परिस्थितियों में भी विश्वासयोग्यता की मिसाल बनाते हैं। कठिन समय में प्रार्थना, समुदाय के साथ संगति और पवित्र शास्त्र के प्रति अडिग रहने से हम बाहर निकलते हैं।
संक्षिप्त समापन
इसverse में प्रभु की उपस्थिति और विश्वासयोग्यों की स्थिरता एक साथ जोड़ी गई है—जहाँ शैतान का प्रभाव घना हो, वहाँ भी मसीह का मूल्यवान संरक्षण और विश्वास की प्रगति संभव रहती है। यह संदेश Samadhān और धैर्य की मांग करता है, ताकि तड़क-भड़क के बीच भी हम अपने ईश्वर-परिचय को दृढ़ रखें।
सूक्ष्म उद्धरण स्रोत (अगर उपलब्ध हों): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के चिन्तन से मिलते-जुलते संकेतों को सहज रूप से समाहित किया गया है; नीचे प्रमुख शब्दों के रूप में उनके संक्षिप्त विचार सन्नद्ध हैं:
— Matthew Henry के अनुसार: “विध्वंस की घड़ी के बीच भी ईमानदारी आस्था का प्रमाण है।”
— Albert Barnes के अनुसार: “विश्वासयोग्यता समय की परीक्षा से परे है, और यह मसीह के साथ जुड़ाव का प्रमुख संकेत है।”
— Adam Clarke के अनुसार: “युद्ध-काल में भी ईमानदारी का बुलंद रहना परमेश्वर की रक्षा की निशानी है।”