Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 3:1 प्रकाशितवाक्य 3:2 प्रकाशितवाक्य 3:3 प्रकाशितवाक्य 3:4 प्रकाशितवाक्य 3:5 प्रकाशितवाक्य 3:6 प्रकाशितवाक्य 3:7 प्रकाशितवाक्य 3:8 प्रकाशितवाक्य 3:9 प्रकाशितवाक्य 3:10 प्रकाशितवाक्य 3:11 प्रकाशितवाक्य 3:12 प्रकाशितवाक्य 3:13 प्रकाशितवाक्य 3:14 प्रकाशितवाक्य 3:15 प्रकाशितवाक्य 3:16 प्रकाशितवाक्य 3:17 प्रकाशितवाक्य 3:18 प्रकाशितवाक्य 3:19 प्रकाशितवाक्य 3:20 प्रकाशितवाक्य 3:21 प्रकाशितवाक्य 3:22



प्रकाशितवाक्यों 3:11 पर टिप्पणी
यह पवित्र वचन संत यीशु के प्रति यहूदी-ईसाई समाज की दोलायमानता और तत्कालता की चेतावनी है। शहद यही है कि जिस समुदाय के अध्यापक और सदस्य विश्वसनीयता के साथ प्रभु के आगमन के लिए जागते रहते हैं, वे उत्साह और सुरक्षा दोनों पा लेते हैं। इस वचन में प्रकटवाक्य के संदेश के तीन मुख्य भाग हैं: उसी समय बाहर निकलना और दृढ़ रहना, मुकुट की सुरक्षा का आश्वासन, और उन बाधाओं से निपटना जो विश्वासियों को गिराने के लिए प्रस्तुत होती हैं।
कथन को章 के भीतर क्या कहता है
यह वचन यीशु की शीघ्र आने के बारे में है — एक तीव्र और निश्छल चेतावनी। “जो कुछ तेरे पास है उसे थामे रह” का आशय है कि विश्वासियों को स्थिर रहना चाहिए, प्रभु की शिक्षा, विश्वास और विधान पर अडिग रहना चाहिए, जब तक वह वापस आते हैं। “कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले” इस बात की पुष्टि है कि आत्मिक सफलता को बनाए रखना एक सतत संघर्ष है, परन्तु विश्वासयोग्य रहने पर पुरस्कार मिलेगा।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षण
अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों के विचार (संक्षेप)
Matthews Henry और Adam Clarke आदि के पारंपरिक टिप्पणीकारों ने यह कहा है कि यह संदेश केवल प्रतीक्षा का नहीं, बल्कि नैतिक तैयारी का भी है — हर परिस्थिति में धैर्य और वफादारी बनाए रखना। उन्होंने उल्लेख किया कि मुकुट पृथ्वी पर नहीं, आत्मा में सुरक्षित रहता है; दृढ़ता के बिना ईश्वर का प्रतिफल नहीं मिल सकता।
क्रॉस-रेफ़रेंसेस और उनके सारूप्य
1) प्रकाशितवाक्य 2:25–28 — माँगती है कि जो कुछ है उसे धारण कर जो शस्त्र और विश्वास का प्रतीक है, उसे बनाए रखें ताकि साक्ष्यों के साथ जीत संभव हो।
2) 2 पतरस 1:12–13 — पवित्र मार्ग में दृढ़ रहने की आवश्यकता, ताकि विश्वास-व्यक्ति शुद्ध रहे और परम पिता के लिए उजाला बन सके।
3) यूहन्ना 14:3 — यीशु का आगमन निश्चित है; विश्वासियों को आशा से भरपूर रहने के लिए प्रेरित करता है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रभु की वापसी के समय हमारी आस्था और चरित्र दोनों की सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है।
व्यावहारिक आवेदन
हम क्या करें ताकि “था हुआ” मार्ग न टूटे? - प्रतिदिन सत्य-आधार पर टिके रहें: चर्चित शिक्षाओं को न केवल सुना, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में उतारें। - आत्म-निरीक्षण करें: कौन से क्षेत्रों में विश्वास कमजोर पड़ रहा है, उन्हें पहचानकर प्रार्थना और अभ्यास से मजबूत करें। - भाइयों-बहनों के साथ प्रेम और-accountability बनाए रखें ताकि दबावों में भी सत्य-सत्ता दूर न जाए।
संक्षेप
3:11 हमें याद दिलाता है कि यीशु जल्द आने वाले हैं और हमें जो कुछ भी हमारे पास है उसे स्थिर रखकर मुकुट की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। यह एक प्रेरक चेतावनी है कि विश्वास, धैर्य और वफादारी के साथ जीवन-यात्रा पूरी करें, ताकि ईश्वर के पुरस्कार से वंचित न हों।