Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 इतिहास 26:30 — यहेब्रानी अधिकारी और सेवक व्यवस्था
कथन का तात्पर्य इस प्रकार है: हेब्रूनियों में से हशब्याह और उसके भाइयों की गणना सत्रह सौ बलवान पुरुषों के रूप में की गई, जो यहोवा के सभी कामों और राजा की सेवा के विषय में योद्धाओं के समान ठहरे। वे यरदन के पश्चिम में रहने वाले इस्राएली अधिकारी थे।
इस पाठ का क्या प्रमाण है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह पद यह दिखाता है कि दायित्व और प्रशासनिक सेवा केवल सैन्य या आवश्यक कार्यों तक सीमित नहीं थी, बल्कि परमेश्वर के कामों में विविध कर्मचारियों की भागीदारी थी। हशब्याह और उनके भाई यहूदी नेतृत्व-व्यवस्था के एक ठोस भाग बने, जो परमेश्वर के पाठ को मानते हुए, प्रेरित सेवाओं और राज्य-कार्य दोनों में निरंतरता बनाए रखते थे। यह हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की योजना में धार्मिक-आत्म-सेवा और प्रशासनिक-सेवा दोनो ज़रूरी हैं; कर्तव्य-संरचना से समाज का संतुलन बढ़ता है और परमेश्वर के योजनाबद्ध कार्यों की कुशलता बढ़ती है।
मुख्य शब्दों और imagery की व्याख्या
अन्य पाठक-सम्बद्ध जगहें (cross-references) और उनका संक्षेप
- हमारे पथ पथ-निर्देशन में यह्रसभा आदि कथनों के साथ जुड़ते हैं:
स्पष्टता के लिए: (1) धार्मिक-प्रशासन के अधिकारी—यानी वे जो सेवक-समुदाय का नेतृत्व करते हैं, (2) सैनिक-समर्थन और रक्षा-कार्य, (3) राजा-सेवा—इन तीनों का संतुलन परमेश्वर के उद्देश्य की पूर्ति में आवश्यक है।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
- सामुदायिक सेवा में विविध प्रकार के गुण आवश्यक होते हैं: कुछ लोग नेतृत्व और योजना बनाते हैं, अन्य कर्मठ बचाव-कार्य या सहायता-सेवा करते हैं। एक साथ मिलकर ही समुदाय श्रेष्ठता और स्थायित्व प्राप्त कर सकता है।
- समुदाय में पश्चिम-युद्ध-सीमा के संदर्भ में यह कल्पना की जा सकती है कि भौगोलिक-सीमा पार करके भी सेवक-समुदाय परमेश्वर के काम के लिए एकजुट रहता है; योजना-विचार और किया गया कार्य दोनों का समन्वय आवश्यक है।
दो विशिष्ट उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)
यदि उपलब्ध हो, इन पवित्र-टीकाओं से सीधे उद्धरण शामिल होते: “Matthew Henry”, “Albert Barnes” या “Adam Clarke” के जो छोटे-चोटे कथन हैं, वे यहाँ उद्धृत किए जा सकते हैं, परन्तु पाठ की प्रकृति के अनुसार केवल आवश्यक और उपयुक्त चंद पंक्तियाँ ही शामिल होंगी।
इस पाठ से हमने यही समझा कि परमेश्वर के घर में हर एक सक्षम सदस्य का अपना एक स्थान है—जो बहुमुखी कर्मचारियों के साथ मिलकर यहूदियों के प्रशासन और धार्मिक-कार्य को सीधे-सीधे समर्थ बनाता है।