1 इतिहास 6:49 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु हारून और उसके पुत्र होमबलि की वेदी, और धूप की वेदी दोनों पर बलिदान चढ़ाते, और परमपवित्र स्‍थान का सब काम करते, और इस्राएलियों के लिये प्रायश्चित करते थे, जैसे कि परमेश्‍वर के दास मूसा ने आज्ञाएँ दी थीं।

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1 इतिहास 6:49 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 6:49 का संदेश

परन्तु हारून और उसके पुत्र होमबलि की वेदी, और धूप की वेदी दोनों पर बलिदान चढ़ाते, और परमपवित्र स्थान का सब काम करते, और इस्राएलियों के लिये प्रायश्चित करते थे, जैसे कि परमेश्वर के दास मूसा ने आज्ञाएँ दी थीं।

संदेश की पहली सिधी व्याख्या

यह वाक्य बताता है कि हारून और उनके पुत्र देवालय में परमप्रशस्त स्थान की देखरेख करते हुए दोनों प्रमुख वेदियों पर बलिदान और धूप चढ़ाते थे, ताकि लोगों के पाप के लिये प्रायश्चित हो सके, और यह व्यवस्था मूसा की दी हुई आज्ञाओं के अनुरूप थी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

WO:हिस्सात्मक इतिहास में यह भाग परमेश्वर के पुरातन उपदेशों के पालन की प्रक्रिया को दर्शाता है: आराधना के स्थान, वेदी, और पाप-प्रायश्चित—तीनों का समन्वय। हारून, मूसा की कड़ाई से दी गईं सेवकाई की परंपरा का हिस्सा थे। यह उल्लेख यह दर्शाता है कि आराधना के सही ढांचे के बिना प्रायश्चित संभव नहीं था।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • हारून और पुत्रों की कर्तव्य-शृंखला: उनके दायित्वों में वेदी के सामने बलिदान और धूप चढ़ाना, तथा परमपवित्र स्थान के कार्य शामिल थे—यह एक पवित्र और नियम-आधारित व्यवस्था का भाग है।
  • धूप की वेदी का महत्व: धूप प्रार्थना और आत्म-उत्साह का प्रतीक है; यह उन लोगों के पीछे भी तब किया गया जब बलिदान दिए जाते थे—यानी आकाश के साथ पृथ्वी का संबंध स्थापित करना।
  • प्रायश्चित की प्रक्रिया: यह सब इस्राएलियों के अपराध को ढकने या क्षमा करने के लिए किया गया—परिशुद्ध पवित्रता की व्यवस्था के भीतर एक संतोषजनक समारोह।

संकेतक पाठ्य-वाक्यों के भीतर of the translators

यहाँ हमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से संकलित उधृत बिंदु मिलते हैं:

— “हॉरून और उसके पुत्रों के कर्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि पवित्र स्थान में पूजा का ढाँचा कितना संरक्षित और व्यवस्थामय था।” (एतिहासिक पूजा-विधि के संदर्भ में सामान्य निष्कर्ष)

— “धूप की वेदी और बलिदान—दोनों क्रम-वार चढ़ाना—यह दिखाता है कि धार्मिक गतिविधियाँ एक दूसरे पर निर्भर हैं।”

— “प्रायश्चित की आवश्यकता ही परमेश्वर के साथ नज़दीकी बनाए रखने की प्रमुख विधि थी।”

छोटे से विषयगत सूची

  • याजक-अधिकार: आराधना के सही अधिकारी कौन और कैसे यह सुनिश्चित करते थे?
  • पवित्रता का स्थान: परमपवित्र स्थान की भूमिका और सुरक्षा के नियम।
  • प्रायश्चित का उद्देश्य: अपराध का ढांछना और पुनर्संबन्ध स्थापित करना।

अनुकूल क्रॉस-रेफरेंसेस

1) इतिहास 6:50-51 — याजकों की सेवाओं के क्रम और आराधना के नियमों का फैलना और पालन। यह दिखाता है कि कैसे एक उचित आचरण और समन्वय से प्रायश्चित की प्रक्रिया मजबूत होती है.

2) संदर्भ: गिनती 17:7-8 — पवित्र स्थान की नियमित सफाई और आराधना की शुद्धता बनाए रखने के निर्देश।

3) व्यवस्थाएं 8:15-16 — आराधक कर्मों का नियोजन और मंदिर-स्टाफ के कर्तव्य की मर्यादा।

व्यावहारिक निष्कर्ष

इन उपदेशों से सीख मिलती है कि परमेश्वर के सामने आराधना के कार्यक्रम में संरचना, पवित्रता और सही क्रम कितने महत्त्वपूर्ण हैं। धार्मिक यत्नों में नियम-पालन और प्रायश्चित के उपाय एक दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं, ताकि प्रार्थना और पूजा सच्चे हृदय के साथ उन्नत हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 6:49 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हारून वर्ष में एक बार इसके सींगों पर प्रायश्चित करे; और तुम्हारी पीढ़ी-पीढ़ी में वर्ष में एक बार प्रायश्चित के पापबलि के लहू से इस पर प्रायश्चित किया जाए; यह यहोवा के लिये परमपवित्र है।”

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“फिर वेदी को बबूल की लकड़ी की, पाँच हाथ लम्बी और पाँच हाथ चौड़ी बनवाना; वेदी चौकोर हो, और उसकी ऊँचाई तीन हाथ की हो।

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“फिर धूप जलाने के लिये बबूल की लकड़ी की वेदी बनाना।

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