Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 10:1 1 राजाओं 10:2 1 राजाओं 10:3 1 राजाओं 10:4 1 राजाओं 10:5 1 राजाओं 10:6 1 राजाओं 10:7 1 राजाओं 10:8 1 राजाओं 10:9 1 राजाओं 10:10 1 राजाओं 10:11 1 राजाओं 10:12 1 राजाओं 10:13 1 राजाओं 10:14 1 राजाओं 10:15 1 राजाओं 10:16 1 राजाओं 10:17 1 राजाओं 10:18 1 राजाओं 10:19 1 राजाओं 10:20 1 राजाओं 10:21 1 राजाओं 10:22 1 राजाओं 10:23 1 राजाओं 10:24 1 राजाओं 10:25 1 राजाओं 10:26 1 राजाओं 10:27 1 राजाओं 10:28 1 राजाओं 10:29



1 राजाओं 10:27 — संदर्भमें स्थिति और संदेश
यह पद राजा शाशन की राजधानी यरूशलेम की अत्यंत समृद्धि और भरे-पूरे धन-दौलत की तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि सत्ता और विश्व-वैभव एक ऐसे समय में में आ पहुँचे जब राजा ने अपने राज्य के धन का विशाल प्रचंड संग्रह कर लिया था, इतना कि चाँदी को पत्थर और देवदार को नीचे के देश के गूलर (गूलर पेड़) के समान बना दिया गया—यानी उसकी आमदनी और मूल्य इतनी बढ़ गई थी कि वे सामान्य वस्तुओं की तरह प्रभावशाली हो गए।
पाठ का तात्पर्य: परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
इस वाक्यांश में धन-संपत्ति, वैभव और सत्ता की अधिकता के साथ एक चेतावनी भी छुपी है: जब धन का अनुमानित मान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब प्रभु के प्रावधान पर अक्सर मनुष्य का विश्वास भूला-भटका सकता है। यह दोहरा संदेश देता है—एक ओर धन-समृद्धि का आशीर्वाद है, दूसरी ओर उसका खतरनाक प्रभाव कि व्यक्ति परमेश्वर के प्रति गौरव-निष्ठा से अलग हो सकता है। 1 राजाओं की यह पंक्ति एक सरकारी-धनिया के जीवन में भक्ति और दीनता के न होते हुए भी, ईश्वर के राज्य के मूल्य को धुँधला करती है।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
अनুসंधान-निर्देशन (Related Passages)
यहां तीन संबंधी आयतें जो धन और गर्व के प्रभाव को समझाती हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि धन-सम्पदा का उद्देश्य ईश्वर की महिमा और समाज-कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि अहंकार और निर्भरता के लिए।
पूर्व-आधार: 19वीं-शताब्दी के टिप्पणियाँ (संक्षेप)
यहाँ प्रसिद्ध स्व-अन्वेषण टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार मिलते हैं:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार यह दर्शाता है कि राजा की महिमा और धन-सम्पदा के उच्च स्तर पर भी ईश्वर के पीछे असम्बद्धता की संभावना बनी रहती है; आदम क्लार्क ने धन के असम्बद्ध प्रभाव पर बल दिया है, कि सम्पदा के साथ नैतिक और आध्यात्मिक खतरे बढ़ते हैं। अल्बर्ट बार्न्स ने भी संकेत किया है कि यह धन-सम्पदा कुल मिलाकर शासन के लिए आशीष बन सकता है यदि राजा ईश्वर-भाव के साथ चलता रहे।
इनमें से कोई भी उद्धरण पूर्ण verse के बजाय संक्षिप्त विचार के रूप में प्रस्तुत है, ताकि पाठक पाठ-के-लोक में सीधे जोड़ बना सके।
आज के जीवन में प्रायोगिक संदेश
त्वरित क्रमशः सार
यह श्लोक संकेत देता है कि इतनी व्यापक धन-सम्पदा के बावजूद वास्तविक मूल्य परमेश्वर के साथ निष्ठा है। संतोष, नैतिकता और दया—यही जीवन के स्थायित्व हैं; अन्यथा समृद्धि भी एक दिन भुलाई जा सकती है।