Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 13:1 1 राजाओं 13:2 1 राजाओं 13:3 1 राजाओं 13:4 1 राजाओं 13:5 1 राजाओं 13:6 1 राजाओं 13:7 1 राजाओं 13:8 1 राजाओं 13:9 1 राजाओं 13:10 1 राजाओं 13:11 1 राजाओं 13:12 1 राजाओं 13:13 1 राजाओं 13:14 1 राजाओं 13:15 1 राजाओं 13:16 1 राजाओं 13:17 1 राजाओं 13:18 1 राजाओं 13:19 1 राजाओं 13:20 1 राजाओं 13:21 1 राजाओं 13:22 1 राजाओं 13:23 1 राजाओं 13:24 1 राजाओं 13:25 1 राजाओं 13:26 1 राजाओं 13:27 1 राजाओं 13:28 1 राजाओं 13:29 1 राजाओं 13:30 1 राजाओं 13:31 1 राजाओं 13:32 1 राजाओं 13:33 1 राजाओं 13:34



पाठ का संक्षिप्त परिचय
1 राजाओं 13:13 में उस वृद्धा का व्यवहार वर्णित है जिसने झूठे मार्गदर्शक के शब्दों पर विश्वास कर दिये और उस पुरोहित को अपने बेटे के लिए गदहा चढ़ाने के लिए कहा। यह वाक्य उस घटना का तात्कालिक विवरण देता है जब वृद्धा ने अपने घर पर आने वाले पुरोहित के लिए गदहा तैयार करवा दिया और वह पुरोहित उस गदहे पर चढ़कर चल पड़ा। संपूर्ण प्रसंग में सत्य और असत्य, आज्ञा और अवज्ञा के बीच का तनाव दिखाई देता है।
अध्याय की रूपरेखा में पद का स्थान
यह वचन उस प्रसंग का हिस्सा है जिसमें इजरायल में भटके हुए एक भविष्यद्वक्ता (जिन्हें "पुरोहित" कहा गया है) का वर्णन है जो पहले परमेश्वर के द्वारा सुनाया गया आदेश तो सुनाता है परन्तु बाद में एक वृद्ध महिला की बात सुनकर भटक जाता है। पूरा अध्याय परमेश्वर के निर्देश के पालन और मनुष्य के प्रभाव में आने के परिणामों पर प्रकाश डालता है। यह वाक्य उस निर्णायक क्रिया को दर्शाता है जिससे पुरोहित अपने आश्रय और यात्रा में वृद्धा के साथ जुड़ जाता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस वाक्य से प्रधान शिक्षा यह है कि बाह्य आचरण—जैसे अतिथि-सत्कार और सेवा—स्वाभाविक रूप से अच्छी बातें हैं पर वे सत्य और अधिकार पर आधारित न हों तो व्यक्ति को भटकाव में डाल सकती हैं। वृद्धा ने आदर और सेवा से गदहा तैयार करवा दिया; पर प्रश्न यह है कि उसके प्रेरणास्त्रोत क्या थे, और क्या वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप थी? यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें आत्मीयता के समय भी परमेश्वर के वचन और आदेश को परम प्राथमिकता देनी चाहिए।
संबंधित शास्त्र-स्थान और तुलना
व्यावहारिक अनुप्रयोग
वर्तमान जीवन में यह पद हमें सतर्क करता है कि हम किन लोगों की सलाह पर अमल करते हैं। कुछ संकेत जिन पर ध्यान दें:
स्रोतों और क्लासिक टिप्पणी का संक्षिप्त उल्लेख
क्लासिक टिप्पणीकारों ने इस प्रसंग पर समान चिंतन किया है: वे इस घटना को आज्ञापालन तथा मानवीय प्रभावितियों के परिणामों के उदाहरण के रूप में देखते हैं। यदि कोई स्रोत उद्धृत किया जाना हो तो ध्यान रहे कि उपर्युक्त विचारकों के भावार्थ साधारणतः इसी तर्ज पर हैं।
संक्षेप
1 राजाओं 13:13 एक साधारण-सा क्रिया-वर्णन है—गदहे पर काठी बाँधना और उस पर चढ़ना—परन्तु इसका आध्यात्मिक संदेश गहरा है। यह हमें याद दिलाता है कि सेवा और आदर तब तक प्रशंसनीय हैं जब तक वे परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हों; अन्यथा वे रास्ता भटका देने वाली मानवीय प्रेरणाएँ बन सकती हैं। पाठ का व्यावहारिक निहितार्थ यह है कि परमेश्वर के वचन को सर्वोच्च स्थान दें और किसी भी मानवीय आग्रह को उसी के विरुद्ध निर्णायक मत बनने दें।