Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 13:1 1 राजाओं 13:2 1 राजाओं 13:3 1 राजाओं 13:4 1 राजाओं 13:5 1 राजाओं 13:6 1 राजाओं 13:7 1 राजाओं 13:8 1 राजाओं 13:9 1 राजाओं 13:10 1 राजाओं 13:11 1 राजाओं 13:12 1 राजाओं 13:13 1 राजाओं 13:14 1 राजाओं 13:15 1 राजाओं 13:16 1 राजाओं 13:17 1 राजाओं 13:18 1 राजाओं 13:19 1 राजाओं 13:20 1 राजाओं 13:21 1 राजाओं 13:22 1 राजाओं 13:23 1 राजाओं 13:24 1 राजाओं 13:25 1 राजाओं 13:26 1 राजाओं 13:27 1 राजाओं 13:28 1 राजाओं 13:29 1 राजाओं 13:30 1 राजाओं 13:31 1 राजाओं 13:32 1 राजाओं 13:33 1 राजाओं 13:34



1 राजाओं 13:26—Immediate setting
यह संदर्भ एक नबी के लौटते समय घटित घटना को दिखाता है। उस व्यक्ति ने जो वहां आया था, एक पथ-प्रत्यावर्तन पर चल कर गलत मार्ग चुना। उसने राजा-प्रथाओं के बजाय परमेश्वर के पास आगे बढ़ने की जगह खुद के विचार से उत्तर दिया। यह कथा एक चेतावनी है कि परमेश्वर के निर्देशों के विरुद्ध कदम उठाने से कितना महान जोखिम होता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो समझ आता है
यहह प्रदर्शित करता है कि ईश्वर अपने चुने हुए मार्ग की रक्षा करता है, और जिनके दिल में अविश्वास या स्वार्थ है, वे उसे चुनौतियों के रूप में अनुभव करते हैं। नबी ने जो सत्य कहा, वह परमेश्वर के वचन की गंभीरता पर प्रकाश डालता है: एक अस्वीकृत मार्ग एक निंदित परिणाम को जन्म दे सकता है। यह दिखाता है कि विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि विश्वास के अनुसार चलने में निहित है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य उद्धृत दार्शनिक विस्तार (पवित्र पाठ से समकित संदर्भ)
यह घटना पुराने नियम में विश्वास और आज्ञाओं के पालन की महत्ता को दोहराती है। नीचे दिए गए संदर्भों में समानार्थी महत्व के दृश्य मिलते हैं:
उद्धरण के लिए: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke में से किसी के भी स्पष्ट उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं, पर उनका संकेत इस प्रकार है—ईश्वर के वचनों के विरुद्ध निर्णय लेने पर परिणाम कठोर होते हैं और विश्वास के मोड़ पर सीधे चलना चाहिए।
वर्तमान काल के लिए अनुप्रयोग
कथन-सार
यहाकविता एक स्पष्ट पाठ है: परमेश्वर के वचनों के विरुद्ध कदम उठाने पर परिणामस्वरूप विनाश हो सकता है। विश्वास का आधार है- ईश्वर की योजना के अनुरूप चलना, न कि अपने-अपने मन पसंद मार्ग अपनाना।