Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 18:1 1 राजाओं 18:2 1 राजाओं 18:3 1 राजाओं 18:4 1 राजाओं 18:5 1 राजाओं 18:6 1 राजाओं 18:7 1 राजाओं 18:8 1 राजाओं 18:9 1 राजाओं 18:10 1 राजाओं 18:11 1 राजाओं 18:12 1 राजाओं 18:13 1 राजाओं 18:14 1 राजाओं 18:15 1 राजाओं 18:16 1 राजाओं 18:17 1 राजाओं 18:18 1 राजाओं 18:19 1 राजाओं 18:20 1 राजाओं 18:21 1 राजाओं 18:22 1 राजाओं 18:23 1 राजाओं 18:24 1 राजाओं 18:25 1 राजाओं 18:26 1 राजाओं 18:27 1 राजाओं 18:28 1 राजाओं 18:29 1 राजाओं 18:30 1 राजाओं 18:31 1 राजाओं 18:32 1 राजाओं 18:33 1 राजाओं 18:34 1 राजाओं 18:35 1 राजाओं 18:36 1 राजाओं 18:37 1 राजाओं 18:38 1 राजाओं 18:39 1 राजाओं 18:40 1 राजाओं 18:41 1 राजाओं 18:42 1 राजाओं 18:43 1 राजाओं 18:44 1 राजाओं 18:45 1 राजाओं 18:46



1 राजा 18:27 पर टिप्पणी: एलिय्याह का उपहास और उद्धारकर्ताओं की आवाज़
यह पद प्रकट करता है कि सत्य ईश्वर के विरुद्ध निंदा या उपहास किस प्रकार पापपूर्ण और निरर्थक है। एलिय्याह के उद्धृत शब्द “ऊँचे शब्द से पुकारो, वह तो देवता है” आसन्न परीक्षण के बीच न सिर्फ असफल देव-उपासकों की बौखलाहट दिखाते हैं, बल्कि ईश्वर के प्रति हास्यास्पद संदेह का तात्त्विक विवेचन भी प्रस्तुत करते हैं। यहां यह स्पष्ट है कि मानव के दिमाग़ से बना तर्क भी ईश्वर के वास्तविक अस्तित्व को नहीं चुनौती दे सकता; केवल ईश्वर की शास्त्रानुमोदित उपस्थिति ही सामान्यता के विपरीत परख को सच्चाई में बदलती है।
पार्श्वभूमि व मूल संदर्भ
यह घटना बताती है कि प्रतापी नबियों के मंच पर ब도-जाहिरा रूप से छिपे असत्य के विरुद्ध परमेश्वर कहाँ खड़े होते हैं। एलिय्याह ने जलप्रलय के प्रमाणों के बाद भी असमतुल धार्मिक प्रथाओं को उखाड़ फेंकने का साहस दिखाया। उसी समय पत्नी-यातना के बीच, तेलियों के मंदिर पुनः स्थापित करने के लिए संघर्ष चलता रहा। इस पंक्ति में एलियाह अपने विरोधियों के दावों पर कटाक्ष करते हैं और परमेश्वर के वास्तविक अस्तित्व को चुनौती देने वालों को सावधान करते हैं।
मुख्य संदेश
— परमेश्वर वह है जिसे अपमानित करने के प्रयास पर भी रहस्यमय रूप से निर्बल नहीं माना जा सकता; वह कहाँ है, यह खोजनें के लिए किसी “उच्च आवाज़” या प्रतीक्षा की आवश्यकता नहीं है। बल्कि इस उपहास से भी ईश्वर की शक्तिशाली उपस्थिति और क्रिया स्पष्ट होती है।
थीम्स और तेहमें
क्रॉस-रेफरेंसेस (संविधान)
यही विचारधारा दूसरे स्थानों पर भी मिलती है:
इन संदर्भों से दिखता है कि परमेश्वर की महिमा प्रकृतिक रूप से ज्ञात है, और इंसानी धारणाएँ उसे कभी-भी पूरी तरह पीछे नहीं डाल सकतीं।
एज्यूमे (हिंदी टिप्पणी से निष्कर्ष) और आदरणीय विचार
1 राजा 18:27 में एलिय्याह का तंज एक धार्मिक-समय में कठोर पथ पर चलकर भी एक गहरी Wahrheit उजागर करता है: ईश्वर के बारे में हमारी समझ उसे समझने के तरीकों से बड़ी नहीं हो सकती। जो लोग देव-त्व को केवल प्रतीक या आचरण के तौर पर देखते हैं, वे वास्तविक क्रिया-प्रभाव को भूला देते हैं। इस verse में प्रेरणा है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं और उनके साथ प्रार्थना, आस्था और सच्चे उपासना में ही जीवन का उद्धार निहित है।
मैथ्यू हेन्री के विचारों के अनुसार, यह दृश्य उनकी शक्तिशाली वायथियों के साथ-साथ मनोरंजक तंज के भीतर भी परमेश्वर की परिभाषित उपस्थिति को दर्शाता है; अल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क भी इस प्रत्यक्ष असत्य के खिलाफ सत्य की ठोस परिकल्पना को दृढ़ करने में सहमत दिखते हैं: ईश्वर की वास्तविकता को जाने बिना उपहास के बावजूद उसे नहीं बदलना चाहिए।
व्यावहारिकDEVotional विचार
हमारी दिनचर्या में कभी-कभी हम भी “उच्च शब्द” से ईश्वर का प्रमाण खोजने का प्रयास करते हैं—परन्तु ईश्वर की वास्तविक उपस्थिति वह है जोजीवनांतरण कर देती है, जब हम सचमुच उसकी कृपा और मार्गदर्शन में जीते हैं। इस पाठ से प्रेरणा ले कर प्रतिदिन परमेश्वर पर निर्भर रहिए, भय-रहित प्रार्थना में आस्था बनाए रखें और संसार के उपहास के बावजूद सत्य की ओर स्थिर रहें।
कथन का सार: ईश्वर जीवित है; उसे खोजने के लिए ऊपर से किसी ध्वनि की आवश्यकता नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण की सच्ची प्रार्थना चाहिए।