Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 19:1 1 राजाओं 19:2 1 राजाओं 19:3 1 राजाओं 19:4 1 राजाओं 19:5 1 राजाओं 19:6 1 राजाओं 19:7 1 राजाओं 19:8 1 राजाओं 19:9 1 राजाओं 19:10 1 राजाओं 19:11 1 राजाओं 19:12 1 राजाओं 19:13 1 राजाओं 19:14 1 राजाओं 19:15 1 राजाओं 19:16 1 राजाओं 19:17 1 राजाओं 19:18 1 राजाओं 19:19 1 राजाओं 19:20 1 राजाओं 19:21



1 राजाओं 19:3 — पवित्र संदर्भ का परिचय
यह पाठ एलिय्याह के भयावह भागने की स्थिति दिखाता है। भय, थकान और विरोध की गहरी परिस्थिति में एलिय्याह ने अपने प्राण की परवाह करते हुए देश सेवक को छोड़कर पीछे हटना चुना। यह घटनाक्रम बुरे दौर में विश्वास की चुनौती और प्रकटीकरण का एक संकेत है: परमेश्वर के कार्यस्थलों पर भी मानवीय कमजोरी आ सकती है, परन्तु ईश्वर की योजना समाप्त नहीं होती।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से क्या निकलता है
यह verse दिखाता है कि परमेश्वर के सेवक भी शक्तिशाली अनुभवों के बीच मनःस्थिति से जूझते हैं। एलिय्याह ने शत्रुओं से भयभीत होकर भागना चुना, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में उसकी सेवा का मूल्य अद्वितीय है। ईश्वर तुरंत सहायता के लिए आगे बढ़ता है, भय के बीच भी सहायता की योजना बनाता है और उसकी हार मानकर नहीं बल्कि नई दिशा दिखाकर प्रेरित करता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
इन व्याख्याओं में परमेश्वर की करुणा और निर्देशन का संकेत है— भय के बावजूद वह अपने चुने हुए को न छोड़ता है, बल्कि मार्ग दिखाने के लिए निकट आता है।
Related passages (संक्षेप में संदर्भन)
• और भीाय में भागना और फिर परमेश्वर के बुलावे का पुनः मानना — इस प्रकार की पूर्वकथाओं में ईश्वर की कृपा और नया उद्देश्य स्पष्ट होता है।
• ईसा के समय भी शिष्यों के डर और धैर्य की परीक्षा — संकट के बीच विश्वास की पुनःस्थापना की आवश्यकता पर बल देता है।
• पुराने नियम में परमेश्वर के नये पथ पर ले जाने के मार्गदर्शन की प्राकृतिक प्रक्रियाएं— जैसे थकान पर ईश्वर की राहत और निर्देश मिलना।
क्या कहती है सामयिक उपयोगिता
आज के संदर्भ में यह पाठ यह सीख देता है कि असफलताओं के समय भी ईश्वर हमारे साथ है। जब हम भय, थकान या निराशा में हों, तो ध्यान से सुनें: ईश्वर हमसे बात करते हैं, प्रार्थना और धैर्य के साथ मार्ग बनाते हैं। अपनी कमजोरियों को मानना और सहयोगी समर्थनों को स्वीकारना भी प्रभु की कड़ी योजना का हिस्सा है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (ऐतिहासिक टिप्पणियाँ)
यहाँ हम सार्वजनिक-डायरोन एतिहासिक टिप्पणीकारों के विशिष्ट शब्दों को संक्षेप में मिलाते हैं, ताकि समझ में गहराई आये:
Matthew Henry (summary): यह घटना यह दर्शाती है कि परमेश्वर कैसे अपने चुने हुओं को पुरानी गलतियों के बावजूद प्रेरित करता है और उनके लिए नया कार्य निर्धारित करता है।
Albert Barnes (summary): भय के समय भी परमेश्वर अधिकारी प्रभाव डालते हैं और शर्तों को तोड़कर भी उद्धार का मार्ग खोलते हैं।
Adam Clarke (summary): एलिय्याह की मानसिक अवस्था को समझते हुए Clarke बताते हैं कि भगवन्तक के साथ चलना ही सच्चा विश्वास है—अपनी कमजोरी के बावजूद परमेश्वर की सहायता आती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनका अर्थ
• जलोपन के समय इलाही उद्धार: भय के बीच परमेश्वर की उपस्थिति दिखती है।
• प्रेरितों के डर के क्षण: ईश्वर पुनः बुलावा देकर साहस देता है।
• थकान और यात्रा के बीच आशीर्वचन: विश्वास में धैर्य और मार्गदर्शन आवश्यक है।
संक्षेप में, 1 राजाओं 19:3 हमें सिखाता है कि भय और थकान में भी ईश्वर की योजना चलती है। हमारी कमजोरी उसे दिखाती है कि वह कैसे हमारे लिए दिशा-निर्देशन देता है और अगला कदम उठाने का साहस देता है।