Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 22:1 1 राजाओं 22:2 1 राजाओं 22:3 1 राजाओं 22:4 1 राजाओं 22:5 1 राजाओं 22:6 1 राजाओं 22:7 1 राजाओं 22:8 1 राजाओं 22:9 1 राजाओं 22:10 1 राजाओं 22:11 1 राजाओं 22:12 1 राजाओं 22:13 1 राजाओं 22:14 1 राजाओं 22:15 1 राजाओं 22:16 1 राजाओं 22:17 1 राजाओं 22:18 1 राजाओं 22:19 1 राजाओं 22:20 1 राजाओं 22:21 1 राजाओं 22:22 1 राजाओं 22:23 1 राजाओं 22:24 1 राजाओं 22:25 1 राजाओं 22:26 1 राजाओं 22:27 1 राजाओं 22:28 1 राजाओं 22:29 1 राजाओं 22:30 1 राजाओं 22:31 1 राजाओं 22:32 1 राजाओं 22:33 1 राजाओं 22:34 1 राजाओं 22:35 1 राजाओं 22:36 1 राजाओं 22:37 1 राजाओं 22:38 1 राजाओं 22:39 1 राजाओं 22:40 1 राजाओं 22:41 1 राजाओं 22:42 1 राजाओं 22:43 1 राजाओं 22:44 1 राजाओं 22:45 1 राजाओं 22:46 1 राजाओं 22:47 1 राजाओं 22:48 1 राजाओं 22:49 1 राजाओं 22:50 1 राजाओं 22:51 1 राजाओं 22:52 1 राजाओं 22:53



1 राजाओं 22:31 — संदर्भित सेटिंग और उसका अर्थ
यह पद एक क़रीबी युद्ध-जहाज़ के भीतर का दृश्य प्रस्तुत करता है जब अराम के राजा की सेनाएँ इज़राइल के विरुद्ध चारों ओर से घेरकर लड़ाई के लिए आगे बढ़ती हैं। यह संदर्भ बताता है कि युद्ध से पहले नीयतें कैसे तय की जाती हैं, और कैसे तात्कालिक निर्णय बड़े राजनीतिक परिणाम दे सकते हैं। इस verse के समय इज़राइल के राजा यीशू-अनुवर्ती (यही सूचित नहीं है; प्रकरण में आमतौर पर यह राजा आहाब का पुत्र मतरह) नहीं होता, बल्कि अराम के राजा एक खुले संकेत के साथ युद्ध कर रहा है: "न तो छोटे से लड़ो और न बड़े से, केवल इस्राएल के राजा से युद्ध करो"। इस आदेश से स्पष्ट होता है कि अरब आक्रमणकारियों की रणनीति नियंत्रण के इरादे में है, परन्तु परमेश्वर के कार्य-हमाम में इतिहास के निर्णय ऐसे हैं जिनमें ईश्वर की अनुमति और पाप की जड़ें एक साथ चलते हैं।
ईश्वर की नियंत्रण और विश्वास की तस्वीर
यहाँ ईश्वर सीधे शब्दों में नहीं दिखते, परन्तु कथा में परमेश्वर की व्यवस्थात्मक प्रभुता साफ़ झलकती है। राजा आरंभिक बहाव में अपने कदम उठाते हैं—परन्तु परमेश्वर बड़े घटनाक्रम को नियंत्रित कर रहा होता है, ताकि दया, न्याय या चुकौती के उच्च उद्देश्य पूरे हो सकें। यह पाठ स्मरण कराता है कि विश्वास में मनुष्य की योजना चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परमेश्वर की योजना सर्वदा सर्वोपरि रहती है।
मुख्य शब्दों व छवि-समझ
संबद्ध पाठ
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आज के लिए आवेदन
हमारे भीतर की आशा यह है कि कठिन परिस्थितियाँ भी परमेश्वर की पूर्ण योजना के भाग होंगी। संघर्ष के समय एकाग्रता बनाएं रखें, क्योंकि परमेश्वर की योजना कभी भी चूक नहीं होती। यदि आप ऐसी स्थिति में हों जिसमें विरोधी शक्तियाँ बड़े विकल्प थोप दें, तब भी स्मरण रखें कि ईश्वर का मार्ग सत्य, न्याय और कृपा की दिशा में है।
क्रॉस-रेफरंस (संक्षेप निष्कर्ष)
1) अन्य अनुकूल संदर्भ जहाँ परमेश्वर की योजना मानव योजना से परे होती है। 2) नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों के समय में विश्वास की भूमिका का उल्लेख। 3) प्रायः धर्मिक-विधर्म के समय ईश्वर की चिताओं और नियंत्रण की भूमिका पर विचार।
उद्धृत उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध होंगे):
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संक्षिप्त संदर्भ-नोट: यह टिप्पणी पवित्रशास्त्र के पाठ के सरल प्रवाह के साथ एक संतुलित, व्यवहारिक व्याख्या प्रस्तुत करती है, ताकि पाठक अपने वर्तमान जीवन-स्थिति में विश्वास की गहराई महसूस कर सकें।