1 राजाओं 22:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर यहोशापात ने इस्राएल के राजा से कहा, “आज यहोवा की इच्छा मालूम कर ले।”

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1 राजाओं 22:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

आपके पास 1 राजाों 22:5 का अभिधेय - यहोशापन की यहोवा की इच्छा पूछना

यह खण्ड यहोशापात और राजा यरूशलेम के बीच के संदर्भ में आता है, जहां यहोशापात ने इज़राइल के राजा से कहकर यह अनुरोध किया कि “आज यहोवा की इच्छा मालूम कर ले।” यह छोटी किन्तु गहरे गुमानित पुष्टि की भूमिका है कि धार्मिक और राष्ट्रीय निर्णयों में परमेश्वर की इच्छा पहले जानी जाए। इस पंक्ति में धार्मिक discernment, निष्ठा और राजनीतिक चालबाज़ी के बीच संतुलन का संकेत मिलता है।

पंक्ति-विवेचन (इस अध्याय में इसकी जगह)

1 राजाों 22 अध्याय में अभिषिक्त राजा योशापात और यहोवा के धर्मी–परामर्शदाता (यहोवा के दूत) के बीच की बातचीत पर केंद्रित है: जो राजा दोनो तरफ एक व्यापक युद्ध-नीति बनाते हैं। इस verse में योशापात स्पष्ट रूप से कहता है कि यहोवा की इच्छा जानी जाए—यानी सैनिक निर्णय लेने से पहले परमेश्वर के सुझाव और मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

- परमेश्वर की इच्छा पूछना: यहोशापात का सुझाव एक धार्मिक नेता के लिए एक मजबूत नमूना है—जब बाहरी दबाव और नीतिगत चक्रव्यूह हों, तब भी ईश्वर की इच्छा की खोज करना चाहिए। यह दर्शाता है कि विश्वासी नेता नीति बनाते समय प्रार्थना, नेतृत्व-निर्देशन और पवित्र लेखना के साथ संतुलन बनाते हैं।

संबद्ध बाइबिल संकेत (क्रॉस-रेफरंस)

  • यातना-नियोजन और परमेश्वर की योजना की खोज—नीतिवचनों 3:5-6: विश्वास पर निर्भर रहो, परमेश्वर ही मार्ग दिखाते हैं।
  • यहोवा से पूछना बनाम अपने ही विचारों पर टिकना—यशायाह 30:1-2 के संदर्भ में यह चेतावनी कि स्वार्थी विचारों से मार्ग न लें।
  • धर्मी निर्णय में सामुदायिक परीक्षा—नए नियम 6:7 की याद दिलाती है कि विचार और मार्ग बच्चों तक पहुँचे और घर-परिवार में चर्चा हो।

संक्षेप में, यह verse यह दिखाता है कि नीति-निर्माण में सर्वोच्च निर्णायकता परमेश्वर की इच्छा जानना है, न कि सिर्फ राजा की शक्ति या राजनीतिक चालों का परिणाम।

मुख्य शिक्षण (सीखने योग्य निष्कर्ष)

- एक नेता को संकट के समय भी यह पूछना चाहिए कि परमेश्वर क्या कहता है।
- समुदाय के साथ सत्य और विनम्रता के साथ निर्णय साझा करें ताकि विश्वासियों का विश्वास सुरक्षित रहे।

गूढ़ स्पर्श: प्रभाव और अनुप्रयोग

आज के संदर्भ में यहाकर्ताओं के लिए यह एक चेतावनी है कि तकनीकी सफलताओं के पीछे भी परमेश्वर की योजना को न भूलें। निर्णय लेने से पहले मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक परख आवश्यक है, ताकि परिणाम में ईश्वर की महिमा बढ़े और समुदाय का कल्याण हो।

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 राजाओं 22:5 में योशापात का आग्रह दर्शाता है कि यहोवा की इच्छा खोजना नीति-निर्माण की पहली और आवश्यक चेकलिस्ट है। यह श्रद्धेय विवेक की मिसाल है कि सत्ता और पराक्रम से पहले ईश्वर की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से हल्के रूप में): यदि उपलब्ध हों तो केवल ठीक-ठीक संक्षेप में वे उद्धरण सामान्य समझ के लिए प्रयुक्त होंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 राजाओं 22:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर यहोशापात ने इस्राएल के राजा से कहा, “आओ, पहले यहोवा का वचन मालूम करें।”

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नीतिवचन 3:5 (HINIRV) »
तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना*।

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2 राजाओं 3:11 (HINIRV) »
परन्तु यहोशापात ने कहा, “क्या यहाँ यहोवा का कोई नबी नहीं है*, जिसके द्वारा हम यहोवा से पूछें?” इस्राएल के राजा के किसी कर्मचारी ने उत्तर देकर कहा, “हाँ, शापात का पुत्र एलीशा जो एलिय्याह के हाथों को धुलाया करता था वह तो यहाँ है।”

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