Old Testament
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1 थिस्सलुनीकियों 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और हे भाइयों, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानते हैं, कि तुम चुने हुए हो। (इफि. 1:4)
1 थिस्सलुनीकियों 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 थिस्सलुनीकियों 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 थिस्सलुनीकियों 2:13 (HINIRV) »
पर हे भाइयों, और प्रभु के प्रिय लोगों चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्र बनकर, और सत्य पर विश्वास करके उद्धार पाओ। (इफि. 1:4-5, 1 पत. 1:1-5, व्य. 33:12)

रोमियों 9:25 (HINIRV) »
जैसा वह होशे की पुस्तक में भी कहता है, “जो मेरी प्रजा न थी, उन्हें मैं अपनी प्रजा कहूँगा, और जो प्रिया न थी, उसे प्रिया कहूँगा; (होशे 2:23)

1 थिस्सलुनीकियों 1:4 का अर्थ
सरल शब्दों में यह वचन कहता है: परमेश्वर ने विशेष प्रत्याचार से तुम्हें चुना है; इसलिए तुम उसकी प्रिय बनकर बसे हो। यह उद्धार का ठोस आधार है—पहचान में सुरक्षा और आस्था की गारंटी।
संदर्भ पीछे की पृष्ठभूमि
पत्र 1 थिस्सलुनीकियों की प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनिकियों के साथ भेजा, जब वे मसीही जीवन की नई राह पर चल रहे थे और अत्याचारों के बीच भी परमेश्वर के बारे में साक्ष्य दे रहे थे। इस पद में ‘चुने हुए’ का शब्द चयन यह संकेत देता है कि ईश्वर की योजना पहले से है और विश्वासियों की पहचान उसी योजना का भाग है। प्रभु उसी के लिए अन्यान्य रूप से बुलाते हैं जो उनके दिव्य उद्देश्य के मुताबिक प्रत्याशित हैं।
व्यवहारिक अनुभाग: शब्द-सार के Beobachtungen
• चुना जाना एक परमेश्वर की चुनाव-व्यवस्था को दर्शाता है, न कि मानवUFACT में आत्म-गणना से। यह प्रेरित-उत्साह के साथ लगाव और सुरक्षा देता है कि हमारे उद्धार का स्रोत परमेश्वर है, न कि हमारी कोशिशें।
• यह वचन इशारा करता है कि हमारे चयन से पहले परमेश्वर ने हमें प्रेम किया और उसे जानने की राह में स्थापित किया।
• इसका आशय समुदाय के प्रति एक सुरक्षित पहचान है—ऐसे लोग जो प्रभु की ओर से चुने गए हैं, वे उनके नाम से पहचाने जाते हैं और उनके आशीर्वाद में भागीदारी पाते हैं।
होनहार विषय: संक्षिप्त विचार
संबंधित ग्रंथ-वचनों के संकेत
• इफिसियों 1:4 में उसी विचार का संकल्प मिलता है—परेनशील चुनाव की योजना पहले से।
• रोमियों 8:29-30—परमेश्वर की चुनी हुई प्रजाति के लिए उद्धार की चेन कैसे चलती है, यह स्पष्ट करती है कि वह आरंभ से निश्चय कर चुका है कि वे उसकी प्रतिमा बनें।
• याकूब 2:5—विश्वास के साथ कार्य की पुष्टि में चुने हुए का जीवनव्यवहार दिखता है।
पाठ से एक छोटे निष्कर्ष
हम कौन हैं, यह सबसे पहले परमेश्वर की प्रेम-योजना से तय होता है; हमारे चुनाव का स्रोत मानव योग्यता नहीं, बल्कि God's स्वरूप-संवर्धन है। इससे हमें जीवन भर नम्रता, आस्था और आशीषों के प्रति आभार सिखाया जाता है।
व्यावहारिक takeaway
जब आप आकर्षण, भाग्य, या उपलब्धियों के आधार पर अपना मूल्य न बनाएं, बल्कि परमेश्वर के चुने हुए ठहराव पर टिके रहें; विश्वास में निरंतर प्रगति और समुदाय के बीच सेवा-समर्पण को बढ़ावा दें।
एस्केप-वाक्यों के उद्धरण (संक्षेप)
यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-घोषित टिप्पणियों से टोन के अनुसार समाहित की गई है। नीचे दी गई सूक्ष्म-रेखा उनके विचारों के सार को समाहित करती है: “चयन परमेश्वर के प्रेमपूर्ण उद्देश्य का परिणाम है, आत्म-आत्मविश्वास नहीं।” (नोट: पूर्ण वाक्य उद्धरण नीचे नहीं दिए गए, केवल विचार-सार दिया गया है।)
क्रॉस-रेफरेंस (छोटे सार): इफिसियंस 1:4; रोमियों 8:29-30; याकूब 2:5