Old Testament
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1 थिस्सलुनीकियों 1:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अपने परमेश्वर और पिता के सामने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं।
1 थिस्सलुनीकियों 1:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 थिस्सलुनीकियों 1:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 13:13 (HINIRV) »
पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थायी* है, पर इनमें सबसे बड़ा प्रेम है।

प्रकाशितवाक्य 2:19 (HINIRV) »
मैं तेरे कामों, और प्रेम, और विश्वास, और सेवा, और धीरज को जानता हूँ, और यह भी कि तेरे पिछले काम पहले से बढ़कर हैं।

गलातियों 5:6 (HINIRV) »
और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारहित कुछ काम का है, परन्तु केवल विश्वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।
1 थिस्सलुनीकियों 1:3 — संदर्भ और सार
पाठ का यह भाग प्रेरित–जोश के साथ परमेश्वर के सामने खड़े रहने की स्मरणहीनता नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और आशा की गतिमान जीवनगत गुणवत्ता की स्मृति कराता है। प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनीका के विश्वासियों के लिए उनकी वास्तविक स्थितियों को उभार कर दिखाया कि उन्होंने न केवल आशीष पाए, बल्कि उनके व्यवहार भी दूसरों के नज़र में परमेश्वर के राज्य की पुष्टि बन गए। यहाँ स्मरण दो बातें उजागर करती है: परमेश्वर के सामने उनकी दृढ़ आस्था और समुदाय के भीतर प्रेम का परिश्रम, तथा यीशु मसीह में आशा की धीरता जो कठिन समय में भी बनाए रखते हैं।
मुख्य अर्थ
इस verse में तीन गतिशील तत्व एक साथ चर्चित हैं: विश्वास के काम, प्रेम का परिश्रम, और आशा की धीरता। एक साथ आने पर ये दिखाते हैं कि आतंकित या रोमांचित धार्मिक भावना नहीं, बल्कि ठोस जीवन-कामित रूप से ईसानुसंधान का परिणाम है। उन्हें परमेश्वर पिता के सामने लगातार स्मरण करना यह दर्शाता है कि असली विश्वसनीयता मात्र शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में और धैर्य में है, जो यीशु मसीह में उनकी आशा से उत्पन्न होती है।
दो–तीन प्रमुख विषय
जोड़ने वाले साहित्यिक संदर्भ
इस आयत से मिलते-जुलते विचार बार-बार पुराने प्रमाणों में उभरते हैं: पौलुस का संदेश कि आस्था एक कर्म है; प्रेम जो सेवाकार्यों में प्रकट होता है; और आशा जो कठिन समय में स्थिर बनी रहती है। साथ ही, फसीलियों 3:14–21 की तरह धैर्य और निवेदन भी प्रेरित करता है कि प्रभु के प्रेम को अनुभव कर के ही आंतरिक परिवर्तन संभव है। कोरिन्थियों 13 और रोमियों 5 भी प्रेरणादायक रूप से प्रेम, विश्वास, और आशा के एक अस्थिर संसार के बीच स्थिर रहने की शिक्षा देते हैं।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
आज के पाठक के लिए यह verse एक चैलेंज है: क्या आपका विश्वास अपने कदमों में है? क्या आपकी प्रेम–सेवा सचमुच समुदाय के लिए है, न कि केवल शब्दों में? और कठिन समय में क्या आप यीशु में अपनी आशा को बनाए रखते हैं? छोटे-छोटे अभ्यास—एक दूसरे के लिए मदद का हाथ बढ़ाना, विश्वास के कारणों को बदले नहीं, बल्कि उनके परिणाम दिखाना, और कठिन समय में भी ईश्वर की योजनाओं पर भरोसा रखना—ये सभी इसे व्यवहारिक बनाते हैं।
क्रॉस–रेफरेंसेज (संकेत मात्र)
- रोम 5:1–5: आत्म-निष्ठ विश्वास, प्रेम-चक्र और आशा की धीरता का सिद्धांत।
- लूका 10:27–28: प्रेम के सार को स्पष्ट करने वाला सामंजस्यपूर्ण दिव्य आदेश।
- जेम्स 2:14–26: विश्वास के कार्यों के अवयवों पर जोर, ताकि आस्था जीवित दिखाई दे।
नोट: उपरोक्त प्रविष्टियाँ संकल्पनात्मक संकेत हैं; पूर्ण पद्य उद्धरण नहीं दिए गए हैं।
संक्षिप्त समापन
1 थिस्सलुनीकियों 1:3 हमें बताता है कि असली ख्वाहिश एक पूर्ण-जीवन है जिसमें विश्वास के कर्म, प्रेम के परिश्रम, और आशा की धीरता—ये तीनों एक साथ चलें। यह समुदाय के भीतर एक ठोस, स्थायी प्रभाव पैदा करता है और यह बताता है कि ईश्वर के राज्य के लिए हमारी यात्राक्रम कैसे दिखना चाहिए।
सूचनात्मक नोट
यदि आप इस पद के पारंपरिक स्रोतों के भीतर विशिष्ट उद्धरणों की खोज करते हैं, तो मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के commentaires से संकलित पारंपरिक धाराओं के प्रेरक बिंदु मिलते हैं, जो कर्म-आस्था-प्रेम-आशा के संयोजन को स्पष्ट करते हैं।