Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 11:1 2 इतिहास 11:2 2 इतिहास 11:3 2 इतिहास 11:4 2 इतिहास 11:5 2 इतिहास 11:6 2 इतिहास 11:7 2 इतिहास 11:8 2 इतिहास 11:9 2 इतिहास 11:10 2 इतिहास 11:11 2 इतिहास 11:12 2 इतिहास 11:13 2 इतिहास 11:14 2 इतिहास 11:15 2 इतिहास 11:16 2 इतिहास 11:17 2 इतिहास 11:18 2 इतिहास 11:19 2 इतिहास 11:20 2 इतिहास 11:21 2 इतिहास 11:22 2 इतिहास 11:23



आइमै सेटिंग और पाठ का संदर्भ
2 इतिहास 11:4 का यह कथन शेष इज़राइल में יהוה के द्वारा निर्देशित एक प्रत्यक्ष दिव्य क्रिया को दर्शाता है। राजाओं के इतिहास के इस खंड में यारोबाम के राज्यकाल के बीच, यहोवा अपने लोगों के लिए सुरक्षा की दिशा और युद्ध के नियम स्पष्ट कर रहा है। इस वचन में यहोवा कहता है कि वे अपने भाइयों पर चढ़ाई न करें; लौट जाएँ, क्योंकि यह सब मेरी ओर से हुआ है।
पाठ का मुख्य संदेश: परमेश्वर का निर्देश और विश्वास
इस वचन में परमेश्वर अपने योजनाबद्ध उद्देश्य के अनुरूप कर्तव्य निभाने के लिए लोगों को निर्देश देता है। वे कहते हैं कि यह बात मेरी ओर से है, जिसका मतलब है कि युद्ध के परिणाम और घटनाओं की दिशा परमेश्वर की संकल्पना से निर्देशित है, न मानवीय अहंकार या चालाक योजना से। इसलिए युद्ध-योजनाओं में साहस के साथ-साथ परमेश्वर की हिदायत को मानना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण शब्दों और रूपकों की स्पष्टता
अन्य संदर्भ और उनके अर्थ को समझना
1) नम्रता और निर्देश: यह पाठ दिखाता है कि जब परमेश्वर चेतावनी देता है, तो यह मानवीय निर्णयों के ऊपर है।
2) सुरक्षा की चिंता: यह तारण और सुरक्षा के लिए परमेश्वर की रक्षा-योजना का भाग है; भय के बजाय विश्वास की सुरक्षा—युद्ध में संयम।
3) सामुदायिक एकता बनाये रखना: भाइयों के बीच चढ़ाई से समुदाय-विरोध बढ़ सकता है; इसलिए विभाजन से बचना चाहिए।
कुरान-संबंधी क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भित लेकिन संकुचित पाठ नहीं)
– एक दूसरे के प्रति प्रेम और एकता को प्राथमिकता देने के लिए अन्य इतिहास-ग्रंथों में भी ऐसे निर्देश मिलते हैं कि परमेश्वर की योजना के अनुसार कदम उठाने चाहिए।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
- नेतृत्व करते समय परमेश्वर की दिशा-निर्देश का सम्मान करें; यदि कोई निर्णय संघर्ष को बढ़ाता हो और रिश्तों को चोट पहुँचाता हो, तो सुरक्षित दूरी या प्रत्यक्ष संघर्ष से बचना उचित है।
- कठिन समय में भी भरोसा करें कि परमेश्वर का नियंत्रण है; परिणाम वही तय करेगा जो उसकी योजना में है।
संक्षिप्त सार
यह कविता हमें बताती है कि प्रभु अपनी सुरक्षा-योजना के अनुसार काम करते हैं। युद्ध या संघर्ष के निर्णय में अपने भाइयों के विरुद्ध नहीं, बल्कि परमेश्वर के निर्देश के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। यह विश्वास और विवेक के संतुलन का संदेश है।
संकेतित उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)
उद्धृत पूर्व-प्रकाशनों के अनुसार, यह वचन परमेश्वर की संप्रभुता और युद्ध-निर्णयों में मानव अहंकार के विरुद्ध सावधानी की आवश्यकता को दर्शाता है।