Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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प्रमुख व्याख्या
यह पहले से स्पष्ट है कि परमेश्वर के निर्देश के अनुसार राजा ने गिलाद के रामोत पर आक्रमण करने का प्रस्ताव स्वीकार किया। चार सौ नबियों की सलाह इस बात की पुष्टि कर रही है कि युद्ध परमेश्वर के स्वीकृति से ही होना चाहिए था, ताकि परिणाम परमेश्वर के हाथ में रहें। यहाँ यह दिखता है कि ज्ञान और नज़रिए की संगति में कदम उठाने से पहले परमेश्वर की इच्छा को जानना कितना आवश्यक है।
लेखन-संदर्भ ( literary context )
2 इतिहास 18 में राजा अज़हिया के समय इस्राएल के राजा यहोशापत (यशायाह काल के साथ संयोजन से) ने चार सौ नबियों को इकट्ठा करके पूछा कि युद्ध किस दिशा में होगा। नबियों ने स्पष्ट कहा कि चढ़ाई करें, क्योंकि परमेश्वर उनको राजा के हाथ करेगा। यह समय-चरित में दर्शाया गया है कि नीतिगत निर्णय एक ही परमेश्वर के उद्घोष से संरेखित होना चाहिए और मानव सामर्थ्य बनाम परमेश्वर की योजना के बीच स्पष्ट फर्क बना रहता है।
तकनीकी-गीराई: theological significance
1) परमेश्वर की पुष्टि के बिना निर्णय करना अक्सर जोखिमभरा होता है; 2) नबियों की एकमत सलाह में भी यह देखा गया कि परमेश्वर के पथ पर चलना चाहिए, क्योंकि उसका आशीर्वाद निर्णय-निर्माण को पुनर्स्थापित करता है; 3) राजा की निर्भरता परमेश्वर के बिना निजी साहस या दबाव के कारण खतरनाक हो सकती थी, पर यहाँ परमेश्वर की योजना स्पष्ट रूप से निर्णायक बनती है।
पवित्रशास्त्रीय तारतम्य (cross-references)
इन संदर्भों में दिखता है कि ईश्वर की इच्छा के अनुसार कदम उठाने पर ही मानव प्रयास सार्थक रहते हैं; अन्यथा भय और असफलता संभव है।
विचार सम्भावनाएँ: reflection questions
संक्षिप्त निष्कर्ष
व्याख्या से स्पष्ट है कि परमेश्वर की योजना से बाहर जाकर निर्णय लेने पर परिणाम जोखिम भरे हो सकते हैं, पर यदि परमेश्वर की इच्छिका पालन किया जाए, तो मानव प्रयास परमेश्वर के हाथों में रहते हैं। इस पाठ में नबियों की एकजुट सलाह एक संकेत है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए स्पष्ट मार्ग दिखाता है—यही जीवन के लिए सुरक्षित और दृढ़ कदम हैं।
सीधा उद्धरण (यदि उपलब्ध): इस पाठ के चार सौ नबियों के सामंजस्य की उपलब्ध प्रतिलिपि में Henry, Barnes, Clarke से कोई निरंतर पूर्ण वाक्य उद्धरण यहाँ नहीं है; वे अपनी-अपनी विदेशी टिप्पणियों में इसी प्रकार के विचार प्रस्तुत करते हैं—परंतु इस हिंदी प्रस्तुति में हम उनके पूर्ण वाक्यों को नहीं दोहराते।