2 इतिहास 18:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

राजा ने उससे कहा, “मुझे कितनी बार तुझे शपथ धराकर चिताना होगा, कि तू यहोवा का स्मरण करके मुझसे सच ही कह।”

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2 इतिहास 18:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

2 इतिहास 18:15 में राजा निर्दिष्ट करता है कि वह भविष्यवक्ता से सच बोलने की शपथ सुनना चाहता है, ताकि राजा यह ज्ञात कर सके कि वह असली स्मरण और ईश्वर के संदेश के अनुरूप ही बोल रहा है। इस वाक्य में शपथ और स्मरण की मांग सत्ता-समझौते जैसी तात्कालिक राजनीति से ऊपर धर्मीय सच की सुनिश्चितता की अभिलाषा दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

यिर्मयाह/कथन-स्थिति के भीतर एक राजसी युक्ति और उत्तर-दायित्व का मिश्रण है: राजा ने भरोसा किया था कि भविष्यवक्ता सीधे और स्पष्ट बोले, ताकि युद्ध या सत्ता-चाल के निर्णय सतर्क और सत्य के आधार पर किए जाएँ। यह शपथ-धारण एक नैतिक कसौटी बनती है: क्या वक्तव्य सच है, न कि क्या यह लाभदायक लग रहा है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • वक्तव्य की प्रतिज्ञा: राजा चाहता ہے कि भविष्यवक्ता सत्य बोलने की कसौटी पर खरा उतरे—यानी तथ्य सत्य हों, न कि केवल प्रेरणा या आशंका के अनुरूप।
  • धर्म–राजनीति का तनाव: यह शपथ राजा की सत्ता के अभ्यास और धार्मिक सच्चाई के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रयास है।
  • कथित स्मरण की भूमिका: यह यहोवा के स्मरण की स्मरणशक्ति पर निर्भर है—राजा चाहता है कि सच वही हो जो यहोवा के स्मरण से मेल खाता हो।

वाचन-आधारित विचार

यह वाक्य यह दिखाता है कि सत्य बोलना शासन-प्रबंधन में कितना आवश्यक है। ईश्वर के प्रति निष्ठा हो तो राजनीतिक निर्णय भी सत्य पर टिकेंगे; अन्यथा छल और राजनीतिक फायदेमुख निर्णय बढ़ते जाते हैं। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि प्रभु के सम्मान के लिए सत्य बोलना साहसपूर्वक किया जाना चाहिए, भले ही परिणाम कठिन हों।

संक्षिप्त थीम-वक्ता

  • सत्य की कसौटी: शपथ के साथ सत्य का पालन।
  • ईश्वर-आधार: यहोवा को स्मरण रखने की मांग पर सत्य टिकता है।
  • राजनीति-धर्म: सत्ता के निर्णयों में नैतिकता की अनिवार्यता।

संबद्ध पाठ और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

- अन्य सन्दर्भ जहां सत्यान्वेषण का औचित्य उभरता है: उद्धारक या राजाओं के निर्णयों में भविष्यवाणी की सत्यवादी भूमिका। - एक प्रभावी निष्कर्ष: सत्य और ईश्वर के स्मरण के साथ बोलना नेतृत्व के लिए एक नैतिक बुनियाद बनाता है; यह शपथ-आचरण स्वयं-प्रशासन को मजबूत करता है।

छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष

किसी भी निर्णय में यह देखना चाहिए कि क्याStatement सच है और क्या यहोवा के स्मरण के अनुरूप है। सत्य के साथ काम करने से शासन-व्यवस्था में स्थिरता बढ़ती है और नैतिकता की गारंटी रहती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

  • यशायाह 56:7 — आराधना स्थल पर ईश्वर की इच्छा और सच्चे दिल से सेवा का संकेत; सच बोलना उसी आस्था का परिणाम है।
  • नीतिवचन 12:19 — सत्य बोलना ही स्थायित्व देता है, झूठी बात से क्षति होती है।
  • नीतिवचन 16:11 — न्यायपूर्ण तौल और सत्य का माप शासन के नियमों में मेल पैदा करता है।

नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से संक्षिप्त और संगत संकेतों को मिलाकर एक समन्वित व्याख्या प्रस्तुत की गई है; जहां उपयुक्त था, उनसे सद्वचन उद्धृत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 18:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 14:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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परन्तु इस्राएली पुरुष उस दिन तंग हुए, क्योंकि शाऊल ने उन लोगों को शपथ धराकर कहा, “श्रापित हो वह, जो सांझ से पहले कुछ खाए; इसी रीति मैं अपने शत्रुओं से बदला ले सकूँगा।” अतः उन लोगों में से किसी ने कुछ भी भोजन न किया।

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राजा ने उससे कहा, “मुझे कितनी बार तुझे शपथ धराकर चिताना होगा, कि तू यहोवा का स्मरण करके मुझसे सच ही कह।”

मत्ती 26:63 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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परन्तु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा “मैं तुझे जीविते परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ*, कि यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।”

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