Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 2:1 2 कुरिन्थियों 2:2 2 कुरिन्थियों 2:3 2 कुरिन्थियों 2:4 2 कुरिन्थियों 2:5 2 कुरिन्थियों 2:6 2 कुरिन्थियों 2:7 2 कुरिन्थियों 2:8 2 कुरिन्थियों 2:9 2 कुरिन्थियों 2:10 2 कुरिन्थियों 2:11 2 कुरिन्थियों 2:12 2 कुरिन्थियों 2:13 2 कुरिन्थियों 2:14 2 कुरिन्थियों 2:15 2 कुरिन्थियों 2:16 2 कुरिन्थियों 2:17



2 कुरिन्थियों 2:13 पर चर्चा: भीतर की शांति और पितृत्व-भरोसा
इस पद में पॉल एक क्षण की असंतोष और असंतुलन का उल्लेख करते हैं—ताकी उन्हें तीतुस की गैरहाज़िरी ने व्यथित किया। यह verse याद दिलाती है कि विश्वासी जीवन में कभी-कभी तात्कालिक आराम और स्पष्टता की कमी हमें भीतर से विचलित कर देती है, परंतु ईश्वर की योजना में यही असंयम भी एक अध्यापन है: परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार सामंजस्य और धैर्य की परीक्षा।
स्वरचित संदर्भ और मूल संदेशन
पौल का यह शब्द उन दिनों के क्रूस-यात्रा के बीच लिखे गए हैं, जहाँ उन्होंने बहरे-चाहे दुख के बावजूद मसीही समुदाय के साथ सचेत और संवेदनशील रहने की कोशिश की। वह तीतुस के दर्शन के लिए आतुर थे—उसे सहायता, मार्गदर्शन और सत्यापन की जरूरत थी—परन्तु वह नहीं मिल पाए; इस कारण वह मकिदुनिया की ओर चले गए। यह बताता है कि मिशन के मार्ग में व्यक्तिगत अपेक्षाओं के टूटना कितना सामान्य है, परन्तु ईश्वर की योजना के अनुरूप आचरण कैसे बना रहना चाहिए।
मुख्य संदेश
प्रमुख विषय-विचार
इस पाठ में हमें तीन बातें समझ में आती हैं:
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त संदर्भ और तारक)
1) रोमि 8:28 से प्रेरणा: प्रेरित-जीवन में हर घटना परमেশ्वर की लोक-योजना के साथ जुड़ी होती है; संकट भी उद्धारकारी उद्देश्य की पूर्ति में सहायक बन सकता है।
2) बहुत से समय आरोहण और गिरावट एक साथ चलते हैं—याकूब 1:2-4 का स्मरण: Trial से आस्था परिशुद्ध होती है और धैर्य पूरा होता है।
3) पॉल के मित्रों और मिशन-सम्बन्धी असुविधाओं पर 1 Kor 16:10-11 का संदर्भ: संदेशवाहक की सुरक्षा और सहयोग मानसिक संतुलन बनाए रखते हैं।
आत्म-चिंतन: एक आध्यात्मिक अभ्यास
हमारी प्रतिक्रिया तब सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है जब हमारे पास वही खोज नहीं मिलती जो हम चाहतें हैं। इस verse से हमें यह सीख मिलती है कि आत्मा-विश्वास में स्थिरता कैसे बनाएं: (1) ईश्वर की योजना पर भरोसा रखें, (2) मानव सम्बन्धों में धैर्य रखें और (3) एक पवित्र जीवन के लिए छोटे-छोटे कदम उठाते रहें।
कोटेशन नोट
यदि आप संरचना में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण देखना चाहें, तो नीचे की रेखाओं में उनके टीका-टिप्पणियाँ उपलब्ध हैं:
- Henry, Barnes, Clarke के संकलनों से, “परमेश्वर के काम अनुकूल हैं” जैसा सामान्य विचार मिल सकता है; विशिष्ट पंक्तियाँ उपयोग में आईं तो नोट किया जाएगा।