2 शमूएल 16:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कदाचित् यहोवा इस उपद्रव पर, जो मुझ पर हो रहा है, दृष्टि करके आज के श्राप* के बदले मुझे भला बदला दे।”

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2 शमूएल 16:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 16:12 — उपद्रव पर शांति की आशा

यह प्रसिद्ध पंक्तिDavid के पुत्र अभिशप्त और साया-चिह्नित समय में उठती है। जब दाऊद के विश्वासघाती पुत्र अबशैल के साथ घटनाक्रम बदतर होता है, तब दाऊद अपने सेवकों के साथ जंगलों में भाग रहा होता है। यह टीका उसी समय का है, जब दाऊद ने कहा कि अगर यहोवा उसे इस विपत्ति के कारण “आज के श्राप के बदले मुझे भला बदला दे,” तो उसे उम्मीद है कि परमेश्वर न्याय करेगा।

तत्काल संदर्भ और दाऊद की स्थिति

यह उद्धरण एक संकट के बीच में है: राजा दाऊद बनाम उसका पुत्र और अविश्वासी मित्रावर्ग। दाऊद अपने दर्द और असफलताओं के बीच ईश्वर की नीति पर यकीन बनाए रखता है—यह दर्शाता है कि बुराई की घड़ी में भी परमेश्वर की योजना मान्य है, और मानव विरोध के बावजूद समिश्रित आस्था बनी रहती है।

ईश्वर के बारे में पाठ से मिलती बातें

पाठ यह संकेत करता है कि परमेश्वर हर परिस्थिति को देखता है, और मानव के भीतर की भावनाओं को भी जानता है। जहां इंसान शंका और क्रोध से भर जाते हैं, वहाँ दाऊद की ईमानदारी यह कहती है कि प्रभु की सत्ता और न्याय पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। यहोवा की भूमिका परमप्रियता, विवेक और न्याय के स्रोत के रूप में उभरती है; वह विपत्ति के समय भी दिशा देता है और अंततः प्रयोजन सिद्ध करता है।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • या श्राप: यहां श्राप से तात्पर्य एक दंडात्मक स्थिति है जिसे मनुष्य अपने अपराध के कारण भुगतता है।
  • — यह व्यक्ति का अविश्वास नहीं, बल्कि परमेश्वर की न्याय व्यवस्था पर आशा है कि यदि मानव में गलतियाँ हों, तो परमेश्वर सही ढंग से प्रतिक्रिया करेगा।

संबंधित बाइबिल पद

अगले प्रवाह में कुछ अन्य संदर्भ इस सोच को समृद्ध करते हैं:

  • होशे 12:6 — परमेश्वर अपने समय में विश्वासयोग्य रहते कहता है कि तुम्हें अपनी तरफ से वचन रहना चाहिए; विश्वास से परिणाम आते हैं।
  • कुलुस्सियों 3:13 — धैर्य और एक-दूसरे के प्रति दया बनाए रखने कीuchar—गलतियों के बावजूद प्रेम बनाए रखने की शिक्षा मिलती है।
  • यूहन्ना 16:33 — यीशु का संदेश: दुखों के बीच भी शांति, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ; जगत के दुखों से तुम भयभीत न हों।

आज के संदर्भ में उपयोगी प्रकाश

1) संकट में भी ईश्वर के प्रभुत्व पर भरोसा बनाए रखना चाहिए; भावनाएँ उछाल पर हों तो परमेश्वर थेरेपी नहीं, बल्कि निर्णय देते हैं।

2) व्यक्तिगत आस्था में गड़बड़ी के समय पवित्रशास्त्र की सत्यालंकारों को ध्यान से पढ़ना, दया और क्षमा की राह चुनना उचित है।

3) दूसरों के प्रति वार्ता और विचार में धैर्य रखें; प्रतिक्रियाओं में कड़ाई के बजाय शांति और न्याय का मार्ग अपनाएं।

कथा-सार और एकीकृत निष्कर्ष

यह पाठ यह समझाता है कि विश्वास की कठिन घड़ियों में भी परमेश्वर की न्याय-पूर्ण योजना पर निर्भर रहना चाहिए। दाऊद की प्रेरित खोज बताती है कि श्राप और दुख के बीच भी ईश्वर की संतुलित चेतावनी और उत्तर देने की क्षमता सक्रिय रहती है।

चर्च-उद्धरण और साहित्य

फरमान: मॉडर्न टिप्पणियाँ के लिए नीचे दिए गए प्रमुख पठन-उद्धरण से प्रेरणा ली जा सकती है—

Matthew Henry से संक्षिप्त सार: यह स्पष्ट करता है कि प्रभु और भक्त के बीच भरोसे की कसौटी परिस्थिति के सामने सच- सत्य का अनुभव कराती है।

Albert Barnes से संक्षिप्त सार: श्राप के माध्यम से मनुष्य की हृदय-स्थिति पर विचार और परमेश्वर की न्याय व्यवस्था का महत्व दिखता है।

Adam Clarke से संक्षिप्त सार: दुख-दर्द में भी दाऊद की प्रार्थना यह दर्शाती है कि परमेश्वर की उपस्थिति भरोसे की स्रोत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 16:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्‍न करती है; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

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भजन संहिता 25:18 (HINIRV) »
तू मेरे दुःख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।

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परन्तु तेरे परमेश्‍वर यहोवा ने बिलाम की न सुनी; किन्तु तेरे परमेश्‍वर यहोवा ने तेरे निमित्त उसके श्राप को आशीष में बदल दिया, इसलिए कि तेरा परमेश्‍वर यहोवा तुझसे प्रेम रखता था।

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