Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 थिस्सलुनीकियों 2:1 2 थिस्सलुनीकियों 2:2 2 थिस्सलुनीकियों 2:3 2 थिस्सलुनीकियों 2:4 2 थिस्सलुनीकियों 2:5 2 थिस्सलुनीकियों 2:6 2 थिस्सलुनीकियों 2:7 2 थिस्सलुनीकियों 2:8 2 थिस्सलुनीकियों 2:9 2 थिस्सलुनीकियों 2:10 2 थिस्सलुनीकियों 2:11 2 थिस्सलुनीकियों 2:12 2 थिस्सलुनीकियों 2:13 2 थिस्सलुनीकियों 2:14 2 थिस्सलुनीकियों 2:15 2 थिस्सलुनीकियों 2:16 2 थिस्सलुनीकियों 2:17



मुख्य तात्पर्य
2 थिस्सलुनीकियों 2:12 में प्रेरित पौलुस यह दर्शाते हैं कि जो लोग सत्य पर विश्वास नहीं करते तथा अधर्म से प्रसन्न रहते हैं, उन्हें दण्ड मिलेगा। यह संदेश अंतिम न्याय के सम्मुख सत्यान्वेषी जीवन-लक्ष्य के महत्व पर जोर देता है: सचाई पर स्थिर विश्वास ही उद्धार की राह है, अन्यथा बिना परिवर्तन के जीवन का निष्कर्ष दंड है।
साहित्यिक संदर्भ
पौलुस ने इस पत्र में अंधकार में चलने वालों के व्यवहार को स्पष्ट किया है: सत्य की रोशनी के विरुद्ध जो राह हो, वह अस्वीकार्य है। यह वाक्य 2 Thessalonians के एक व्यापक दायरे का हिस्सा है, जहाँ प्रभु की सुध-बुध और सत्य-परक जीवन की मांग की जाती है। इस पाठ में दंड और दया के परिप्रेक्ष्य हैं—न्याय का नियम सत्य के साथ जुड़ा है, और अधर्म में प्रसन्नता असत्य की पुष्टि है।
सार्वभौमिक theological संकेत
पवित्रशास्त्र के अन्य भागों से सम्बन्ध
- रोम 2:8-9 देखें: सत्य के विरुद्ध इरादा और कर्म के अनुसार परिणाम।
- यूहन्ना 3:19-21 देखें: ऐसी झूठी वास्तविकता जो अंधकार में रहती है, सत्य से दूर जाती है।
- यוות्तापीरण 21:8 देखें: अंत के दंड की स्पष्टता उन लोगों के बारे में जो धारणाओं में स्थिर नहीं रहते।
विचार-पूछताछ
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य सच को मानने और सत्य में जीवित रहने के महत्व को स्पष्ट करता है। अधर्म से खुशी पाने वाले अंततः दण्ड के भागी होंगे, जबकि सत्य के अनुसार जीवन जीना उद्धार के साथ जुड़ता है। यह पाठ प्रेरित को याद दिलाता है कि नैतिकता और विश्वास एक साथ चलते हैं; सत्य की राह चुनना ही परम परिणाम के लिए आवश्यक है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल संदर्भ के रूप में)
Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे पूरा पाठ उद्धरण आवश्यकतानुसार दिये जा सकते हैं—पर पहले उनके छोटे टिप्पणीगत संकेत जो मांग के अनुसार उपयोग में आएं, उनसे प्रयोग किया गया है. नीचे केवल प्रेरक संदर्भ-सीमा:
“... सत्य पर विश्वास नहीं करते, वरन् अधर्म से प्रसन्न होते हैं, सब दण्ड पाएँ।”