Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 4:1 2 तीमुथियुस 4:2 2 तीमुथियुस 4:3 2 तीमुथियुस 4:4 2 तीमुथियुस 4:5 2 तीमुथियुस 4:6 2 तीमुथियुस 4:7 2 तीमुथियुस 4:8 2 तीमुथियुस 4:9 2 तीमुथियुस 4:10 2 तीमुथियुस 4:11 2 तीमुथियुस 4:12 2 तीमुथियुस 4:13 2 तीमुथियुस 4:14 2 तीमुथियुस 4:15 2 तीमुथियुस 4:16 2 तीमुथियुस 4:17 2 तीमुथियुस 4:18 2 तीमुथियुस 4:19 2 तीमुथियुस 4:20 2 तीमुथियुस 4:21 2 तीमुथियुस 4:22



2 तीमुथियुस 4:10 – पाठ का तात्पर्य और इसकी पवित्रता
यह पवित्र बैठक पत्र में पवित्रशास्त्री पौलुस का अन्तिम संदेश है। यहाँ वह अपने साथी योद्धाओं, सेवकों और भाइयों के बारे में स्मरण कराते हैं कि किस प्रकार विश्वासी जीवन के लिए विश्वासीपन और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। 2 तीमुथियुस 4:10 में “डेमास ने इस संसार को प्रिय जानकर मुझे छोड़ दिया है” जैसी कड़वी घटनाओं का उल्लेख होता है, जो प्रेरित पौलुस के कठोर समय के एक अंश को दर्शाती है।
पाठ का तुरंत सेटिंग
पौलुस अपने अंतिम पत्र में अपने शीघ्र आगमन की बात कहते हुए तीमुथियुस को याद दिलाते हैं कि कुछ साथियों ने दूरी बना ली है। डेमास नामक एक विश्वासी ने यह संसार और उसकी प्रिय महत्वाकांक्षाओं को पहले रखा और पौलुस के साथ सेवा छोड़ दी। यह घटना स्पष्ट करती है कि विश्वासी जीवन में उत्साह और समर्पण के समय भी त्रुटियाँ और अस्थिरता आ सकती है, पर परमेश्वर के वैराग्य और योजना अभी भी स्थिर रहती है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में जो पाठ करता है
यह पद हमें यह सिखाता है कि आत्मविश्वास Christ पर आधारित होना चाहिए, न कि सिर्फ संसारिक रिश्तों या अवसरों पर। डेमास का प्रकरण एक चेतावनी है कि सांसारिक प्रोत्साहन, प्रतिष्ठा, या आराम की चाह में विश्वासपात्र साथियों का विश्वास टूट सकता है। किन्तु पवित्रγραμμα के अनुसार, परमेश्वर की योजना और उद्धारकार्य कभी रुकता नहीं; प्रभु की कृपा से संदेश आगे बढ़ते रहते हैं।
प्रमुख शब्दों या चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित पद
तिमुथियुस को दी गई अन्य चेतावनियाँ और प्रेरक स्मरण, जैसे- इमानदारी, धैर्य और सेवा के प्रतीकात्मक दायित्व, यीशु के प्रेम और परमेश्वर की स्तुति से जुड़ी प्रतिज्ञाओं से मेल खाती हैं। नीचे तीन संबद्ध संदर्भ छोटे पाठ के साथ स्पष्ट किये जाते हैं:
आज के लिए अनुप्रयोग
हममें से प्रत्येक को यह सवाल करना चाहिए: क्या मैं प्रभु के साथ अपनी भूमिका और दायित्व को मोह के कारण या अवसरों के कारण छोड़ रहा हूँ? हमारे मित्र, साथी, और पथ-प्रवर्तक कभी-कभी कठिन समय में साथ छोड़ दें तो भी प्रभु की योजना आगे बढ़ती है। इसलिए हमें आत्म-परख, दृढ़ विश्वास, और समुदायिक सहयोग को मजबूत बनाकर चलना चाहिए। पौलुस की परिषद से सीख लेते हुए—धैर्य, विनम्रता, और परमेश्वर के उद्देश्य की पहचान बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है।
इस प्रकार, 2 तीमुथियुस 4:10 हमें यह स्पष्ट संदेश देता है कि संसारिक आकर्षण कभी-कभी ईश्वर की प्रेरणा को चुनौती देते हैं; पर परमेश्वर की योजना, और पवित्र प्रेरितों की प्रेरणा अडिग रहती है।
नोट: नीचे उद्धरण केवल संदर्भित पाठों के लिए हैं; पूर्ण पद्यों का पाठ नहीं दिया गया है।