Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 4:1 2 तीमुथियुस 4:2 2 तीमुथियुस 4:3 2 तीमुथियुस 4:4 2 तीमुथियुस 4:5 2 तीमुथियुस 4:6 2 तीमुथियुस 4:7 2 तीमुथियुस 4:8 2 तीमुथियुस 4:9 2 तीमुथियुस 4:10 2 तीमुथियुस 4:11 2 तीमुथियुस 4:12 2 तीमुथियुस 4:13 2 तीमुथियुस 4:14 2 तीमुथियुस 4:15 2 तीमुथियुस 4:16 2 तीमुथियुस 4:17 2 तीमुथियुस 4:18 2 तीमुथियुस 4:19 2 तीमुथियुस 4:20 2 तीमुथियुस 4:21 2 तीमुथियुस 4:22



2 तीमुथियुस 4:14 पर टिप्पणी
परिचय: पत्रीका 4 में पौलुस अपने प्रेषित उद्देश्य के पथिक को स्पष्ट करता है कि उसके विरुद्ध दमन और बुराइयाँ कितनी कठोर रही हैं, परन्तु परमेश्वर के न्याय का कालक्रम सत्य है। इस पंक्ति में सिकन्दर ठठेरे जैसी किसी प्रतिकूल ताकत के बारे में उल्लेख है; भले ही परिस्थितियाँ प्रतिशोध को चाहें, पर लेखन हमें विश्वास दिलाता है कि प्रभु उसे उसके कर्मों के अनुसार बदलेगा।
पद का संदर्भ और उसका अर्थ
इस कठिन संदर्भ में पॉल अपने विश्वास के मित्र तीमुथियुस को चेतावनी देता है कि वे ईश्वर के न्याय के लिए टिके रहें और वे अपने शत्रुओं के लिए भी प्रार्थना करें। यहाँ “सिकन्दर ठठेरे” एक रूपक है जो दुष्प्रवृत्ति के प्रताड़नात्मक व्यवहार को दर्शाता है। भगवद व्यवहार के अनुसार, परमेश्वर अन्याय के लिए प्रतिशोध नहीं छोड़ते; उनका निर्णय समय के अनुसार और न्यायपूर्ण होता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि अनुभवातीत अत्याचार के बावजूद, सत्य-आस्था में स्थिर रहना चाहिए। प्रभु के न्याय का বিশ্বাস हमें धैर्य देता है और कर्मों के फल का भरोसा कराते हैं। उदाहरणार्थ, भजन और वचनों में यह विचार आता है कि दुष्टों की बुराइयों का उत्तर देरी से सही, परन्तु परिणाम पवित्र इरादों से जुड़ा होता है।
मुख्य पाठकों के लिए एकीकृत निष्कर्ष
यह पद एक ईमानदार स्मरण कराता है कि जीवन में उन लोगों से सामना होता है जो हमारे विरुद्ध अन्याय करते हैं; पर पॉल की तरह, हमें प्रभु पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और अपने कर्मों में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए। परमेश्वर का न्याय समय के अनुसार आता है और उसकी योजना पूरा होता है।
अनुभव-आधारित अनुप्रयोग
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंसे
याह् 40:8 और रोम 12:19 से प्रेरणा मिलती है कि शास्त्र में सत्य स्थिर रहता है और बदला देने का अधिकार परमेश्वर के हाथ है। यीशु के उपदेशों में भी शांति और धैर्य की मांग मिलती है, ताकि ईश्वर की rectitude प्रकट हो सके।
संक्षेप
2 तीमुथियुस 4:14 में विश्वासी को स्मरण दिलाया गया है कि अन्याय के बावजूद भी प्रभु के न्याय पर भरोसा रखें। गलत व्यवहार का उत्तर ईश्वर के हाथ छोड़ना नहीं, बल्कि धैर्य, सत्य-आचरण और प्रार्थना के साथ संयमित जीवन जीना है। यह पंक्ति एक प्रेरणा है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईमानदार रहने से परमेश्वर प्रेरित करते हैं।
नोट: नीचे के उद्धरण केवल आवश्यक टिप्पणी के लिए हैं; पूर्ण पद का पाठ नहीं दिया गया है।
अनुमानित क्रॉस-रेफरेंसेस से अंतर्दृष्टि: भजन 28:4; रोम 12:19 — वे बताते हैं कि ईश्वर बदला नहीं, पर न्याय को पूरा करेंगे; और रोम 12 में आशीष और प्रतिरोध के बीच संतुलन का पाठ है।
शब्द-चयन टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सटीक उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो नीचे उद्धृत किए जाते हैं:
कथा-संदर्भ में कोई स्पष्ट (शब्द-निरीक्षण) उद्धरण उपलब्ध नहीं मिला; यदि मिलेगा, वही लिखा जाएगा।