3 यूहन्ना 1:10 बाइबल पद की व्याख्या
3 यूहन्ना 1:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए यदि मैं आऊँगा, तो उसके कामों की जो वह करता है सुधि दिलाऊँगा, कि वह हमारे विषय में बुरी-बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्तोष न करके स्वयं ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है और कलीसिया से निकाल देता है।
3 यूहन्ना 1:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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3 यूहन्ना 1:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 10:10 (HINIRV) »
जो नैन से सैन करके बुरे काम के लिए इशारा करता है उससे औरों को दुःख होता है, और जो बकवादी मूर्ख है, उसका नाश होगा।

यशायाह 66:5 (HINIRV) »
तुम जो यहोवा का वचन सुनकर थरथराते हो यहोवा का यह वचन सुनो: “तुम्हारे भाई जो तुम से बैर रखते और मेरे नाम के निमित्त तुमको अलग कर देते हैं उन्होंने कहा है, 'यहोवा की महिमा तो बढ़े, जिससे हम तुम्हारा आनन्द देखने पाएँ;' परन्तु उन्हीं को लज्जित होना पड़ेगा। (2 थिस्स. 1:12)

नीतिवचन 10:8 (HINIRV) »
जो बुद्धिमान है, वह आज्ञाओं को स्वीकार करता है, परन्तु जो बकवादी मूर्ख है, उसका नाश होता है।
3 यूहन्ना 1:10 — आधुनिक संदर्भ में पाठ-आख्यान
यह पद विशेष रूप से उस संदर्भ को खोलता है जहाँ प्रचारक-भरोसा, व्यवहार और कलीसिया के भीतर अनुशासन के बीच संतुलन की चर्चा है। यद्यपि पाठ सीधे एक दुष्ट संचालक के बारे में है, इसका संदेश आज के विश्वासियों के लिए भी स्पष्ट है: प्रबल आचरण, सतत सत्य, और समुदाय की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।
पद के तुरंत सेटिंग का परिचय
यह वचन वह चेतावनी है जो 3 यूहन्ना के संदर्भ में निर्बल-विश्वास को रोकने के लिए दी गई है। प्रेरित योहन्ना स्पष्ट करना चाहते हैं कि एक गुटबंधन और द्वेषपूर्ण भाषा, भले ही वह बाहर से प्रतीत हो किक्ति है, आंतरिक गिरावट का लक्षण है। यहाँ कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के आचरण में ऐसी प्रवृत्ति है कि वह भाइयों के विरुद्ध दुषेपण बोलता है, उन्हें ग्रहण कर लेने से रोकता है, और कलीसिया से बाहर कर देता है—तो यह उसी समुदाय की पवित्रता के लिए आवश्यक कदम है।
पाठ से ईश्वर या विश्वास के बारे में स्पष्ट विचार
यह पाठ विश्वास के भीतर ईमानदार प्रेम और सत्य के मानक की महत्ता को उजागर करता है। ईश्वर की दृष्टि में प्रेम और नियम एक साथ चलते हैं: विश्वास समुदाय को बुराइयों से दूर रखने के नियम के पालन के बिना वास्तविक प्रेम अधूरा है। साथ ही यह दिखाता है कि विश्वासियों की जिम्मेदारी है कि वे सत्य का पालन करें और भीतर की बुराइयों को रोके ताकि समूह एकता और आयाम बना रहे।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध प्रश्नोत्तर और related passages
1) यूहन्ना 1:9— सत्य और परमेश्वर के प्रकाश में confession और क्षमा का स्थान।
2) 2 कुरिनthियों 6:14— साथ न चलना और अलगाव के सिद्धांत पर दृष्टि।
3) मत्ती 18:15-17— यदि भाई के विरुद्ध समस्या हो तो कैसे क्रमबद्ध रूप से संभाला जाए, जिसमें अनुशासन और समुदाय-निर्वासन शामिल हैं।
इन Cross-refs का तात्पर्य यह है कि बुराई का निषेध और सच्चे प्रेम के साथ बहुलता-समुदाय की रक्षा कैसे की जाए, बिना दमनकारी बने ही।
आज के संदर्भ में उपयोगी निष्कर्ष
1) विश्वास-समुदाय की सुरक्षा के लिए स्पष्ट मानक बनाना आवश्यक है; तब ही प्रेम सचेत और संपूर्ण रहता है।
2) व्यक्तिगत भाषा और सार्वजनिक आचरण में सत्य की मांग बनी रहे; ताकि आलोचना-नुकसान के बजाय सुधार संभव हो।
3) यदि कोई व्यक्ति बार-बार खींचातानी और दुष्प्रचार में लगा रहे, तो समुदाय के लिए उचित सीमाएँ स्थापित करना उचित है ताकि भाई-भाई के बीच विश्वास बना रहे।
कॉल टू एक्शन: आज की कलीसिया के लिए
सत्य की रक्षा करना और प्रेम से भरे समुदाय को बनाए रखना—ये दोनो एक साथ चलते हैं। यदि किसी के शब्द और व्यवहार से विभाजन बनता है, तो नम्रता के साथ चेक-एंड-चेंज की प्रक्रिया अपनाएं; ताकि क्रिया-धारणा से बंधन उभरे और शुद्ध पवित्रता बनी रहे।
हिंदी कमेंट्री में उद्धृत स्पष्ट पंक्तियाँ: के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से प्रत्यक्ष संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग आवश्यकता अनुसार पाठ के भीतर प्रस्तुत किया गया है—परंतु पूर्ण पाठ उद्धरण यहाँ नहीं दिए गए हैं, ताकि मूल पाठ की आत्मा सुरक्षित रहे।